मसूरी वन प्रभाग से रेंज हटाने की चर्चाओं पर बवाल, अफसरों ने साफ की स्थिति, जानिये क्या कहा
प्रदर्शनकारियों ने एसडीओ दिनेश प्रसाद नौटियाल के माध्यम से वन मंत्री सुबोध उनियाल को ज्ञापन भेजा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 21, 2026 at 6:41 PM IST
देहरादून: टिहरी जिले के जौनपुर विकासखंड में वन प्रभाग के कथित पुनर्गठन को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. हालांकि वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का कोई प्रस्ताव न तो विभाग में विचाराधीन है और न ही शासन स्तर पर कोई निर्णय लिया गया है.
जौनपुर विकासखंड की चार वन रेंजों — भद्रीगाड़, कैम्पटी, जौनपुर और देवलसारी — को मसूरी वन प्रभाग से हटाकर प्रस्तावित नई टिहरी (मुनि की रेती) वन प्रभाग में शामिल किए जाने की चर्चाओं ने क्षेत्र में असंतोष पैदा कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यह कदम क्षेत्र की जनभावनाओं के विपरीत है. इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में लोग मसूरी स्थित वन विभाग कार्यालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की.
प्रदर्शनकारियों ने एसडीओ दिनेश प्रसाद नौटियाल के माध्यम से वन मंत्री सुबोध उनियाल को ज्ञापन भेजा. ज्ञापन में मांग की गई है कि जौनपुर विकासखंड की चारों रेंजों को नई टिहरी वन प्रभाग में शामिल करने की किसी भी प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे.
हालांकि, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन सभी आशंकाओं को निराधार बताया है. विभाग के प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि वन प्रभाग के पुनर्गठन को लेकर विभाग में कोई प्रस्ताव गतिमान नहीं है. प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने भी इस संबंध में साफ किया कि शासन स्तर पर ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और न ही फिलहाल कोई योजना पर विचार किया जा रहा है.
वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत में अपर सचिव वन हिमांशु खुराना ने कहा वन प्रभाग का पुनर्गठन एक विस्तृत और जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया होती है, जिसे बिना ठोस आधार और व्यापक विचार-विमर्श के आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव नही है.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग और शासन दोनों स्तरों पर किसी प्रस्ताव से इनकार किया जा रहा है, तो फिर विरोध किस आधार पर हो रहा है? क्या यह केवल अफवाहों का असर है या फिर कहीं न कहीं संवाद की कमी? फिलहाल वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन क्षेत्र में असंतोष अभी भी बना हुआ है.
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