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सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय नाट्य समारोह में लोक नाट्य पर संवाद, बुंदेली लोकनृत्य ने समारोह में बांधा समां

डाॅ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में 5 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन. दूसरे दिन लोक नाट्य परंपरा पर संवाद और बधाई नृत्य की प्रस्तुति.

NATIONAL DRAMA FESTIVAL SAGAR
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय नाट्य समारोह में बधाई नृत्य की प्रस्तुति (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 21, 2026 at 9:08 PM IST

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Updated : February 22, 2026 at 8:45 AM IST

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सागर: डाॅ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में चल रहे 5 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन लोकनाट्य परम्परा के साथ बुंदेली लोकनृत्य बधाई ने समा बांध दिया. उत्तर-मध्यक्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और सागर सेंट्रल यूनिवर्सिटी की सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में 20 फरवरी से 24 फरवरी 2026 तक 5 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

मांगरमाटी दल के कलाकारों ने किया बधाई नृत्य

नाट्य समारोह में दूसरे दिन मांगरमाटी दल के कलाकारों ने प्रसिद्ध बुंदेली लोकनृत्य बधाई की प्रस्तुति दी. जिसे देखकर दर्शक झूम उठे. बुंदेलखंड की पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुन पर बधाई नृत्य की प्रस्तुति ने सभागार में उत्साह भर दिया. कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने बधाई नृत्य के प्रतिभागियों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की.

बुंदेली लोकनृत्य बधाई ने बांधा समा (ETV Bharat)

'नाटक मानव जीवन की अभिव्यक्ति'

समारोह के दूसरे दिन प्रसिद्ध रंगकर्मी डाॅ बृजेश रिछारिया का लोक नाट्य परंपरा पर संवाद कार्यक्रम हुआ. इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि "लोक और शास्त्र परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं. नाट्यशास्त्र इनको एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है. नाटक मानव जीवन की अभिव्यक्ति है. भारतीय संस्कृति और धर्म में नाट्यशास्त्र को पंचमवेद कहा गया है. चारों वेद हमारे चारों युग का प्रतिबिंब है, जो समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक चेतना को प्रतिबिंबित करते हैं."

DIALOGUE ON FOLK DRAMA
दूसरे दिन लोक नाट्य परंपरा पर संवाद (ETV Bharat)
NATIONAL DRAMA FESTIVAL SAGAR
मांगरमाटी दल के कलाकारों ने किया बधाई नृत्य (ETV Bharat)

'नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं'

संवाद के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में सागर यूनिवर्सिटी के कल्चरल कोऑर्डिनेटर डॉ राकेश सोनी ने बताया कि "नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्य समझने का सशक्त साधन भी है. नाट्य की शुरुआत लोकजीवन से ही होती है. लोक में नाट्य कैसे पैदा होता है और समाज की भावनाओं को कैसे सामने लाता है, इस पर उन्होंने अपने अनुभव साझा किए." समारोह में विद्यार्थियों, कलाकारों और रंगमंच से जुड़े लोगों ने जमकर शिरकत की.

DR HARISINGH GOUR UNIVERSITY
5 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन (ETV Bharat)
Last Updated : February 22, 2026 at 8:45 AM IST