खाद के लिए न लाइन की झंझट, न मनमाफिक दाम का सिरदर्द, 3 दिन के अंदर ऐसे मिलेगा यूरिया
सागर में खाद को लेकर शुरू हुई नई व्यवस्था, लाइन में नहीं लगेंगे किसान, 3 दिन के अंदर ई टोकन से मिलेगा खाद.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 21, 2026 at 1:48 PM IST
|Updated : May 21, 2026 at 2:13 PM IST
सागर: मध्य प्रदेश में वैसे भी खाद की किल्लत बड़ी समस्या है और दूसरी तरफ खाड़ी युद्ध के कारण उपजे संकट से खाद का संकट खड़ा हो गया है. इस बार मध्य प्रदेश सरकार ने ई विकास प्रणाली के तहत खाद वितरण की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी है. इस व्यवस्था के तहत सागर में पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1 अप्रैल से खाद वितरण शुरू हो गया है, नई व्यवस्था के तहत किसानों को विकास प्रणाली पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके खाद के लिए ई टोकन हासिल करना होगा और फिर किसान कहीं से भी खाद उठा सकता है. अगर किसान 3 दिन के भीतर ई टोकन के तहत खाद नहीं उठाता है, तो उसे फिर से रजिस्ट्रेशन करना होगा.
जिन किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है, उनकी अलग तरह से बुकिंग होगी. जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं है, उनकी बुकिंग का तरीका अलग होगा. इस व्यवस्था में खास बात ये है कि एक बार अपनी जमीन की जरूरत के हिसाब से खाद हासिल करने के बाद कोई व्यक्ति और भी खाद चाहता है, तो वह फिर से ई टोकन हासिल करके खाद ले सकता है. कृषि विभाग का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
सागर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत खाद वितरण शुरू
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खाद्य वितरण के लिए की गई ई टोकन व्यवस्था के तहत सागर को पायलट प्रोजेक्ट में रखा गया है. इसके तहत 1 अप्रैल से जिले में खाद वितरण शुरू हो गया है. किसान ई विकास पोर्टल पर जाकर ई टोकन हासिल कर खाद भी लेने लगे हैं. कृषि विभाग के उपसंचालक राजेश त्रिपाठी के अनुसार "सरकार ने इस बार ऑनलाइन व्यवस्था के तहत खाद वितरण की प्रक्रिया शुरू की है. सागर में 1 अप्रैल से किसान ऑनलाइन व्यवस्था के तहत ई विकास प्रणाली पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके ई टोकन बुक करके खाद ले सकते हैं. अभी तक सागर में 35 हजार किसानों ने टोकन बुक करके खाद उठाने का काम चालू कर दिया है."
क्या है व्यवस्था
ई विकास प्रणाली के तहत खाद के लिए टोकन बुक करने के लिए फार्मर आईडी वाले किसान और अन्य किसानों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है. कृषि उपसंचालक राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि "जिन किसानों का फॉर्म आईडी बन गया है. उनके खाद के लिए ई टोकन बुक करना काफी सरल है. फार्मर आईडी वाले किसान ई विकास पोर्टल पर जैसे ही पोर्टल को खोलेंगे, तो उन्हें एक किसान का फोटो दिखाई देगा. उस पर किसान अपना आधार सत्यापन कर, जमीन के दस्तावेज देखकर, भूमि और फसल का चयन करके जितनी खाद की आवश्यकता है. उसे बुक करके ई टोकन प्राप्त कर सकते हैं."

बिना फार्मर आईडी और अन्य किसानों के लिए व्यवस्था
फार्मर आईडी वाले किसानों के अलावा बिना फार्मर आईडी वाले किसान, सिकमी, राजस्व और वन पट्टा या ट्रस्ट वगैरह की जमीन पर खेती करने वाले किसान के लिए बुकिंग की व्यवस्था अलग से है और उसका तरीका भी अलग है, लेकिन किसान इसी ई विकास पोर्टल पर जाकर खाद के लिए ई टोकन बुक कर सकते हैं.
कृषि विभाग का दवा पर्याप्त मात्रा में मिलेगी खाद
कृषि विभाग के उपसंचालक राजेश त्रिपाठी का कहना है कि "हमारे पास खाद का पर्याप्त स्टॉक है और 1 अप्रैल से किसानों ने खाद उठाना शुरू कर दिया है. अभी तक किसी तरह की परेशानी किसानों को नहीं आई है. इस व्यवस्था के तहत सरकार ने एक और व्यवस्था की है. जिसमें किसानों को जितनी मात्रा में खाद चाहिए, उतनी मात्रा में अतिरिक्त खाद भी दिया जाएगा. इसके लिए किसानों को पहली बार अपनी जमीन के हिसाब से लिए गए खाद के बाद फिर से पोर्टल पर ई टोकन बुक करना होगा और संबंधित विभाग किसान की मांग का सत्यापन करके और भी खाद किसान को उपलब्ध कराने की अनुमति दे सकता है.
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किसानों के लिए पारदर्शी और सुलभ व्यवस्था
सरकार द्वारा लागू की नई व्यवस्था किसानों के लिए पारदर्शी, सुलभ और समय पर खाद उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था मानी जा रही है. सागर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत खाद वितरण का काम शुरू भी हो गया है. इस नई व्यवस्था कि किसानों को होने वाले फायदे इस प्रकार हैं.
- लंबी कतारों से मुक्ति
- किसानों के व्यस्त समय की बचत
- पारदर्शी और तेज वितरण प्रक्रिया
- निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध
- किसान की मांग के अनुसार होम डिलीवरी
- ई टोकन जारी होने के 3 दिन में मिलेगी खाद
- खाद की ज्यादा जरूरत होने पर होगी व्यवस्था

