डायबिटीज से हो सकता है डिमेंशिया, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रिसर्च, अब शुगर पेशेंट नहीं भूलेंगे चीजें
डायबिटीज के कारण लर्निंग मैमोरी पर पड़ता है असर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के प्रोफेसर डॉ. आकाश गौतम ने सागर में बताई अपनी रिसर्च.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 4:04 PM IST
|Updated : February 20, 2026 at 5:05 PM IST
सागर: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसके मरीज आपको आसानी से मिल जाएंगे या फिर ऐसा कहें कि हर घर में डायबिटीज के पीड़ित मरीज मिल जाएंगे. डायबिटीज के पीड़ित मरीजों के लिए कई तरह की परेशानियों और दूसरी शारीरिक समस्याओं से गुजरना पड़ता होता है. जिनमें एक समस्या ये सामने आयी है कि डायबिटिक लोगों की याददाश्त कमजोर हो जाती है. डायबिटीज के कारण उनकी याद करने की क्षमता पर असर पड़ता है. सागर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के प्राणिविज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डाॅ. आकाश गौतम पहुंचे. जहां उन्होंने अपनी इस रिसर्च के बारे में बताया.
उन्होंने अपनी रिसर्च में ये पता लगाने की कोशिश की है कि डायबिटीज के कारण हमारे मस्तिष्क में क्या असर पड़ता है और मस्तिष्क के अंदर ऐसे कौन से परिवर्तन होते हैं, जिसके कारण याद करने की क्षमता प्रभावित होती है. इस रिसर्च में चूहों पर किए गए अध्ययन में सफलता मिली है. जिसमें दो अणुओं के बारे में पता चला है, जो डायबिटीज के मरीजों के ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं. इन्हीं के कारण याददाश्त कम होती है और इसका इलाज किया जा सकता है.
क्या कहना है शोधकर्ता वैज्ञानिक का
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के प्राणिविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ आकाश गौतम ने बताया कि "हम लोगों ने डायबिटीज पीड़ित लोगों के मस्तिष्क पर होने वाले प्रभाव पर अध्ययन किया है. ज्यादातर मामलों में देखा गया कि पीड़ित व्यक्ति की याद करने की क्षमता पर असर पड़ता है. इस रिसर्च में हमने ये पता करने की कोशिश की है कि जब डायबिटीज के कारण याद करने की क्षमता पर असर पड़ता है, तो उस समय मस्तिष्क में कौन सी आण्विक क्रियाएं और परिवर्तन होते हैं.
इस शोध का उद्देश्य ये है कि अगर हम ये पता लगा पाए कि डायबिटीज के दौरान हमारे मस्तिष्क में कौन से अणुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है, अगर हमने ये पता लगा लिया, तो आसानी से इलाज कर सकेंगे. हम पता लगें सकेंगे कि किस अणु के कारण याददाश्त पर क्या असर पड़ रहा है और इन अणुओं के जरिए हम क्या दोबारा याददाश्त को ठीक कर सकते हैं.

डायबिटीज से याददाश्त का संबंध
जहां तक डायबिटीज की बात की जाए, तो ब्लड शुगर के असंतुलित स्तर के कारण याददाश्त पर गंभीर असर पड़ता है. जिससे डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) या अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है. इसके कारण होने वाले नुकसान पर नजर डालें.

चूहों पर अध्ययन हुआ सफल
आण्विक क्रियाओं (Molecular Interactions) और परिवर्तनों को लेकर कई स्तरों पर काम करना होता है. अभी हमने चूहों पर अध्ययन किया है, ये पूरी तरह से स्थापित होने के बाद आगे हम मरीजों के सैंपल लेकर उन पर अध्ययन करेंगे. चूहों पर हमारे अध्ययन में हमें कुछ अणु मिले हैं, जो डायबिटीज के पीड़ित मरीजों में कम हो जाते हैं और याददाश्त को प्रभावित करते हैं. चूहों पर अध्ययनन के दौरान हमे पहले चूहों को इंजेक्शन देकर डायबिटीज का मरीज बनाया और देखा कि उनकी याददाश्त पर असर पड़ा और याद करने की क्षमता कम हो गयी थी.
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जो अणुओं के एंजियोटेंसिन वन और एंजियोटेंसिन टू अणुओं के बारे में पता चला, जो हमारे ब्लड प्रेशर को मेंटेन करने का काम करते हैं और यही चूहों की याददाश्त पर असर डाल रहे थे. इन चूहों को मेडीसिन दी और फिर उनकी याददाश्त वापस आ गयी. अब हम इस अध्ययन को किसी इंसान पर करने की तैयारी कर रहे हैं, जो डायबिटीज पीड़ित होगा और फिर हम इसके आधार पर कैसे इसका और बेहतर इलाज किया जा सकता है, उस पर काम करेंगे.

याददाश्त ठीक करने के उपाय
वैसे तो मेडिकल साइंस में डायबिटीज के कारण याद करने की क्षमता प्रभावित होने पर दवाइयों के जरिए ठीक करने के तरीके भी हैं, लेकिन कुछ तरीके ऐसे भी हैं, जो बिना दवाओं के आजमाकर याददाश्त को ठीक किया जा सकता है.

