अब नई चकाचक गाड़ी से प्रखंड का विकास करने निकलेंगे बीडीओ साहब, 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों को मिली नई गाड़ियां
झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग ने गुरुवार को 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDOs) को विभागीय वाहन आवंटित किए.

Published : July 2, 2026 at 5:52 PM IST
रांची: झारखंड में विकास योजनाओं को रफ्तार देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा गुरुवार को 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों(BDOs) के बीच विभागीय वाहनों का वितरण किया गया.
कार्यप्रणाली से सरकार की छवि बनती हैः मंत्री दीपिका पांडेय सिंह
झारखंड मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विभागीय वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, इस मौके पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य के प्रखंड विकास पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली से सरकार की छवि बनती और बिगड़ती है.
आमजन की समस्याओं के समाधान को गति मिलेगी
अधिकारियों के कंधों पर सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी भी होती है. इसलिए ग्रामीण जनता के काम को संवेदनशीलता से निष्पादन और टालमटोल की नीति से परहेज करने की जरूरत है. इस पहल से क्षेत्रीय निरीक्षण, योजनाओं की सतत निगरानी एवं आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान को और अधिक गति मिलेगी.

इस मौके पर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें और ग्रामीण इलाकों में सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन सुनिश्चित करें.
राज्य में 25 बीडीओ को विभागीय वाहन मिले
विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि कई बार यह देखने को मिला है कि वाहन के अभाव में विकास योजनों की जमीनी हकीकत और निगरानी में अधिकारियों को परेशानी होती है, ऐसे में राज्य की महागठबंधन सरकार की यह सोच है कि अधिकारियों को उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाए, इसी कड़ी में गुरुवार को राज्य के 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों को विभागीय वाहन दिया गया है. आगे विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि शेष प्रखंडों में एक साथ विभागीय वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आरंभ की जाए.
ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जिस तरह सरकार राज्य के लोगों और विकास के प्रति संवेदनशील है, उसी तरह अधिकारियों को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए. फिलहाल, अधिकारियों की मुख्य जिम्मेदारी SIR, अनुसूचित क्षेत्रों में लागू PESA कानून को लागू करना और सरकारी योजनाओं का बेहतर संचालन करना है.

आय के स्रोत बढ़ाने पर जोर
15वें वित्त आयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र से 2,250 करोड़ रुपये की राशि पंचायतों तक पहुंच चुकी है और अब बारी सोलहवें वित्त आयोग को लेकर है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंचायतों को आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे.
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब प्रखंड तक लोगों की पहुंच पहले की अपेक्षा अधिक आसान हुई है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लोगों के अधिक से अधिक कार्य पंचायत स्तर पर ही हो जाए. राज्य सरकार ने डिजिटल पंचायत के माध्यम से पंचायतों को आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित करने का कार्य किया है, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवश्यक दस्तावेज और अन्य सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध हो, ताकि उन्हें बार-बार प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाना पड़े. पंचायत सचिवों की कमी सरकार के संज्ञान में है, जिसे बहुत जल्द दूर कर लिया जाएगा. इस मौके पर सचिव मनोज कुमार, अपर सचिव प्रेरणा दीक्षित, अपर सचिव अरुण कुमार सिंह, संयुक्त सचिव एस.अली खान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
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