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दुनिया के सामने खुलेंगे एरण के गहरे राज, मध्य प्रदेश में मौजूद है गुप्तवंश द्वारा बसाया गांव

सागर में मौजूद ऐतिहासिक गांव एरण में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा सांस्कृतिक आयोजन, एरण महोत्सव में होगी शोध संगोष्ठी, चित्र प्रदर्शनी कार्यक्रम.

SAGAR ERAN VILLAGE HISTORY
दुनिया के सामने खुलेंगे एरण के गहरे राज (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 9:13 PM IST

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सागर: बीना तहसील के पुरातात्विक और ऐतिहासिक गांव एरण को दुनिया की नजरों में लाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में 14,15 और 16 जनवरी को एरण महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है. यह महोत्सव बुंदेलखंड के महत्वपूर्ण उत्सव के रूप में जाना जाएगा. पुरातत्वविदों और विद्वानों का मानना है कि एरण में वो सब खूबियां हैं, जो वर्ल्ड हैरिटेज साइट बनाने के लिए जरूरी हैं.

इसलिए एरण महोत्सव के साथ-साथ ऐसे प्रयास होने चारिए कि एरण दुनिया की नजरों में आए. जहां तक एरण की पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो यहां पर ऐसी कई चीजें है, जो भारत में दूसरी जगहों पर देखने नहीं मिलती है. ये हड़प्पा संस्कृति के समकालीन होने के साथ-साथ गुप्त साम्राज्य के वैभव की कहानी कहता है.

मध्य प्रदेश में मौजूद है गुप्तवंश द्वारा बसाया एरण गांव (ETV Bharat)

हड़प्पा के समकालीन ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति का स्थान

एरण के मूल निवासी और इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डाॅ. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं, "एरण के पुरातात्विक और ऐतिहासिक वैभव को दुनिया की नजरों में लाने के लिए डाॅ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के विद्वानों ने काफी काम किया है. एरण में डॉ. सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर द्वारा 1960 से लेकर 1998 तक अलग-अलग 7 सत्रों में खुदाई की गई, जिसमें पता चला कि एरण हड़प्पा सभ्यता की समकालीन संस्कृति ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति का है. हाल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए उत्खनन में ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति के पुरावशेष मिले हैं, जो हड़प्पा संस्कृति के समकालीन हैं."

ERAN HISTORICAL PLACE
एरण गांव की ऐतिहासिक विरासत (ETV Bharat)

गुप्त साम्राज्य के वैभव का उदाहरण

डाॅ. मोहन लाल चढार बताते हैं कि "एरण में गुप्तकाल की देश की विशालतम विष्णु प्रतिमा मिलती है. ऐसी प्रतिमा पूरे भारत में कहीं और नहीं है. इसकी स्थापना गुप्तवंश के समुद्रगुप्त ने 375 ई के आसपास की थी. यहां समुद्रगुप्त का अभिलेख मिला है, जो कोलकाता संग्रहालय में सुरक्षित है. जिसमें बताया गया कि एरण को समुद्रगुप्त ने अपना स्वभोग नगर बनाया था और अपनी परिवार के साथ एरण में कुछ समय रहा. गुप्त काल में एरण मध्य भारत में गुप्त राजाओं की सैन्य छावनी भी था.

eran village vishnu temple
ऐतिहासिक देवी देवताओं की प्रतिमाएं (ETV Bharat)

यहां विष्णु मंदिर के पास करीब 48 फीट ऊंचा गरुड़ स्तंभ है, जो 484 ई का है, जिस पर बुद्धगुप्त का अभिलेख लिखा है. जिसमें एरण को गुप्त काल की जिला स्तर इकाई के रूप में बताया गया है. बुद्धगुप्त के समय एरण का विषयपति मातृविष्णु था, जो विद्वानों और गायों को प्रथम मानकर कोई भी काम करता था. यहां समुद्रगुप्त के बाद बुद्धगुप्त का शासन था. बुद्धगुप्त के अभिलेख में मां नर्मदा के साथ-साथ कालिंदी यानि यमुना नदी का उल्लेख है.

