DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप, RTE कोटा छात्रों से करा रहीं मजदूरी, TC काटने की धमकी
सूरजपुर में RTE कोटा छात्रों और उनके परिजन ने प्रिंसिपल विधु शर्मा पर दबाव डालने, ताना मारने और मजदूरी कराने जैसे आरोप लगाए हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 26, 2026 at 4:55 PM IST
|Updated : February 26, 2026 at 5:14 PM IST
सूरजपुर: DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल विधु शर्मा पर गंभीर आरोप लगे हैं. ये आरोप शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पढ़ने वाले बच्चों और उनके परिजनों ने लगाए हैं. उनका कहना है कि सरकारी कोटा वाले बच्चों से काम कराया जाता है और भेदभाव किया जाता है. कई लोगों ने तो अपने बच्चों को स्कूल से ही निकाल लिया है. मामला सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगे तिलसिंवा गांव का है.
TC देने या फेल करने की धमकी
परिजनों का आरोप है कि आरटीई कोटे से पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल में पढ़ाई के बजाय मजदूरी कराई जाती है. बच्चों से पुताई और रंगाई का काम, सीमेंट-मसाला तैयार कराना, फावड़ा चलवाना, बेंच-टेबल ढुलवाना जैसे काम कराए गए. बच्चों का कहना है कि उन्हें यह कहकर धमकाया जाता है कि वे “सरकारी कोटे” से पढ़ रहे हैं, इसलिए काम करना पड़ेगा, नहीं तो टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) काट दिया जाएगा या फेल कर दिया जाएगा.
हमसे जबरदस्ती काम कराया जाता है, बेंच उठवाते हैं, पोताई करवाते हैं. नहीं करते हैं तो TC काटने की धमकी देते हैं- पीड़ित छात्र
मैम हमको बोलती है कि फ्री में पढ़ते हो तो इतना काम नहीं कर सकते, जाओ फिर मजदूरी करो- पीड़ित छात्र
परिजनों का आरोप: अपमान और दबाव
परिजनों का कहना है कि आरटीई से पढ़ने वाले बच्चों को अलग नजर से देखा जाता है. कई बच्चों का नाम पहले ही काटा जा चुका है. कुछ अभिभावकों को मजबूरन अपने बच्चों का नाम स्कूल से हटाना पड़ा. जिन परिवारों ने फीस दी, उनके बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है. एक महिला अभिभावक ने बताया कि राशन कार्ड के आधार पर उनके बच्चे का एडमिशन हुआ था, लेकिन लगातार अपमान और दबाव के कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा.

10-12 छात्र निकल चुके हैं
एक और अभिभावक ने बताया कि उन्हें प्रिंसिपल मैम दबाव डालती है. कहती है अपने बच्चे को स्कूल से निकाल दो वो कमजोर है. परिजन ने कहा कि राशन कार्ड से एडमिशन कराए थे लेकिन ये मैडम ठीक नहीं है, पहले भी तो सर थे वो तो नहीं निकालते थे. हाल ही में 10-12 लड़के निकल चुके हैं. रोते-रोते सब निकल रहे हैं. जो पैसा दे रहे हैं बस वो पास हो रहे हैं.
प्रिंसिपल मैम ने बोला कि तुम्हारा लड़का बहुत कमजोर है इसे निकाल के सरकारी में डाल दो, हमलोग यहां सब्जी-भाजी बेचने नहीं आते पढ़ाने आते हैं- शीतल बाई केवट, परिजन
बच्चे से स्कूल में काम करा रहे थे, मेरे बच्चे के हाथ में पूरा चोट दिख रहा है. स्कूल में सीमेंट उठवा रहे हैं और ताने दिए जाते हैं- सविता देवी, परिजन
कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत
स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी, कलेक्टर जनदर्शन और बाल संरक्षण विभाग को दी गई है. सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने कहा है कि शिकायत के आधार पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जनदर्शन में हमें शिकायत मिली है, इसके लिए समिति भी मैंने बना दी है. एक हफ्ते में जो भी जांच समिति की रिपोर्ट आएगी उस पर कार्रवाई करेंगे- अजय मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी, सूरजपूर
शिक्षा के अधिकार पर सवाल
यह मामला सरकार की महत्वाकांक्षी योजना Right to Education Act (RTE Act 2009) पर भी सवाल खड़े करता है. इस कानून के तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है. क्या गरीब बच्चों को सम्मान के साथ पढ़ने का अधिकार नहीं है? अगर वे आरटीई के तहत पढ़ते हैं, तो क्या उनसे मजदूरी कराना जायज़ है?
अब देखने वाली बात यह होगी किजांच में बच्चों और परिजनों के बयान दर्ज किए जाते हैं या नहीं. कुछ वायरल वीडियो भी सामने आए हैं जिसे पेश किया गया है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.

