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एरण में पत्थरों पर अंकित है बलराम जन्म की पूरी कहानी, भारत में ऐसा कहीं नहीं मिलता उल्लेख

गुप्तकाल के ऐतिहासिक नगर सागर के एरण में मिले बलराम जन्म के चित्रण वाले शिलापट्ट. पत्थरों पर अंकित है पूरी कहानी. कपिल तिवारी की रिपोर्ट.

SAGAR LORD BALRAM BIRTH STORY
एरण में पत्थरों पर अंकित है बलराम जन्म की पूरी कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : September 1, 2026 at 9:07 PM IST

6 Min Read
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सागर: भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्म की कहानी के बारे में कम ही लोग जानते हैं, क्योंकि उनके जन्म का चित्रण वैसा कहीं देखने नहीं मिलता है, जो उनके जन्म की कहानी है. भारत में एरण एक मात्र ऐसी जगह है, जहां 1700 साल पहले बलराम के जन्म की पूरी कहानी पत्थरों पर अंकित है.

सागर में स्थित एरण गुप्तकाल का ऐतिहासिक नगर है, जहां कई दुर्लभ मूर्तियां और शिलापट्ट पाए गए हैं. जिनमें गुप्तकाल के धर्म और संस्कृति की झलक मिलती है. फिलहाल यहां पर उत्खनन का कार्य जारी है और यहां बलराम जन्म के पूरे चित्रण के साथ शिलापट्ट मिले हैं.

सागर के एरण में मिले बलराम जन्म के चित्रण वाले शिलापट्ट (Prof. Mohanlal Chadhar)

क्या है भगवान बलराम के जन्म की कहानी?

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "पौराणिक कथाओं के अनुसार बलराम शेषनाग का अवतार हैं, जो देवकी के सातवें गर्भ के रूप में आए थे, लेकिन कंस के डर से देवकी के गर्भ का प्रत्यारोपण रोहणी के गर्भ में किया गया था.

हालांकि इस क्रिया को भगवान विष्णु के आदेश से योगमाया द्वारा किया गया था. पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमारों की मौजूदगी में ये किया गया था. इसी वजह से भगवान बलराम का एक नाम संकर्षण भी है."

ERAN STONES BALRAM STORY
भगवान बलराम के जन्म की कई दुर्लभ मूर्तियां और शिलापट्ट मिले (ETV Bharat)

एरण में बलराम जन्म की पूरी कहानी पत्थरों पर है अंकित

प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "एरण में गुप्तकालीन मंदिर परिसर में बलराम जन्म के समय भगवान शेषशायी विष्णु की स्तुति करते हुए वासुदेव और देवकी को दिखाया गया है. परिसर में एक चबूतरे पर लगे शिलापट्टों में से लगभग 5 फीट लंबे शिलापट्ट पर बलराम जन्म अंकन किया गया है. इसी शिला फलक में सबसे पहले भगवान विष्णु का अंकन है, क्योंकि बलराम को शेषनाग का अवतार कहा गया है. प्रतिमा में भगवान विष्णु को शेषनाग की कुंडलियों के रूप में शैय्या पर लेटे हुए दिखाया गया है. उनके सिर पर शेषनाग के सात फन छत्र के समान फैले हैं. नाग कुण्डली के नीचे समुद्र (क्षीर सागर) की लहरों का सुन्दर चित्रण आड़ी रेखाओं से किया है."

BALRAM BIRTH STORY STONES
यशोदा और नंदबाबा के यहां बचपन का चित्राकंन (ETV Bharat)

प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "भगवान विष्णु के बांये हाथ में चक्र, शंख और दाहिने हाथ में गदा और एक हाथ से सिर को सहारा देते हुए चित्रित किया गया है. किरीट मुकुट, एकावली, कर्णकुंडल, कड़ा, दीर्घ वनमाला से सुशोभित देवता की नाभि से उद्भूत कमल पर ब्रह्मा को प्रदर्शित किया है. विष्णु के पैरों में धोती के चुन्नटे साफ दिखाई दे रही हैं. ये प्रतिमा विष्णुधर्मोत्तर पुराण के निर्देश अनुसार बनाई गई है. विष्णु के पैरों के पास भूदेवी उनके पैर दबा रही हैं और भगवान विष्णु कमल पर बैठे हुए हैं.

