गृहणी से सफल उद्यमी बनीं रुद्रपुर की गीता कम्बोज, रीप ने बदली तकदीर, जानिये कैसे
गीता कंबोज आज एक दिन में लगभग 3 से 4 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 22, 2026 at 4:55 PM IST
रुद्रपुर: उत्तराखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रहे हैं. रुद्रपुर विकास खंड के दानपुर गांव की गीता कम्बोज ने स्वयं सहायता समूह और रीप परियोजना से जुड़कर न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं.
उत्तराखंड सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाएं अब ग्रामीण क्षेत्रों में असर दिखाने लगी हैं. इसी का सशक्त उदाहरण विकास खंड रुद्रपुर के ग्राम दानपुर की निवासी गीता कम्बोज हैं. कभी एक सामान्य गृहणी के रूप में परिवार की सीमित आय और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच जीवनयापन कर रहीं गीता आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं.

गीता के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. बढ़ते खर्चों और सीमित संसाधनों के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. ऐसे समय में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया. समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत हुई. उन्होंने ग्राम संगठन और फिर क्लस्टर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई. जिससे उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि हुई.
इसी दौरान ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की टीम ने उन्हें व्यक्तिगत उद्यम योजना की जानकारी दी. इस योजना ने गीता के भीतर छिपे उद्यमी भाव को नई दिशा दी. परियोजना के तहत उन्हें 50 हजार रुपये का बैंक ऋण, 30 हजार रुपये की अनुदान राशि और 20 हजार रुपये का स्वयं का अंशदान लगाकर एक छोटा रेस्टोरेंट शुरू करने का अवसर मिला. शुरुआत में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन गीता ने हिम्मत नहीं हारी. अपने परिश्रम, लगन और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता के बल पर उन्होंने अपने रेस्टोरेंट को सफल बनाया. आज वह प्रतिदिन लगभग 3 से 4 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं. इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा करना भी आसान हो गया है.

गीता कम्बोज की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं. आज वह अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं. रीप परियोजना जैसी पहलें प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. समग्र विकास की राह को मजबूत कर रही हैं.
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