सागर में सजेगा 218 साल पुराना रहस मेला, मोहन यादव करेंगे शुभारंभ, सरकारी योजनाओं का प्रदर्शन
मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव करेंगे रहस लोकोत्सव का शुभारंभ, 218 साल से भरा जा रहा है मेला, बुंदेलखंड के लोकप्रिय नृत्य राई की प्रस्तुति होगी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 10:56 AM IST
|Updated : February 26, 2026 at 11:37 AM IST
सागर: पिछले 217 साल से गढ़ाकोटा में आयोजित हो रहे रहस मेले में मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव शिरकत करने जा रहे हैं. बुंदेलखंड के इतिहास में एक अलग पहचान रखने वाले रहस लोकोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव करेंगे. मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव दोपहर दो बजे गढ़ाकोटा पहुंचेंगे. वैसे तो पारंपरिक रूप से रहस मेले की शुरूआत बसंत पंचमी के दिन हो जाती है. लेकिन पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के प्रयासों से इस मेले के दौरान तीन दिन राज्य सरकार द्वारा लोकोत्सव का आयोजन किया जाता है. जिसमें शासन की कल्याणकारी योजनाओं के शिविर के साथ शाम के समय रंगारंग और बुंदेली लोककलाओं से जुड़े लोकनृत्य कार्यक्रम होते हैं.
गुरुवार को दो बजे गढ़ाकोटा पहुंचेंगे मुख्यमंंत्री
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि, ''ऐतिहासिक रहस मेले में मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव का आगमन हो रहा है. वह 26 फरवरी गुरुवार को दोपहर दो बजे गढ़ाकोटा पहुंचेंगे और राज्य स्तरीय तीन दिवसीय रहस लोकोत्सव का शुभारंभ करेंगे. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव रहस मेले के दौरान एक विशाल सभा को संबोधित करेंगे. मेले के दौरान स्वास्थ्य शिविर के अलावा मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न योजनाओं के स्टाॅल लगाए जाएंगे. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इस दौरान मेले में आए स्व सहायता समूह की महिलाओं और विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से मुलाकात भी करेंगे.
रहस मेले का शुरूआत 217 साल पहले महाराजा छत्रसाल के पौत्र राजा मर्दन सिंह जू देव ने की थी. धीरे-धीरे ये मेला बड़ा व्यापारिक पशु मेले में तब्दील हो गया. कहा जाता है कि एक वक्त मेले में हाथी तक बिकने के लिए आते थे और देश भर के लोग यहां पशु बेचने और खरीदने के लिए पहुंचते थे.

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क्या कहा गोपाल भार्गव ने
पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक गोपाल भार्गव ने बताया कि, ''रहस मेले के अंतर्गत 26 से 28 फरवरी तक लोकोत्सव का आयोजन भी किया जाता है. ये मेला ऐतिहासिक और प्राचीन है. पहले यह मेला पशुओं के क्रय-विक्रय तक सीमित था. लेकिन धीरे-धीरे मेले को वृहद स्वरुप प्रदान किया जाता रहा है. मेला किसी कि व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है, हम सभी की धरोहर है. मेले में शासन द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं का लाभ मेले में ही दिया जाने लगा है. मेले की सार्थकता तब है जब अधिक से अधिक हितग्राहियों को शासकीय योजना का लाभ मिल सके.''
इसी उद्देश्य को लेकर मेले में स्वास्थ्य शिविर से लेकर अधिकांश विभागों को समस्या निवारण एवं हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को पहुंचाना है. इसके अलावा तीन दिनों तक रोजाना शाम को मेले में बुंदेली लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी. खासकर बुंदेलखंड के लोकप्रिय नृत्य राई की प्रस्तुति होगी.