देवी के सिर पर शेषनाग का छत्र दिखाया गया है. देवी प्रतिमा आभूषणों से सुसज्जित बहुत कलात्मक और चारूतत्व से परिपूर्ण है. देवी लक्ष्मी के पीछे अंजलि मुद्रा में देवकी एवं वासुदेव को हाथ जोड़े हुए दिखाया गया है. पुरुष को सिर पर मुकुट और सुन्दर कुंडल पहने हुए दिखाया गया है.

GUPT PERIOD HISTORICAL CITY
एरण में पत्थरों पर अंकित है जन्म की पूरी कहानी (ETV Bharat)

ये आयुध पुरुष की आकृति वासुदेव की है. वासुदेव के पीछे नारी आकृति में देवकी को प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है. विष्णु के पैरों के ऊपर मानवाकार गरुड़ को उड़ते हुए उकेरा गया है. इस प्रतिमा का निर्माण 5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी का है. इसी शिलाफलक पर रोहणी के गर्भ से बलराम के जन्म का दृश्य उकेरा गया है."

रोहणी के गर्भ से बलराम जन्म का चित्रांकन

प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "बलराम जन्म के पहले शेषशायी विष्णु की आराधना का दृश्य बलराम के शेषशायी अवतार का सूचक है. शेषशायी विष्णु के अंकन वाले शिलाफलक में दूसरे दृश्य में वासुदेव को एक चौकी पर बैठा दिखाया गया है. चौकी को फूलों की आकृति से अलंकृत किया गया है. दांई ओर चवरधारणी सेविका का अंकन है. कथा के अनुसार अश्वनिकुमारों की मदद से देवकी के सातवें गर्भ को वासुदेव की दूसरी पत्नि रोहणी के गर्भ में प्रत्यारोपित किया गया था.

BALRAM BIRTH STORY STONES
पत्थरों पर अंकित है बलराम जन्म की कहानी (ETV Bharat)

इसी कारण बलराम के जन्म के समय दो अश्वमुख वाले अश्विनीकुमारों का अंकन किया गया है. बलराम के जन्म का भव्य अंकन शिलाफलक में किया गया है. बलराम के जन्म के समय रोहणी के समीप सेविकाओं का अंकन है. माता रोहणी का सिर एक स्त्री की गोद में रखा दिखाया गया है, जो सम्भवतः यशोदा हैं. एक वृद्ध सेविका रोहणी के पैरों के समीप खड़ी है.

शिलाफलक के तृतीय शिलापट्ट के दृश्य में माता रोहणी लेटी हुई नवजात शिशु बलराम को स्तनपान कराते हुए अंकित हैं. सभी स्त्रियों को सुन्दर केश विन्यास के साथ आभूषण धारण किये हुए दिखाया है. इसी शिलाफलक पर दो द्वार रक्षक को ढाल तलवार लिए सुन्दर दृश्य उकेरा गया है."

SAGAR ERAN
गुप्तकाल का ऐतिहासिक नगर है एरण (ETV Bharat)

यशोदा और नंदबाबा के यहां बचपन का चित्राकंन

प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "यहां पर सिर्फ बलराम के जन्म की कहानी नहीं, बल्कि उनके बचपन का चित्रण भी किया गया है. पहले दृश्य में बलराम का जन्म है. इसी शिलाफलक में एक अन्य दृश्य में नंदगाव में देवी रोहणी बलराम को गोद में खिलाते हुए अंकित है.

ERAN STONES BALRAM STORY
गुप्तकाल के धर्म और संस्कृति की झलक (ETV Bharat)

दूसरे दृश्य में बलराम को गोद में लिए हुए माता यशोदा एवं नंदबाबा को एक चौकी पर बैठे हुए दिखाया गया है. एरण से दो अन्य बलराम की प्रतिमाएं भी मिली हैं. इन प्रतिमाओं में एक प्रतिमा के पीछे शेषनाग के फन दिखाए गए हैं. दूसरी प्रतिमा में बलराम को एक हाथ में हल एवं दूसरे हाथ में सुरा का पात्र लिए दिखाया गया है."