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मौर्य काल के ट्रेड रूट को योगी सरकार ने अपनाया; हजारों साल पहले भी इसी मार्ग से होता था व्यापार, मगध से हस्तिनापुर का क्या था कनेक्शन?

गंगा एक्सप्रेसवे का एक माह पहले ही हुआ है उद्घाटन, ग्रीस के इतिहासकार मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में किया है इस रूट का जिक्र.

मौर्य काल का ट्रेड रूट.
मौर्य काल का ट्रेड रूट. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : June 1, 2026 at 5:06 PM IST

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Updated : June 1, 2026 at 9:23 PM IST

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मेरठ: पीएम मोदी ने करीब एक माह पहले ही गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था. इस रूट से प्रयागराज की दूरी तय करने में लोगों को आधा समय लगेगा. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हजारों वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य के दौरान भी यह एक महत्वपूर्ण ट्रे़ड रूट था? ऐसा शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का मानना है. इस रूट ने मौर्य काल में सभ्यता, संस्कृति और व्यापार को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया. आज उसी रूट को बढ़ावा मिला है. जानिए मौर्य शासन के दौरान और अब इस रूट के कायम रहने और विकसित होने के पीछे क्या हैं दावे. सुनील कुमार सिंह के संपादन के साथ श्रीपाल तेवतिया की खास रिपोर्ट...

मौर्य काल का ट्रेड रूट. (Video Credit; ETV Bharat)

गंगा एक्सप्रेसवे

पीएम मोदी ने 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में प्रदेश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था. इस एक्सप्रेसवे को हाईस्पीड एक्सप्रेसवे भी बताया जा रहा है, जहां 120 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम गति वाहन की हो सकती है. 6 लेन का यह एक्सप्रेसवे भविष्य में 8 लेन का हो सकता है. यह 12 जिलों, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है और 594 किलोमीटर लंबा है. इसके निर्माण में लगभग 36,000 करोड़ रुपये का खर्च आया है.

गंगा एक्सप्रेस वे
गंगा एक्सप्रेस वे (Photo Credit; ETV Bharat)

मौर्य काल का रूट

इतिहास को खंगालने पर जानकारी मिलती है कि पूर्व में भी हस्तिनापुर से गंगा के किनारे सिर्फ प्रयागराज तक ही मार्ग नहीं था, बल्कि तक्षशिला से लेकर पाटलीपुत्र तक भी एक्सप्रेसवे की तरह ही रूट था. यह वह दौर था जब मौर्य साम्राज्य उभर कर आया था. गैजेटियर में भी जिक्र है, ऐसे तमाम साक्ष्य मौजूद हैं जो इस बात की गवाही देते हैं.

मौर्य काल का ट्रेड रूट.
मौर्य काल का ट्रेड रूट. (Photo Credit; ETV Bharat)

शोधकर्ता का कहना

बीते एक दशक से भी ज्यादा समय से हस्तिनापुर के साथ गंगा के प्राचीन रूप को लेकर रिसर्च कर रहे प्रियंक भारती चिकारा बताते हैं, प्रदेश में जिस तरह से गंगा एक्सेप्रेसवे को निकाला गया है, उससे नजर आता है कि पीएम मोदी और सीएम योगी संस्कृति को लेकर उसे गंभीर दिखते हैं. ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जहां से प्रदेश में एक्सप्रेसवे निकला है वहां नजदीक से ही गंगा का भी स्थल है. फिर चाहे वह हस्तिनापुर हो, काशी या प्रयागराज हो. ऐसे तमाम स्थल हैं, जो कि हमारे इतिहास में दर्ज हैं.

मौर्य राजवंश.
मौर्य राजवंश. (Photo Credit; ETV Bharat)

बताते हैं, इतिहास के पन्नों को अगर पलटते हैं तो पाते हैं कि मौर्य शासनकाल में इस तरह के ट्रेड रूट्स बनाए गए और वे इतिहास में दर्ज हैं. वहीं अभी दो-तीन साल पहले ही उत्तखनन हस्तिनापुर में हुआ, उसमें भी मौर्य शासनकाल की कुछ मोहरें निकली थीं, जिससे से कयास लगाए गए थे कि यहां कुछ ट्रेड मौर्य शासनकाल में होते होंगे.

