जयपुर की 'रॉयल वीणा' ने बजाया अंतरराष्ट्रीय सम्मान का सुर, मिला अमेरिकन आर्ट अवॉर्ड 2025
जयपुर के कलाकार रोहित जांगिड़ को अमेरीकन आर्ट अवॉर्ड 2025 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है.

Published : October 24, 2025 at 8:31 PM IST
जयपुर: राजधानी के शिल्पकार की कला ने एक बार फिर विश्व मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है. शिल्पकार रोहित जांगिड़ की उत्कृष्ट कृति 'रॉयल वीणा' (Sandalwood Carving Sitar) को 2025 American Art Awards में 'Sculpture - Representational' कैटेगरी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है. ये सम्मान 63 देशों के कलाकारों के बीच हुई प्रतिस्पर्धा के बाद दिया गया. जहां भारत की इस सूक्ष्म और पारंपरिक कला ने विश्व भर की नजरों को अपनी ओर खींचा.
चंदन की लकड़ी से तैयार 'रॉयल वीणा': चंदन की खुशबू से भरे एक छोटे-से कमरे में बैठा एक युवा, लकड़ी पर अपनी उंगलियों से कहानियां गढ़ता है. ये कहानी है कलाकार रोहित जांगिड़ की, जिसने अपने बारीक काम से भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है. रोहित ने चंदन की लकड़ी से बनी रॉयल वीणा को बारीकी, संरचना और कहानी कहने की शैली के रूप में तैयार किया. रोहित ने बताया कि इस वीणा में तीन छोटे और एक बड़ा कक्ष बनाया गया है. ये कक्ष वीणा के ट्यूनिंग पेग्स के माध्यम से खुलते हैं. प्रत्येक कक्ष में तानसेन के जीवन के अलग-अलग प्रसंगों को बाइजेंटाइन शैली में उकेरा गया है. वीणा के गूंजक भाग के दोनों ओर नृत्यमग्न गणेश और मोर हैं, जबकि शीर्ष पर देवी सरस्वती की प्रतिमा विराजमान है, जो संगीत, ज्ञान और सृजन की प्रतीक हैं. रोहित ने कहा कि ये वीणा संगीत की शाश्वत परंपरा को समर्पित है.
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पारंपरिक कला को मिली पहचान: रोहित ने बताया कि वे अपनी कलाकृति पर तेल नहीं लगाते, ताकि लकड़ी की प्राकृतिक सुगंध और बनावट बनी रहे. वो अपनी कलाकृतियों को मूल रूप में रखते हैं. अंतिम टच बस सूखे ब्रश से देते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकन आर्ट अवॉर्ड 2025 की ये उपलब्धि जयपुर की पारंपरिक कला और भारतीय शिल्पकला की नई पहचान बन गई है. ये सम्मान न केवल जांगिड़ परिवार की पीढ़ियों की मेहनत का प्रतिफल है, बल्कि ये प्रमाण भी है कि भारतीय कला आज भी विश्व के हर मंच पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.
प्रधानमंत्री भी कर चुके सराहना: दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को उपहार स्वरूप जो 'रॉयल वीणा' भेंट की थी, उसे रोहित के बड़े भाई मोहित जांगिड़ ने बनाया था. रोहित ने बताया कि उनका परिवार है जो पीढ़ियों से चंदन पर बारीक नक्काशी और वीणा बनाने की परंपरा को जीवित रखे हुए है. परिवार के कई सदस्यों को इस कला के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं. युवा पीढ़ी में वो और उनके भाई मोहित ने इस विरासत को नए आयाम दिए हैं. वे मिनिएचर कार्विंग में माहिर हैं और पहले भी अपनी लकड़ी की मक्खी के लिए इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित कई राष्ट्रीय-स्थानीय पुरस्कार जीत चुके हैं.
रोहित और उनकी टीम ने मिलकर बीते दिनों 'राजस्थानी गुड़िया' पर तीन महीने तक लगातार काम किया. ये आर्ट करीब 24 इंच की है, जो अब 'म्यूजियम क्वालिटी पीस' मानी जाती है. बहरहाल, सरस्वती की कृपा और राजस्थान की परंपरा से मिलकर जहां 'रॉयल वीणा' का जन्म हुआ. वहीं रोहित और उनका परिवार अब अपनी इस कला के जरिए भारत का नाम वैश्विक मंच पर गूंजा रहा है.


