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BMC के 28 लैब टेक्नीशियन को सुप्रीम कोर्ट से मिली जीत, हाईकोर्ट के आदेश का नहीं किया था पालन

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त 28 लैब टेक्नीशियन ने लड़ी 13 साल लंबी कानूनी लड़ाई. हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी मिली जीत.

SAGAR BMC 28 LAB TECHNICIANS WIN SC
BMC के 28 लैब टेक्नीशियन को सुप्रीम कोर्ट से मिली जीत (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 25, 2026 at 1:48 PM IST

2 Min Read
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सागर: बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में पदस्थ 28 लैब टेक्नीशियन को 2013 में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बताकर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. इस मामले में सागर की एडव्होकेट समृद्धि जैन ने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और बर्खास्त लैब टेक्नीशियन को जीत दिलाई.

इन 28 लैब टैक्नीशियन की 2010 में भर्ती प्रक्रिया के जरिए भर्ती की गई थी, फिर 3 साल बाद भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का हवाला देकर इन सभी को सेवा से पृथक कर दिया गया. 13 साल लंबी लड़ाई के बाद लैब टैक्नीशियन को सुप्रीम कोर्ट से जीत मिली है.

2010 में भर्ती, 2013 में 28 लैब टैक्नीशियन को हटाया

एडवोकेट समृद्धि जैन ने बताया कि "सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में पहला बैच 2009 में शुरू हुआ था. इस दौरान साल 2010 में बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में 28 लैब टैक्नीशियन की भर्ती की गई थी. इन नियुक्तियों के 3 साल बाद 2013 में अनियमितता का हवाला देकर सभी 28 लैब टैक्नीशियन को हटा दिया गया. इस कार्रवाई के बाद सभी लैब टेक्नीशियन हाई कोर्ट की शरण में गए थे."

Sagar Bundelkhand Medical College
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर (ETV Bharat)

'हाईकोर्ट के आदेश को मेडिकल कॉलेज ने नहीं माना'

एडवोकेट समृद्धि जैन ने बताया कि "हाइकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को सही मानते हुए सभी लैब टैक्नीशियन को पूर्ण वेतन और सभी लाभ प्रदान कर सेवा में पुनः रखने का आदेश दिया. लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले को चैलेंज करते हुए फिर हाईकोर्ट में अपील की. जिसकी सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने लैब टेक्नीशियन के हित में फैसला सुनाया. इसके बावजूद जब हाइकोर्ट के निर्णय का पालन नहीं किया गया, तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. सुप्रीम कोर्ट ने भी लैब टैक्नीशियन के पक्ष में फैसला सुनाया है."

सुप्रीम कोर्ट में पहले ही दिन मिली जीत

28 लैब टेक्नीशियन के मामले में हाईकोर्ट से जीत के बाद भी बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने हाईकोर्ट के आदेश को तव्वजो नहीं दी और लैब टेक्नीशियन को बहाल नहीं किया. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहां एडवोकेट समृद्धि जैन ने बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों से बहस करते हुए बर्खास्त लैब टैक्नीशियन को पहले ही दिन जीत दिला दी.