रात होते ही जंगल से बाहर आते हैं तेंदुए, शिकार के लिए नाप देते हैं 50 किमी सफर
मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में हो रही तेंदुओं की मौत, रात के समय शिकार के लिए जंगल से बाहर आते हैं तेंदुए.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : November 13, 2025 at 1:08 PM IST
सागर: मध्य प्रदेश में आए दिन तेंदुओं की मौत की खबरें सामने आ रही हैं. अकसर देखा गया है कि रात के समय में वाहन की चपेट में आने से तेंदुओं की मौत हो रही है. इसके पीछे का कारण है कि तेंदुओं का हमेशा रात के समय मूवमेंट रहता है, जब वह जंगल से निकलकर सड़कों पर आते हैं या रिहायशी इलाकों में दाखिल हो जाते हैं. दिन के समय में तेंदुए जंगल में ही रहते हैं. शिकार की तलाश में रात में उन्हें सड़कों पर घूमते हुए देखा जा सकता है. क्योंकि अंधेरा उनके शिकार करने के लिए बहुत फायदेमंद होता है. शिकार की तलाश के लिए तेंदुए 50 किलो मीटर तक दौड़ भाग कर लेते हैं.
रात में रहता है तेंदुओं का मूवमेंट
खास बात यह है कि रात के समय शिकार करने से तेंदुए टाइगर, लकड़बग्घे जैसे वन्यजीवों से भी बचे रहते हैं. आम तौर पर बाघ, शेर, चीते ये जानवर इंसान और पालतू मवेशियों पर हमला नहीं करते हैं. लेकिन तेंदुआ बछडे़, बकरियां और यहां तक छोटे बच्चों पर भी हमला कर देता है. ये काफी फुर्तीला और चालाक होता है. अकसर शिकार की तलाश के दौरान ही वाहनों की चपेट में आने से उनकी मौत हो जाती है. मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय में तेंदुओं की मौत के जितने भी मामले सामने आए हैं, उसका वाहनों की चपेट में आना रहा है. सागर में नेशनल हाइवे 44 पर भी तेंदुए की मौत सड़क हादसे में हुई है.

नेशनल हाइवे-44 पर रफ्तार बनी तेंदुए की मौत की वजह
देश के सबसे बड़े नेशनल हाइवे 44 पर तेज रफ्तार वाहन हादसों का सबब बन रही है. सड़क हादसों में इंसानों की मौत के अलावा अब जंगली जानवरों की भी जान जा रही है. ताजा मामले में एक मादा तेंदुए का शव नेशनल हाइवे पर सागर और नरसिंहपुर रोड के बीच मिला है. जिसके शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं. वन विभाग तेंदुए की मौत की वजह किसी वाहन से टकराकर चोटिल होने को मान रहा है. हालांकि तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया है. असली वजह पीएम रिपोर्ट आने पर सामने आएगी.
शरीर पर चोट के निशान
वन परिक्षेत्र अधिकारी अधिकारी ढाना प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि, ''बुधवार सुबह करीब 6 बजे सूचना मिली थी कि नेशनल हाइवे 44 पर सागर-नरसिंहपुर मार्ग के बीच गुरू चोपड़ा के पास एक तेंदुआ मृत अवस्था में पड़ा है. घटनास्थल पर जाकर देखा तो फोरलेन सड़क के किनारे वन्य प्राणी तेंदुआ मृत अवस्था में पाया गया, जिसके शरीर पर चोट के निशान थे.
पहली नजर में किसी वाहन के टकराने से मौत होने की संभावना लग रही है. मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया है. मृत तेंदुआ मादा थी, जिसकी उम्र करीब दो साल थी. मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा. पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार ढाना रेंज में मृत तेंदुए का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.''

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ढाना रेंज में काफी संख्या में तेंदुए
वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि, ''दक्षिण वन मंडल की ढाना रेंज में काफी संख्या में तेंदुए पाये जाते हैं. तेंदुओं की गिनती ना होने के कारण संख्या नहीं बताई जा सकती है. लेकिन हमें समय-समय पर रेंज के रहली, देवरी,गढ़ाकोटा और गौरझामर इलाके में घूमने और देखे जाने की सूचना मिलती है. तेंदुए अक्सर रात के समय ही सक्रिय रहते हैं. हो सकता है कि तेंदुआ शिकार की तलाश में जंगल से निकलकर सड़क पार कर रहा होगा. तभी किसी तेज रफ्तार वाहन से टकराकर गंभीर रूप से चोटिल होने के कारण मौत हो गयी हो.''
रात के शिकारी तेंदुए की खासियत
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्ट डाॅ. ए ए अंसारी बताते हैं कि, ''तेंदुआ अपने बचाव के लिए दिन में छिपा रहता है. अपने आप को बचाने के लिए जंगल में गुफाओं, बडे़-बडे़ पेड़ पर चढ़कर और ऊंची फसल वाले खेतों में छिपता है. यहां तक की अगर उसे कोई खंडहर नुमा सुनसान इमारत मिल जाती है तो ये उनमें भी छिप जाता है. केट फैमिली में ये सबसे शातिर और चालाक जानवर होता है.'' भारत में अनुमानतः 13,874 तेंदुए हैं, जिनमें से मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 3,907 तेंदुए हैं.
सड़क हादसों में मौत का यह है कारण
तेंदुओं की सड़कों पर मौत की वजह ये मानी जाती है कि तेंदुआ अपने बचाव के लिए काफी सतर्क और सक्रिय रहता है. पहले सड़कें चौड़ी नहीं होती थी और वाहनों की रफ्तार भी ज्यादा नहीं होती थी. जब उसे तेज रोशनी और आवाजाही ज्यादा समझ आती है, तो बचाव के लिहाज से वो जल्द सड़क पार करने की कोशिश करता है. लेकिन सड़कों की चौड़ाई और वाहनों की रफ्तार तेज होने के कारण अब तेंदुए की सड़कों पर मौत के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं.