तक्षशिला से पाटलीपुत्र तक ट्रेड रूट

हालांकि वे यह भी कहते हैं कि अभी ASI की पूरी रिपोर्ट आनी बाकी है. बात करें अगर ट्रेड रूट की तो मौर्य शासनकाल में वह तक्षशिला से पाटलीपुत्र तक निकाला गया था. जो कि एक हजार किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक फैला था. मौर्य शासन काल में महाभारत काल को पुनः विकसित करने का प्रयास किया गया था. क्योंकि गांधार से गांधारी थीं, जो कि हस्तीनापुर की ही महारानी थीं. ऐसे में वहां से भी व्यापार होता था. उस काल में इस रूट को विकसित किया गया था. उस वक्त इस उतरपथ और दक्षिनापथ नाम दिया गया था. इनका जिक्र भी मिलता है.

इतिहासकार डॉ. एके गांधी
इतिहासकार डॉ. एके गांधी (Photo Credit; ETV Bharat)

मेगस्थनीज ने भी किया जिक्र

बताते हैं, मेगस्थनीज एक इतिहासकार एवं राजदूत थे. उनकी लिखी ऐतिहासिक पुस्तक इंडिका में इस रूट का जिक्र है. इतना ही नहीं, 1951 की अगर डॉक्टर बी लाल की हस्तिनापुर के उत्खनन को लेकर रिपोर्ट को देखें तो सामने आता है कि राजा निचक्षु (8वीं शताब्दी ईसा पूर्व) के शासन काल में जब हस्तिनापुर बाढ़ से संकटग्रस्त हो चुका था तो कौशांबी बसाई गई थी. महान राजा परिक्षित और जनमेजय के वंशज निचक्षु के समय में कौशांबी को राजधानी बनाया गया था.
राजगीर भी महाभारत काल में महत्वपूर्ण स्थान था.

क्या कहते हैं इतिहासकार

इतिहासकार डॉ. एके गांधी कहते हैं कि जो हमारे ट्रेड रूट्स थे, वे हमारी समृद्धि का साधन थे. उनसे सिर्फ माल ही नहीं जाता था, वह हमारी आर्थिक समृद्धता के लिए भी महत्वपूर्ण थे. महाभारत काल में भी हस्तिनापुर का जिक्र आता है जो कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा. उस समय हस्तीनापुर से काशी और पटना तक के जो जनपद थे, उन्हें आपस में कनेक्ट करने के लिए तीन तरह के रूट थे. उनमें से एक रूट मथुरा होकर जाता था. एक रूट गंगा के किनारे-किनारे जाता था, जबकि एक रूट अन्य क्षेत्रों को कवर करता था. बताते हैं कि उस वक्त जो मुख्य मार्ग था वह हस्तिनापुर से लेकर काशी तक था, जहां पर आज का गंगा एक्सप्रेसवे है और यह लगभग इस रूट को फॉलो करता है और इसका बहुत महत्व भी है.

मौर्य काल का ट्रेड रूट.
मौर्य काल का ट्रेड रूट. (Photo Credit; ETV Bharat)

कहते हैं, मौर्य काल में सड़कों को बनाने का जो कार्य शुरू हुआ, उससे सिर्फ व्यापार को ही बढ़ावा नहीं मिला, बल्कि सभ्यता संस्कृति भी फली-फूली. पुराने लोग भी यही कहते हैं कि जब आप किसी भी क्षेत्र की तरक्की चाहते हैं तो वहां से सड़क बना दीजिए. आज का गंगा एक्सप्रेस भी वही काम कर रहा है, जो पूर्व में ट्रेड रूट्स कर रहे थे. कहते हैं कि ट्रेड रूट हमारी संस्कृति के वाहक हैं और इस दिशा में वर्तमान में भी काम हो रहा है. अगर भारत पूर्व में सोने की चिड़िया कहलाता था तो इसके पीछे भी कारण ट्रेड रूट्स थे.

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Last Updated : June 1, 2026 at 9:23 PM IST