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कैलिफोर्निया के किन्नू से बन रहा लाजवाब अचार, नींबू और संतरा का एक साथ मिल रहा स्वाद

किन्नू फल का कैलिफोर्निया से बुंदेलखंड तक का दिलचस्प सफर, पंजाब से लाए पौधे में लगने लगे रसदार फल.

SAGAR KINNOW FRUIT TREE
किन्नू फल का कैलिफोर्निया से बुंदेलखंड तक का दिलचस्प सफर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 1, 2026 at 6:34 PM IST

5 Min Read
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सागर: कैलीफोर्निया से आया किन्नू फल का छोटा सा पौधा बुंदेलखंड में पेड़ के रूप में आकार लेता जा रहा है और इसमें खट्टे मीठे स्वाद के फल भी लग रहे हैं. आमतौर पर ठंडे इलाकों में उगने वाला ये पौधा कैलीफोर्निया से कैसे बुंदेलखंड पहुंचा, इसका सफर बड़ा दिलचस्प है. ठंडे प्रदेशों से अलग यहां के फलों में खट्टापन ज्यादा है, यहां पर लोग इसका अचार के तौर पर भरपूर उपयोग कर रहे हैं.

पेड़ की भांति बढ़ता जा रहा है पौधा

जब मध्य प्रदेश के राज्यपाल डाॅ. बलराम जाखड़ हुआ करते थे, तब वो सागर जिले के दौरे पर आए थे. उन्होंने किसानों से चर्चा के दौरान पंजाब के अबोहर में उनके फार्म हाउस घूमने के लिए कहा था. फिर राज्य सरकार द्वारा बुंदेलखंड के किसानों को तत्कालीन राज्यपाल के पंजाब स्थित फार्म हाउस भेजा गया.

जहां उनके पुत्र ने बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान विकास चौरसिया को किन्नू के फल का पौधा दिया था. जिसे बलराम जाखड़ कैलिफोर्निया से लाए थे और अपने फार्महाउस पर उसकी नर्सरी तैयार करवाई थी. बुंदेलखंड के किसान ने इस पौधे को अपने खेत पर लगाया और आज ये एक पेड़ की भांति बढ़ता जा रहा है. यहां विपरीत जलवायु के बाद भी इस पर रसदार फल लग रहे हैं.

कैलिफोर्निया से आया किन्नू फल का छोटा पौधा (ETV Bharat)

कैलिफोर्निया से पहुंचा बुंदेलखंड

प्रगतिशील किसान विकास चौरसिया बताते हैं कि "सागर जिले के गढ़ाकोटा में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा शुष्क उद्यानिकी केंद्र की स्थापना की गई थी. यहां की जलवायु के हिसाब से कौन सी फसलें उगाई जाएं और उनसे यहां के किसानों को क्या फायदा होगा, इस बात को ध्यान रखते हुए उद्यानिकी केंद्र की स्थापना गोपाल भार्गव के कृषि मंत्री रहते हुए की गई थी. इस केंद्र का उद्घाटन करने तत्कालीन राज्यपाल बलराम जाखड़ यहां आए थे और किसानों से संवाद के दौरान उन्होंने पंजाब के अबोहर में स्थित उनके फार्महाउस देखने का प्रस्ताव किसानों के समक्ष रखा था.

SAGAR KINNOW USED IN PICKLES
किन्नू फल का अचार में खूब हो रहा इस्तेमाल (ETV Bharat)

भेंट में मिला था किन्नू का पौधा

विकास चौरसिया बताते हैं कि "तत्कालीन राज्यपाल के प्रस्ताव के बाद मध्य प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा बुंदेलखंड के किसानों को पंजाब के अबोहर भेजा गया था. जहां पर तत्कालीन राज्यपाल के फार्म हाउस के भ्रमण के दौरान किसानों को नाश्ते में किन्नू फल दिया गया था. बलराम जाखड़ के पुत्र सुनील जाखड़ ने मुझे किन्नू फल का पौधा भी भेंट किया था. उन्होंने बताया था कि उनके पिता बलराम जाखड़ कैलीफोर्निया से पौधा लाए थे और यहां नर्सरी तैयार कर पौध रोपण किया था. उन्होंने बताया था कि ये फल ठंडे इलाके में बहुतायत में पाया जाता है. बुंदेलखंड में इसकी संभावना कम है, लेकिन प्रयास करना चाहिए."

CALIFORNIA FRUIT PLANT GROWN TREE
पेड़ की भांति बढ़ता जा रहा है किन्नू फल का पौधा (ETV Bharat)

आज पेड़ की शक्ल ले रहा है किन्नू का पौधा

विकास चौरसिया बताते हैं कि "आमतौर पर ये पौधा पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान में बहुतायत में पाया जाता है. जिन इलाकों में ठंडी जलवायु और रेतीली मिट्टी पायी जाती है, वहां पर ये जल्द ही वृद्धि करता है. बुंदेलखंड की गरम जलवायु के हिसाब से किन्नू के यहां लगने की संभावना कम थी, लेकिन मैंने अपने रहली में स्थित खेत पर ये पौधा लगाया और ये पौधा धीरे-धीरे बढ़ने लगा.

आज ये पौधा मध्यम आकार के पेड़ की शक्ल ले चुका है और इसमें फल भी आने लगे हैं. हम लोगों ने जो पंजाब में किन्नू के फल खाए थे, वह भी खट्टे मीठे स्वाद के थे, लेकिन उनमें मीठापन ज्यादा था. यहां के फलों में खट्टापन ज्यादा है और नींबू से मिलता जुलता स्वाद है. खट्टेपन के कारण हम लोग ज्यादातर अचार बनाने में इसका उपयोग करते हैं."

Sagar kinnow used in pickles
कैलिफोर्निया के किन्नू फल का सागर में बन रहा अचार (ETV Bharat)

जलवायु गर्म होने के कारण है खट्टापन ज्यादा

वनस्पति वैज्ञानिक रवीन्द्र सिंह बताते हैं कि "अक्सर वातावरण के कारण किसी भी पौधे के मूल गुण परिवर्तित हो जाते हैं. मूल पौधे को यदि हाइब्रिड तरीके से बनाया जाता है, तो उसके गुणों में भी परिवर्तन देखने मिलता है. जिसे आप किन्नू कह रहे हैं, उसका वानस्पतिक नाम सिट्रस रेटीकुलेटा हो सकता है, जो नींबू और संतरा के संकरण से बना है.

यह सिट्रस निवोलिस और सिट्रस डेलीसिओसा से बना है. डेलीसिओसा इसके मीठेपन के कारण नाम है. ये संकरण इसलिए किया गया था, ताकि ये हर तरह के मौसम और जलवायु में पनप सके. यहां के फल में खट्टापन ज्यादा है, क्योकिं ये मूल रूप से पंजाब, हरियाणा में उगाया जाता है, जहां ठंडी जलवायु है. यहां जलवायु गर्म होने के कारण उसमें खट्टापन ज्यादा है."