CA, व्यापारी और इंजीनियरों ने सब कुछ छोड़ अपनाया वैराग्य, मुक्तागिरी में ली जैन मुनि की दीक्षा
मध्य प्रदेश के मुक्तागिरी में में दीक्षा संस्कार का हुआ आयोजन, सागर के 5 लोग समेत कुल 22 लोगों ने ली जैन मुनि की दीक्षा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 2:39 PM IST
सागर (कपिल तिवारी) : आमतौर पर इंसान अपने जीवन में एक अच्छा करियर बनाने के बाद अपने परिवार के साथ आरामदायक जीवन जीना पसंद करता है और शायद इसीलिए मेहनत करता है. लेकिन शानदार पैकेज और सम्मानजनक नौकरी के बाद भी मन में वैराग्य का भाव आ जाए या वैराग्य के प्रति अनुराग पैदा हो जाए, ऐसे उदाहरण भी हमें देखने को मिलते हैं. ताजा उदाहरण सागर में सामने आया है, जहां 5 लोगों ने जैन मुनि की दीक्षा धारण की है.
22 लोगों को जैन मुनि के रूप में मिली दीक्षा
19 फरवरी को बैतूल जिले के मुक्तागिरी में एक कार्यक्रम संपन्न हुआ. जहां 22 लोगों को जैन मुनि के रूप में दीक्षा दी गई. इसमें सागर के 5 लोग भी शामिल हैं. उनमें 3 इंजीनियर, 1 सीए और एक व्यापारी है. ये सभी संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन सालों पहले जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रभावित होकर इन्होंने जैन मुनि बनने की इच्छा जताई थी. जैन धर्म के अनुसार कई सालों के बाद ये सभी जैन मुनि की दीक्षा धारण कर पाए. जैन मुनि दीक्षा संस्कार के अनुसार, पहले इन लोगों को छुल्लक दीक्षा दी गयी और फिर एलक दीक्षा दी गयी. अब जाकर उनका जैन मुनि बनने का सपना पूरा हुआ.
मुक्तागिरी में दीक्षा संस्कार
बैतूल जिले के जैन तीर्थ स्थल पर आचार्य श्री समय सागर के समक्ष दीक्षा संस्कार कार्यक्रम गुरुवार शाम को संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम में दीक्षा चाह रहे सभी 22 ऐलक और छुल्लक ने करीब 1 घंटे में आचार्य भगवान से दीक्षा लेने का निवेदन किया और सभी से क्षमा मांगी और सबको क्षमा किया. इस भाव के साथ सभी दीक्षार्थियों ने आचार्य श्री के चरणों में पहुंचकर दीक्षा का निवेदन किया.
इसके बाद दीक्षा विधि संस्कार में दीक्षार्थियों के सिर पर आचार्य श्री ने गंधोदक छिड़का और फिर उनके सिर पर अक्षत और केसर का क्षेपण किया. इसके बाद आचार्य श्री ने सभी नवदीक्षित दीक्षार्थियों के केश लोचन किए और सिर का प्रछालन किया. आचार्य श्री के आशीर्वाद के बाद सभी दीक्षार्थियों ने अपने शरीर से वस्त्रों का त्याग कर दिया और दिगंबर मुद्रा धारण की. यहां 13 ऐलक और 9 छुल्लकों को मुनि दीक्षा दी गई है.

श्री औचित्य सागर महाराज
औचित्य सागर महाराज सागर जिले के सीहोरा गांव निवासी हैं. वर्तमान में उनका परिवार सागर में ही निवास करता है. औचित्य सागर महाराज का नाम राहुल जैन था. जिनका जन्म 9 अक्टूबर 1988 को हुआ था और बीए तक पढ़ाई करने के बाद पुणे की एक कंपनी में नौकरी कर रहे थे. इन्होंने 2011 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया. कुंडलपुर महोत्सव 2022 में आचार्य श्री विद्यासागर के समक्ष छुल्लक दीक्षा मिली और 2025 में कुंडलपुर में ही आचार्य समय सागर के समक्ष ऐलक दीक्षा धारण की. इनके भाई वसंत जैन ने बताया कि "बड़े भाई मनीष जैन आचार्य श्री विद्या सागर महाराज से दीक्षित होकर मुनि श्री श्रमण सागर महाराज बने थे. उनकी प्रेरणा से राहुल जैन का वैराग्य की ओर मन बढ़ता गया."
