साध्वी प्रेम बाईसा की अस्थमा अटैक से हुई मौत, देश में हर साल 2 लाख लोग गंवाते हैं इस बीमारी से जान
अस्थमा और सीओपीडी क्यों है इतनी घातक और कैसे कर सकते हैं इससे बचाव, यहां जानिये

Published : February 20, 2026 at 11:39 AM IST
जोधपुरः कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का कारण सामने आ चुका है. पुलिस पोस्टमार्टम, एफएसएल हिस्टोपेथॉलॉजी रिपोर्ट के आधार पर इस बात का खुलासा कर चुकी है कि साध्वी को सांस की बीमारी अस्थमा थी जो सीओपीडी तक पहुंच गई थी. पुलिस के मुताबिक घटना के दिन उन्हें गंभीर पल्मोनरी अरेस्ट से कार्डियक अटैक हुआ था जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हुई थी. अस्थमा को आमतौर पर लोग सामान्य लेते हैं, लेकिन ये कितनी गंभीर हो सकती है, इसका उदाहरण साध्वी की मौत की घटना है.
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की घटना पूरे देश में चर्चित रही है. उनकी मौत के पीछे के कारण यह दर्शाते हैं कि अस्थमा को हल्के में लेना घातक हो सकता है?. खास बात यह भी है कि इसकी शुरुआत बचपन से होती है, समय रहते सही उपचार और देखभाल ही राहत देती है. इस खबर में हम आपको अस्थमा, सीओपीडी जैसी बीमारी के बारे में वो सबकुछ बताएंगे, जिसे जानना बेहद जरूरी है.
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तेजी से बढ़ा अस्थमा, सीओपीडीः डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभागाध्यक्ष एवं कमला नेहरू चेस्ट हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ सीआर चौधरी ने बताया कि प्रदूषण, धूम्रपान और बदलती जीवनशैली के कारण अस्थमा और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज) तेजी से बढ़ रही है. बच्चों में अस्थमा की शिकायत होने पर उनको समय रहते उपचार से जोड़ना जरूरी है, अन्यथा क्रॉनिक सीओपीडी में तब्दील हो जाती है. भारत में क्रॉनिक रेस्परेटरी बीमारियों के मरीज काफी हैं. देश में सालाना दो लाख लोगों की मौत सांस से जुड़ी बीमारियों से होती है. डॉ चौधरी ने बताया कि भारत में लगभग 3.8 करोड़ लोग अस्थमा और 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी के मरीज हैं. उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 6.8 करोड़ लोग किसी न किसी पुरानी श्वसन बीमारी से प्रभावित हैं.

बचपन में ही नजर आते हैं अस्थमा के लक्षण : डॉ चौधरी ने बताया कि अस्थमा की शुरूआत बचपन से ही होती हैं, इसलिए इसके लक्षणों की शुरुआत होने के साथ ही ध्यान रखने की जरूरत होती है. यह धीरे धीरे सामान्य जीवन में परेशानी खड़ा करता है, इसलिए बचपन से ही उपचार लेना जरूरी होता हैं.

अब युवाओं में भी सीओपीडी होने लगी है : डॉ चौधरी ने बताया कि अस्थमा और सीओपीडी (COPD) दोनों सांस की फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं, लेकिन इनके कारण और प्रभाव अलग हैं. अस्थमा में श्वासनमार्ग का संकुचन अस्थायी होता है (दवाओं से ठीक हो सकता है) और यह अक्सर एलर्जी या बचपन से शुरू होता है. वहीं, सीओपीडी में श्वसनमार्ग में अपरिवर्तनीय (स्थायी) नुकसान होता है, जो आमतौर पर धूम्रपान के कारण उम्र बढ़ने के साथ होता है, लेकिन वर्तमान में धूम्रपान नहीं करने वाले कम उम्र के युवाओं में भी ये समस्याएं जन्म ले रही हैं.

राजस्थान में स्थिति और अधिक चिंताजनक : स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार राजस्थान उन राज्यों में है जहां अस्थमा और सीओपीडी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं सबसे अधिक पाई गई हैं. राष्ट्रीय वृद्धजन सर्वे के अनुसार राज्य में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में लगभग 15% तक किसी न किसी पुरानी फेफड़े की बीमारी पाई गई. इसी सर्वे में अस्थमा की दर बुजुर्गों में करीब 12% तक बताई गई, जो कई राज्यों से अधिक है.
अस्थमा की तिव्रता नापना जरूरी : चेस्ट हॉस्प्टिल अधीक्षक डॉ चौधरी ने बताया कि जिस तरह से बीपी नापा जाता है उसी तरह से अस्थमा की तिव्रता का भी पता होना जरूरी होता हैं. स्पाइरोमीटरी टेस्ट या पीफ्लो टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि मरीज के अस्थमा की तिव्रता कितनी हैं.

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नेबुलाइजर देकर बचाई जा सकती है जान : अस्थमा का अटैक होने पर परिजनों को सबसे पहले घर में नेबुलाइजर है तो उसे नेबुलाइज करना जरूरी है, इससे सांस वापस सही होने लगती है. इस दौरान अस्पताल ले जाना चाहिए, नेबुलाइजर नहीं होने पर पफ पंप का उपयोग करें, हर बीस मिनट में तीन-तीन बार पंप देते हुए अस्पताल ले जाना चाहिए.

क्या होता है पल्मोनरी अटैक : पल्मोनरी अटैक, जिसे आमतौर पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है, यह दिल के दौरे की तरह ही फेंफड़ों का दौरा होता हैं. यह अस्थाम की वजह से ही होता है. इसमें फेफड़ों की धमनी में खून का थक्का जमने से जानलेवा आपातकालीन स्थिति बन जाती हैं , जिससे सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और चक्कर जैसे लक्षण होते हैं, तत्काल उपचार न मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है.
सांसें उखड़ गई थी प्रेमबाईसा कीः 28 जनवरी को कथावाचक प्रेमबाईसा की तबीयत खराब हुई थी. उनको सांस की परेशानी थी. शाम को उनको नर्सिंगकर्मी देवीसिंह ने इंजेक्शन लगाए थे. इसके कुछ देर बाद उनकी तबीयत खराब हुई. उनके पिता बिरमनाथ व सेवादार सुरेश उनको लेकर अस्पताल निकले थे, सुरेश ने बताया था कि बाईसा की सांसें बहुत तेजी से चल रही थी, कुछ देर में तेज सांसें अचानक बंद हो गई. अस्पताल पहुंचते ही उनकी मौत हो गई थी. पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट में उनकी मौत का प्रमुख कारण अस्थमा व सीओपीडी निकला, जिसकी वजह से उनको पल्मोनरी अरेस्ट हुआ था.