यहां भगवान विष्णु का जनार्दन नाम से उल्लेख किया गया है. एरण में नृसिंह प्रतिमा के साथ पांच गुप्तकालीन मंदिरों के पुरावशेष देखने मिलते हैं. यहां गंगा, यमुना, गंधर्व, किन्नर, नाग की प्रतिमाएं भी हैं. वहीं भगवान विष्णु के 10 अवतारों, सूर्य, देवी, गणेश, शिव, बुद्ध प्रतिमाओं के अलावा अनेक देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी मिली है. यहां भारत की प्राचीनतम विशालतम पशु वराह की प्रतिमा है. इस प्रकार की गुप्त काल में निर्मित प्रतिमा पूरे भारत में कहीं नहीं है."

एरण प्राचीन काल का प्रमुख व्यापारिक मार्ग

एरण की बात करें, तो अपने कला और वैभव के अलावा व्यापार जगत में भी इसका बड़ा नाम था. एरण प्राचीन काल के प्रमुख व्यापारिक मार्ग में से एक था, जो मथुरा से मऊरानीपुर, देवगढ़, एरण, विदिशा, भोपाल, होशंगाबाद होकर उज्जैन जाता था. उज्जैन से भृगु कक्ष (भड़ौच) तक जाता था. गुप्त काल में मध्य भारत में स्थित उज्जैन, विदिशा, एरण, त्रिपुरी महत्वपूर्ण नगर माने जाते थे.

कृष्ण लीला के प्राचीन कथानक

एरण में गुप्तकाल में निर्मित भारत के सबसे प्राचीन कृष्ण लीला के कथानक अंकित हैं. जिनमें कृष्ण जन्म के पहले उनके माता-पिता द्वारा भगवान विष्णु से अपने बालक के रूप में अवतार लेने का वरदान के लिए तपस्या, कृष्ण और बलराम जन्म का चित्रण,पूतना वध,शकटमोचन, कालिया नाग मर्दन,यमलार्जुन, केशी वध और दही खाने के सुंदर कथानक के साथ अक्रूर को यमुना नदी में स्नान के दौरान विराट स्वरूप के दर्शन, कंस की राजसभा में मल युद्ध और कृष्ण बलराम द्वारा कंस वध का सुंदर है. एरण वो जगह है, जहां कृष्ण लीला के कथानक भारतीय कला में पहली बार अंकित किए गए थे.

Sagar eran mahotsav
गुप्तवंश द्वारा स्थापित स्तंभ (ETV Bharat)

देश का पहला सती होने का प्रमाण

एरण के पास पहलेजपुर गांव में भारत का प्रथम सती स्तंभ लेख स्थापित है, जिसमें 510 ई की तिथि लिखी हुई है. यहां शक राजा श्रीधर वर्मा, हूण शासक तोरमाण के अभिलेख के साथ पूर्व मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक के 16 सती स्तंभ लेख मिले हैं. जो स्थानीय सैनिकों के साथ-साथ राजाओं के नाम उनके साम्राज्य विस्तार की जानकारी और ब्रिटिशकाल में अंग्रेजों से सेना के युद्ध की पुष्टि करते हैं. एक सती लेख में अंग्रेजों के एरण पर हमले की जानकारी है.

'महाभारत से जोड़ा जाता है एरण का नाम'

डाॅ. मोहन लाल चढार कहते हैं कि "स्थानीय लोगों में अनुश्रुति है कि एरण महाभारत कालीन विराट नगर और विराट नरेश की राजधानी थी. यहां अज्ञातवास में पांडव रुके थे और यहां विचरण किया था. एरण के आसपास के गांवों के नाम महाभारत काल की घटनाओं से जुडे़ प्रतीत होते हैं. जैसे धनचरा वर्तमान धंसारा गांव, यहां पांडव गाय बैल चराते थे. गौहर ग्राम से कौरवों की सेना ने गाय बैलों का हरण किया था. इसीलिए धंसरा के पास के गांव का नाम गांव गौहर हैं. खुरई के नाम को लेकर स्थानीय लोग मामते हैं कि यहां कर्ण ने एक गाय के खुर में बाण मारा था. सतोरिया का नाम शास्त्र टोरिया नाम से जाना जाता था. यहां अर्जुन ने अपने अस्त्र-शस्त्र छुपा कर रखे थे.