कमाई छोड़ गांव लौटे अनिरूद्ध, लोगों ने कहा पागल, स्ट्रॉबेरी की खेती से इनकम की डबल
सागर के अनिरूद्ध सिंह की कहानी, शहर से लौटे गांव, सिविल सर्विसेज की कोचिंग पढ़ाना छोड़ पारंपरिक खेती में आजमाया हाथ,आज बना लाभ का धंधा. कपिल तिवारी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 3:05 PM IST
|Updated : August 20, 2026 at 3:23 PM IST
सागर: बुंदेलखंड में पलायन कोई नयी बात नहीं है. पिछड़ेपन और गरीबी के चलते इस अंचल में पिछले कई सालों से पलायन की परंपरा है. गरीब तबका मजदूरी और काम की तलाश में पलायन करता है, तो पढ़ा लिखा तबका नौकरी और व्यावसाय के लिए पलायन करता है, लेकिन अपनी मिट्टी छोड़कर गए हर इंसान को सफलता नहीं मिलती है, लेकिन सागर के केसली के रहने वाले अनिरूद्ध सिंह के साथ कुछ अलग ही घटना घटी.
सागर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिरूद्ध सिंह ने इंदौर में सिविल सर्विसेज की कोचिंग शुरू की. इसको बाद कोरोना में वे वापस केसली आ गए, जहां उन्होंने खेती शुरू की, उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर नगदी और औषधीय फसलों पर जोर दिया. वो बुंदेलखंड में सबसे पहले स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान बने, तो औषधीय खेती के प्रति जागरूकता लाने का काम किया.
सागर के आदिवासी ब्लाॅक के अनिरूद्ध सिंह की वापसी
जिले के आदिवासी ब्लाॅक केसली की बात करें, तो यहां का प्रमुख व्यावसाय खेती है. केसली के किसान परिवार के अनिरूद्ध सिंह ने सागर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए इंदौर निकल गए. तैयारी के साथ उन्होंने खुद सिविल सर्विसेज की कोचिंग शुरू की. उनकी कोचिंग चल पड़ी और 8 सालों में करीब 850 बच्चे अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए, लेकिन 2020 में कोरोना की पहली लहर में कोचिंग व्यावसाय पूरे देश में ठप हो गए और अनिरूद्ध भी अपने घर केसली लोट आए.

अनिरूद्ध सिंह बताते हैं कि "मैंने 2012 से सिविल सर्विसेज की कोचिंग क्लास इंदौर में शुरू की थी और लगातार वो चलती रही. मेरे संस्थान से करीब 850 बच्चों का चयन हुआ. कोरोना के दौरान कोचिंग पूरी तरह बंद कर दी गयी, तो मैं अपने घर केसली वापस आ गया. मैंने अपने गांव केसली की स्थिति को देखा, तो पाया कि यहां पर छोटे-छोटे रकबे के किसान है और काफी परेशान हैं. इनकी आर्थिक स्थिति काफी बदहाली के दौर से गुजर रही है. मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना आदिवासी ब्लाॅक केसली में नगद और औषधीय खेती की खेती शुरू करें, जिसका फायदा छोटे-छोटे रकबे के किसान को हो.
एक आइडिया ने खड़ी कर दी मिसाल
इसके लिए मैंने पहल करने के बारे में सोचा. शुरूआत में लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया कि शहर से आकर अब खेती करेंगे, लेकिन मैंने 2021 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की, जो आज पूरे मध्य प्रदेश में हो रही है. हमारे बुंदेलखंड में करीब 22 किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. इसी दौरान मैंने सतावर, अश्वगंधा और सफेद मूसली की खेती शुरू की. पिछले साल मैंने चियासीड शुरू की, बुंदेलखंड में चियासीड की खेती करने वाला मैं पहला आदमी हूं. जिसकी खेती में मुझे अच्छा पैसा मिला और फायदा हुआ.

चियासीड की खेती से रबी सीजन में की जाती है, लेकिन खरीफ सीजन में सागर जिले के करीब 250 किसान चियासीड की खेती कर रहे हैं. इसके अलावा भी हम औषधीय फसलों की भी खेती शुरू कर रहे हैं. चूकिं बुंदेलखंड पिछड़ा हुआ क्षेत्र है और हमारा प्रयास है कि यहां के किसान छोटे-छोटे रकबे के हैं, वो अगर औषधीय खेती करेंगे, तो एक एकड़ में 3-4 लाख तक की कमाई कर सके.
गांव से पलायन रोकना सबसे बड़ी चुनौती
अनिरूद्ध सिंह कहते हैं कि मैं सागर यूनिवर्सिटी में पढ़ा और फिर इंदौर जैसे शहर में मैंने कोचिंग चलाई, लेकिन अचानक से इंदौर जैसे शहर से सीधे गांव आने के कारण मुझे शुरूआत में काफी अंतर महसूस हुआ. हम देखते हैं कि इंदौर मेट्रो सिटी है, वहां पर भागदौड़ वाली जिंदगी है. मैं गांव आया, तो पाया कि यहां पर ठहराव है, लेकिन कहीं ना कहीं गांव से लोग पलायन कर रहे हैं. हर व्यक्ति रोजगार, पढ़ाई या किसी दूसरे काम के लिए पलायन कर रहे हैं.

गांवों से हो रहा पलायन रोकना पड़ेगा. हमारे बुंदेलखंड में नाममात्र की इंडस्ट्री है, इसलिए यहां पलायन रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो किसान है,उनको ऐसी फसलों की तरफ आकर्षित किया जाए, जिनमें उन्हें अच्छा पैसा मिले. किसान अगर औषधीय और नगदी फसलें उगाएंगे, तो फायदा होगा.

- गोबर से बना लाखों का साम्राज्य, जबलपुर के वर्मी कंपोस्ट किंग से आज साइंटिस्ट लेते हैं ट्रेनिंग
- मध्य प्रदेश का ऐसा गांव जो बना मिनी हॉलैंड, किसानों की तकदीर बदल रहे रंग बिरंगे फूल
लोगों ने मुझे पागल करार दिया
अनिरूद्ध सिंह कहते हैं कि मैंने जब अपने गांव में लोगों को स्ट्रॉबेरी और औषधीय खेती करके दिखाया, तो पहले लोगों ने मुझे पागल कहा और मेरा मजाक उड़ाया. गांव के लोग मेरे बारे में कहते थे कि शहर से आकर खेती सिखाएंगे, लेकिन आज जब मेरे फार्महाउस के आसपास देखते हैं, तो सबसे ज्यादा व्यापारिक और औषधीय फसलों की खेती हो रही है. आज हमारे केसली ब्लाॅक में सागर जिले में सबसे ज्यादा औषधीय फसलों की खेती हो रही है.