श्री गहन सागर महाराज
आचार्य श्री गहन सागर महाराज के रूप में दीक्षित हुए राजेश जैन बीएसएनएल में एसडीओ थे. इनका जन्म 28 मई 1980 को सागर में हुआ था. इन्होंने एमटेक तक शिक्षा ग्रहण की. 10 मई 2009 को आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया और 12 अगस्त 2020 में गृह त्याग कर दिया. इनकी छुल्लक दीक्षा 20 फरवरी 2022 को संपन्न हुई और फिर ऐलक दीक्षा 30 मार्च 2025 को संपन्न हुई.
उनके गृहस्थ अवस्था के बड़े भाई शासकीय शिक्षक महेंद्र जैन ने बताया कि "28 मई 1980 को हमारे घर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पडगाहन हुआ था और शाम 7:10 पर राजेश का जन्म हुआ था. युवावस्था से ही वैराग्य का मन था और आचार्य श्री के आशीर्वाद से उन्हें निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज जी के संघ में ब्रह्मचारी भैया के रूप में शामिल किया गया."
श्री स्वरूप सागर महाराज
सागर के शाहगढ़ कस्बे के रहने वाले पुनीत जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर 24 लाख के पैकेज पर नौकरी कर रहे थे. जिनका जन्म 18 नवम्बर 1989 को शाहगढ़ में हुआ था. बीई तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने और 30 मई 2018 को आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया. 27 सितंबर 2022 को घर त्याग दिया. इनकी छुल्लक दीक्षा 21 दिसंबर 2022 को संपन्न हुई. उनके गृहस्थ अवस्था के पिता स्टेट बैंक से रिटायर्ड डिप्टी मैनेजर हरिश्चंद्र जैन ने बताया कि "युवावस्था से ही वैराग्य का मन था और आचार्य श्री के आशीर्वाद से उन्हें ब्रह्मचारी भैया के रूप संघ में शामिल किया गया."
श्री उचित सागर महाराज
सागर के सुरखी में 25 जून 1993 को जन्मे मयूर जैन का परिवार एक बड़ा व्यापारी परिवार है. उन्होंने बीकॉम तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद 19 फरवरी 2019 को आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया. फिर गृह त्याग कर 14 अक्टूबर 2020 को संघ में प्रवेश किया और 20 फरवरी 2022 को छुल्लक दीक्षा धारण की. 30 मार्च 2025 को ऐलक दीक्षा धारण की. युवावस्था से धर्म के प्रति रुचि थी. सुरखी से मुनि संघ और आर्यिका संघों के विहार के दौरान सुरखी में प्रवासरत रहते थे. सभी संघों की सेवा करने में मयूर भैया बहुत आगे रहते थे. वर्तमान में उनका परिवार बाहुबली कॉलोनी सागर में निवास कर रहा है.
श्री जागृत सागर महाराज
सागर के रहने वाले रमेश जैन और सविता जैन के बेटे शुभम जैन चार्टर्ड एकाउंटेंट थे. अच्छी खासी कमाई के बाद उनका मन वैराग्य की तरफ मुड़ गया और आचार्य विद्यासागर से प्रभावित होकर वैराग्य की तरफ बढ़ते गए. जिसके बाद बैतूल के मुक्तागिरी में समय सागर के समक्ष जैन मुनि की दीक्षा ली.
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लाखों का पैकेज और घर छोड़कर बने मुनि
मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि "आचार्य संघ में ऐलक और छुल्लक के रूप में दीक्षित 22 साधुओं का दीक्षा संस्कार मुक्तागिरी में संपन्न हुआ. इनमें 2 सीए, 8 सॉफ्टवेयर इंजीनियर, 1 प्रोफेसर, 1 कंपनी सेक्रेट्री, 2 एमबीए के अलावा लगभग सभी दीक्षार्थी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं. वैराग्य के मार्ग पर चलने के लिए लाखों रुपए के पैकेज का वेतन और घर द्वार छोड़कर मुनि दीक्षा लेने के लिए कई सालों से प्रयासरत थे और गुरुवार को बैतूल की मुक्तागिरी में उनका सपना पूरा हुआ.

