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जहां से आई चटक चांदनी, वहीं मिला उसका दुश्मन, नहीं तो लील जाती जंगल और खेत

खेत, पर्यावरण और जंगलों के लिए खतरनाक चटक चांदनी का मिल गया इलाज, जबलपुर से सागर पहुंची वैज्ञानिक ने बताया कैसे खत्म होगी गाजर घास.

MEXICAN BEETLE CARROT GRASS
गाजर घास खरपतवार को नष्ट करता मेक्सिकन बीटल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 2:16 PM IST

4 Min Read
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सागर: नाम अटपटा जरूर है, लेकिन हमारे पर्यावरण, खेत और जंगल के साथ मानव शरीर के लिए घातक चटक चांदनी यानि गाजर घास का इलाज आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि विदेश से आई इस खरपतवार का दुश्मन भी वहीं मिला है. जहां से ये विदेशी खरपतवार गाजर घास हमारे देश में पहुंची और धीरे-धीरे हमारे खेतों को बंजर, जंगल को वीरान करने लगी. यहां तक की शरीर में भी कई बीमारियों का कारण बनने लगी.

करीब 75 साल पहले गेहूं के साथ मैक्सिको से भारत पहुंची और पुणे में पहली बार देखी गयी. जिस तरह ये हमारे जंगल और जमीन को नुकसान पहुंचा रही थी, तो वैज्ञानिकों ने इसके निदान के उपाय खोजना शुरू किया और पता चला कि इसका दुश्मन वहीं पर है. जहां से ये खरपतवार आया है, वहां पर एक कीट ऐसा मिला, जो इसको कुछ ही पलों में खत्म कर सकता है. अब भारत में इस कीट की पैदावार हो रही है और गाजरघास को आसानी से खत्म कर सकता है.

वैज्ञानिक डाॅ अर्चना अनोखे ने मेक्सिकन बीटल के बारे में बताया (ETV Bharat)

विदेशी खरपतवार गाजर घास क्या है

जब हम गाजर घास की बात करते हैं, तो ये 1950 के दशक में पहली बार पुणे में देखी गयी थी. सागर पहुंची भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के खरपतवार अनुसंधान केंद्र जबलपुर में वैज्ञानिक डाॅ अर्चना अनोखे ने बताया कि "गाजर घास को हमारे यहां कई नामों से पुकारते हैं. आमतौर पर लोग इसे चटक चांदनी कहते हैं और गाजर घास इसलिए बोलते हैं, क्योंकि इसकी पत्तियां गाजर की तरह होती है. इसे कई जगह सफेद टोपी भी कहा जाता है, क्योंकि इसका फूल सफेद रंग की टोपी की तरह होता है.

GAJAR GHAS VILLAIN FOR CROP ANIMAL
गाजर घास को सफेद टोपी भी कहते हैं (ETV Bharat)

डाॅ अर्चना अनोखे बताती हैं कि गाजर घास हमारे यहां विदेश से आयी. दरअसल जब हमारे यहां विदेश से गेहूं आयात होता था, तो विदेश से आने वाले गेहूं के साथ ये खरपतवार हमारे यहां आ गई. इसे सबसे पहले भारत में पुणे के पास 1950 में देखा गया था, तो वैज्ञानिक जगत चिंता में आ गया. हमारे वैज्ञानिकों ने देखा कि यह एक अलग तरह की घास है, जो हमारे देश में पुणे के अलावा और कहीं नहीं है. वैज्ञानिकों ने रिसर्च शुरू कि तो पता चला कि ऐसी ही घास मैक्सिको में पायी जाती है, लेकिन वहां पर इतनी तेजी से नहीं फैल रही है, जितनी तेजी से भारत में फैल रही है.

SAGAR SCIENTIST DR ARCHANA ANOKHE
मेक्सिकन बीटल गाजर घास को नष्ट करता (ETV Bharat)

रिसर्च बढ़ती गई और मिल गया गाजर घास का दुश्मन

जब भारत के वैज्ञानिकों ने गाजर घास पर रिसर्च शुरू की, तो पता चला कि ये मैक्सिको के अलावा मध्य और उत्तर अमेरिका में पायी जाने वाली घास है. जिसका नाम पारथेनियम हिस्टोफोरस (Parthenium hysterophorus) है. वैज्ञानिक इस बात से हैरान थे कि आखिर भारत में जिस तेजी से गाजर घास फैल रही है, उस तेजी से मैक्सिको में नहीं फैलती है. तब वैज्ञानिकों को पता चला कि वहां पर एक बाॅयो एंजेट है. जो गाजर घास की फूल और पत्तियों को खाता है. इसे जायगोग्रामा बायकोलोराटा (Zygogramma bicolorata) मेक्सिकन बीटल कहलाता है.

फिर भारत के वैज्ञानिक यहां मेक्सिकन बीटल को लाए, जिसे गाजर घास ब्रिंग भी कहते हैं. इसको भारत लाकर क्वारंटाइन कंडीशन में रखने और कई तरह के परीक्षण किए गए, क्योंकि चिंता इस बात की थी कि ये बीटल दूसरे किसी पेड़ पौधे को तो नहीं खाता या किसी जीव जंतु के लिए तो हानिकारक नहीं है, लेकिन जांच में पता चला कि ये सिर्फ गाजर घास खाता है और दूसरी किसी घास या पौधे को नहीं खा रहा है. ये गाजर घास को खत्म करने में बहुत प्रभावशाली है और तेजी से गाजर घास को खत्म करता है. ये गाजर घास को शुरूआती स्टेज और मैच्योर स्टेज दोनों में खाता है.