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सागर में डूबते गांव और दर्द बनते प्रोजेक्ट, जंगल और जमीन से विस्थापित जिएं तो जिएं कैसे

सागर में सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना से खानपुर गांव के लोग विस्थापित हो गये. अब जहां बसाया गया वहां नहीं है बुनियादी सुविधाएं.

KHANPUR TRIBAL VILLAGE DISPLACED
सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना से खानपुर गांव विस्थापित (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 10, 2026 at 12:09 PM IST

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Updated : February 10, 2026 at 2:33 PM IST

6 Min Read
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रिपोर्ट: कपिल तिवारी

सागर: विकास की योजनाएं कभी-कभी आम लोगों के लिए जिंदगी की जद्दोजहद में तब्दील हो जाती हैं. ऐसा ही सागर के आदिवासी बाहुल्य गांव खानपुर के साथ हुआ. प्राचीन इतिहास से लेकर अंग्रेजों के जमाने तक की विरासत का गवाह ये गांव पूरी तरह विस्थापित हो गया है. प्रकृति के गोद में बसे गांव से लगे जंगल से गुजरने वाली कढ़ान नदी के किनारे ताम्रपाषाण युग के शैलचित्र से लेकर अंग्रेजों के जमाने तक की विरासत मिलती थी, जिसके सहारे सौंर आदिवासी बाहुल्य गांव खानपुर के आदिवासी अपना जीवन यापन करते थे.

खानपुर डूब में आ गया और पूरा गांव उजड़ गया

लेकिन सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना के चलते ऐतिहासिक गांव खानपुर डूब में आ गया और गांव पूरी तरह खाली करा लिया गया. गांव आज उजड़ चुका है, विस्थापितों को नई पुनर्वास काॅलोनी में बसाया गया है. यहां पर बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है. लोगों को पीने के लिए गंदा पानी मिल रहा है. बिजली है, लेकिन मीटर नहीं है. सड़क के नाम पर कच्ची सड़क अब तक बन पायी है. खास बात ये है कि यहां विस्थापित गरीब आदिवासियों के लिए रोजगार का कोई साधन नहीं है. खानपुर में जंगल उनकी आजीविका का साधन था, लेकिन विस्थापित कालोनी में आज वो रोजगार के लिए मोहताज हैं.

सागर में डूबते गांव और दर्द बनते प्रोजेक्ट (ETV Bharat)

सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना से विस्थापित गांव

खानपुर गांव की बात करें, तो ये गांव सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना के कारण विस्थापित हो गया है. जहां तक सतगढ़ कढ़ान परियोजना की बात करें, तो नरयावली विधानसभा में सिंचाई के लिए इस परियोजना की स्वीकृति 2016-2018 में मंजूर की गयी थी. 425 करोड़ की लागत की इस परियोजना से 60 से अधिक गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा और करीब 24 हजार एकड़ कृषि भूमि प्रेशराइज्ड पाइप इरीगेशन सिस्टम से पाइपलाइन बिछाकर सिंचिंत होगी.
परियोजना के कारण आदिवासी बाहुल्य खानपुर गांव विस्थापित हो गया है. जहां के निवासियों को मुआवजा मिला है, लेकिन सुविधाएं नहीं.

हलकई आदिवासी बताते हैं कि "लंबे समय से यहीं बसे हुए हैं, 4-5 एकड़ जमीन थी, डूब में चली गयी है. मुआवजा काफी कम मिला है. सिलेरा में जहां कालोनी बनायी गयी है, वहीं घर बनाया ह. मुआवजा कम मिला और परिवार में बंट गया".

KHANPUR TRIBAL VILLAGE DISPLACED
सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना ने उजाड़ा खानपुर गांव (ETV Bharat GFX)

विस्थापित मुन्नालाल आदिवासी बताते हैं कि हम लोग सालों से यहीं रहते थे. जमीन थी नहीं, तो मजदूरी करके पेट पालते थे. अब जहां विस्थापित हुए है, वहां मजदूरी कर रहे हैं और वहां मजदूरी भी नहीं मिलती है. इधर मकान बस था, इसलिए विस्थापित कालोनी में तीन प्लाॅट एक मुझे और दो बालिग बेटों को मिला है. अभी बमुश्किल एक ही मकान बना पाए हैं."

