गरबा में पहनें महिला कैदियों की बनाई ज्वैलरी, खूबसूरती में लगेंगे चार चांद, खोने का नहीं डर
सागर जेल में महिला कैदी सीख रही क्रिएटिव आर्ट, सजा काटने के बाद रोजगार के लिए नहीं भटकना पड़ेगा. कपिल तिवारी की रिपोर्ट

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 23, 2026 at 11:23 AM IST
सागर: जाने-अनजाने में किए अपराध के चलते देश की जेलों में कई महिला कैदी अपने बच्चों के साथ सजा काट रही हैं. इन महिला कैदियों को रिहाई के बाद स्वरोजगार और बच्चों के पालन पोषण के उद्देश्य से जेल विभाग द्वारा तरह-तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं. ताकि सजा के बाद ये महिला कैदी स्वरोजगार स्थापित कर सके और अपराध की दुनिया में फिर से कदम ना रखें. इसी कड़ी में सागर केंद्रीय जेल में सजा काट रही दर्जनों महिलाओं को क्रिएटिव ज्वेलरी आर्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
जेल विभाग और सागर जिले के लीड बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ये प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है. इस 14 दिन के प्रशिक्षण में महिलाओं को राखी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाना सिखाया जाएगा. जब महिलाएं कला में पारंगत हो जाएगी और सजा खत्म हो जाएगी, तब बैंक स्वरोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से उन्हें लोन दिलाएगा. इसके अलावा उनके उत्पाद की मार्केटिंग और बाजार की व्यवस्था कराएगा. अगले 2 साल तक व्यवसाय में आने वाली परेशानियों को हल करने में मदद करेगा.
महिला कैदियों का पुनर्वास काफी मुश्किल
सागर केंद्रीय जेल की बात करें तो यहां पर महिला वार्ड में औसत 70 से 80 महिलाएं हमेशा मौजूद रहती हैं. इनमें सजा याफ्ता और विचाराधीन बंदी महिलाएं होती हैं. इन महिलाओं के साथ सबसे बड़ी समस्या जब होती है जब उनकी सजा खत्म हो जाती है. जिन महिलाओं के बच्चे होते हैं उन्हें सजा खत्म करने के बाद पुनर्वास और बच्चों के पालन पोषण के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

ऐसे में जेल विभाग की कोशिश होती है कि अगर सजा कट चुकी महिलाओं को पुनर्वास में कोई परेशानी आती है तो उनको सजा के दौरान तरह-तरह के प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया जाता है, ताकि वह सजा के बाद स्वरोजगार स्थापित कर सके और खुद का और अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें. इसी कड़ी में सागर केंद्रीय जेल में महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण नियमित तौर पर दिया जाता है. इसके अलावा दूसरे हुनर सीखने के लिए समय-समय पर क्रिएटिव ज्वेलरी आर्ट, ब्यूटीशियन कोर्स, पापड़ निर्माण और कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं.

क्रिएटिव ज्वैलरी आर्ट सीखेंगी महिलाएं
सागर केंद्रीय जेल में यह प्रशिक्षण सागर जिले के लीड बैंक सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इस प्रशिक्षण के तहत महिला कैदियों को आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का काम सिखाया जाएगा. क्योंकि आजकल इस तरह की ज्वेलरी की डिमांड काफी ज्यादा है वहीं दूसरी तरफ त्योहारों का सीजन आने के कारण इन महिलाओं को तत्काल रोजगार का भी इंतजाम करने की कोशिश जेल विभाग और सेंट्रल बैंक आफ इंडिया द्वारा की जाएगी.
खासकर नवरात्र में आ रहे गरबा में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की बड़ी डिमांड होती है उसी को ध्यान रखकर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है. सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की किरण यादव बताती हैं कि, ''हमारे द्वारा जो ट्रेनिंग दी जाती है इसमें ब्रेसलेट, राखी मेकिंग, रिम वर्क और मोती वर्ग और दूसरी एक्टिविटीज सिखाई जाती हैं. यह महिलाएं जेल से निकलकर राखी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाकर अपना जीवन यापन कर सकती हैं. यह महिलाएं अगर व्यावसायिक स्तर पर यह काम करना चाहती हैं तो उनको और भी मदद की जाती है बाजार की मांग के हिसाब से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है.''

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं लोन और मार्केटिंग की व्यवस्था
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मनोज प्रजापति बताते हैं कि, ''हम सिर्फ ट्रेनिंग देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं करते हैं. ट्रेनिंग के बाद हम अपने प्रशिक्षणार्थी का 2 साल तक फॉलो अप करते हैं. रिहाई के बाद यह पता लगाते हैं कि ट्रेनिंग के बाद काम शुरू किया है या नहीं या घर पर खाली बैठी हैं. अगर किसी को लोन की जरूरत होती है, तो मुद्रा लोन के जरिए 50 हजार से लेकर 1 लाख तक का लोन दिलाते हैं. इन महिलाओं को क्रेडिट लिंकेज के जरिए लोन दिलाकर रोजगार स्थापित कराया जाएगा. हर 3 महीने में उनके कामकाज का फॉलोअप लेंगे. लोन के बाद व्यवसाय स्थापित करने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद करते हैं.''

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क्या कहना है जेल प्रबंधन का
केंद्रीय जेल के अधीक्षक आर.सी. आर्य कहते हैं कि, ''हर जिले का एक लीड बैंक होता है. सागर का लीड बैंक सेंट्रल ऑफ इंडिया है. जिसका ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान सागर में है और उसके द्वारा तरह-तरह के प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं. हमारे द्वारा बैंक से संपर्क किया गया. हमारी जेल में लगभग 70 से 80 महिलाओं का लॉकअप हमेशा रहता है. इन महिलाओं को हम दो-तीन तरह के प्रशिक्षण दे रहे हैं. सिलाई और पापड़ बनाने का प्रशिक्षण चल रहा है. इसके बाद महिला कैदियों को आर्टिफिशियल ज्वेलरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा.''
दरअसल, आजकल आर्टिफिशियल ज्वेलरी की डिमांड काफी ज्यादा है. इस तरह की ज्वेलरी का उपयोग महिलाएं भीड़भाड़ वाले स्थान पर जैसे गरबा या दूसरे धार्मिक आयोजनों में करती हैं. क्योंकि इनके खोने का डर नहीं होता है और खो भी जाती है, तो काफी महंगे नहीं होते हैं. इसलिए बाजार की मांग ध्यान रखते हुए महिलाओं को आर्टिफिशियल ज्वेलरी और राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ताकि रिहाई के बाद वह घर बैठकर स्वरोजगार स्थापित कर सकें. लीड बैंक द्वारा प्रशिक्षण से लेकर रोजगार स्थापित करने और मार्केटिंग तक की व्यवस्था की जाती है.