गांव हुआ वीरान, छिनी जमीन और घर की छत

खानपुर गांव की बात करें, तो पिछले साल बारिश का मौसम आते ही गांव को पूरा खाली करा लिया गया था, क्योंकि बांध में पानी के ओव्हरफ्लो होने की स्थिति में गांव डूब में आ गया था. यहां 86 परिवार निवास करते थे, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या सौंर आदिवासियों की थी. जिनके पास थोड़ी बहुत जमीन थी, इसके अलावा जंगल से जड़ी बूटियां तलाशकर और लकड़ी बीनने के अलावा गांव के लोगों के खेतों में मजदूरी करके आदिवासी जीवन यापन करते थे. यहां के किसानों को मुआवजा मिला, लेकिन वो नाकाफी था.

Sagar Khanpur Tribal Village displaced
विस्थापित खानपुर गांव की तस्वीर (ETV Bharat)

आदिवासी परिवारों के पास खेती की जमीन ना के बराबर थी, दूसरे किसानों के यहां मजदूरी कर और गांव से लगे जंगल से लकड़ियां और जड़ी बूटियां बीनकर बाजार में बेंचकर परिवार का भरणपोषण करते थे. लेकिन गांव छूटा, तो सबकुछ छिन गया. जनकरानी आदिवासी बताती हैं कि "पानी बरसते में हम लोगों को यहां भेज दिया था. उधर, जंगल में लकड़ी काटकर बेंचते थे, तो बच्चों को खाना मिल जाता था. यहां कोई काम नहीं है, मुआवजा में सिर्फ 1.50 लाख रुपए मिले, तो कर्जा चुका दिया. कुटीर बनाने का बोला था, लेकिन अब तक नहीं मिली. पैसा खत्म हो गया, तो मकान नहीं बना पाए. गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं."

विस्थापन के वादे भूल गए जनप्रतिनिधि और प्रशासन

ग्रामीणों को गांव से बेदखल करते समय तय किया गया कि नजदीकी गांव सलेरा में खानपुर के विस्तापितों की काॅलोनी बनायी जाएगी. जिसमें सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं होंगी. स्कूल,आंगनवाड़ी, सामुदायिक भवन, पक्की सड़क, नल जल योजना के माध्यम से पानी और हर घर में मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन दिया जाएगा.

Sagar Khanpur Tribal Village displaced
सतगढ़ कढ़ान मध्यम सिंचाई परियोजना से खानपुर में विस्थापन (ETV Bharat)

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सलेरा गांव में जहां पुनर्वास कालोनी बनायी गयी है वहां स्कूल भवन, आंगनवाड़ी और सामुदायिक भवन बनाया गया है, लेकिन सड़क कच्ची है. गांव में बिजली की लाइन तो बिछाई गयी है, लेकिन घरों में मीटर नहीं लगाए गए हैं. नल जल योजना से पानी सप्लाई होता है, लेकिन गंदा पानी पीने को लोग मजबूर हैं. बिजली के मीटर नहीं लगाए गए हैं, डायरेक्ट कनेक्शन 200 रूपए औसत बिल के आधार पर दिए गए हैं. बिजली 4-4 दिन गायब रहती है, तो लोगों को पानी तक नहीं मिलता है.

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क्या कहते हैं स्थानीय विधायक

नरयावली विधायक प्रदीप लारिया कहते हैं कि खानपुर गांव के विस्थापन में नियमानुसार मुआवजा और सुविधाएं दी गयी है. जहां तक विस्थापित कालोनी की बात है, तो वहां नल जल योजना संचालित है. गांव में बिजली वगैरह लग गयी है, जल्द ही मीटर लगाए जाएंगे. सड़क अभी कच्ची है, उसे भविष्य में पक्की कर दिया जाएगा. स्कूल,आंगनवाड़ी और सामुदायिक भवन बन चुके हैं. रोजगार के लिए ग्रामीणों की व्यवस्था करने पर विचार कर रहे हैं. विस्थापितों की सभी समस्याओं का निराकरण होगा.

Last Updated : February 10, 2026 at 2:33 PM IST