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रोहतक PGIMS में काले पीलिया पर शोध, हेपेटाइटिस बी में 30 और हेपेटाइटिस सी होने पर 26 फीसदी महिलाओं का हुआ गर्भपात

काला पीलिया गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. रोहतक पीजीआईएमएस में किया गया शोध, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े.

रोहतक PGIMS में काले पीलिया पर शोध
रोहतक PGIMS में काले पीलिया पर शोध (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : December 26, 2025 at 1:05 PM IST

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रोहतक: हरियाणा के रोहतक PGIMS की रिसर्च में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. शोध में पाया गया है कि महिलाओं में काला पीलिया होने पर गर्भपात होने के आसार काफी ज्यादा होते हैं. हेपेटाइटिस बी होने पर 30 प्रतिशत व हेपेटाइटिस सी होने पर 26 प्रतिशत महिलाओं का गर्भपात हुआ है. यह रिसर्च गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, स्त्री रोग विभाग,कम्युनिटी मेडिसिन विभाग व व माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से किया गया है.

क्या होता है काला पीलिया और लक्ष्ण: दरअसल, काला पीलिया, लीवर का एक गंभीर और जानलेवा वायरल इन्फेक्शन है. यह हेपेटाइटिस बी और सी के कारण होता है. जिसमें बिलीरुबिन बढ़ने से त्वचा, आंख और शरीर काला पड़ने लगता है. साथ ही गंभीर थकान, पेट दर्द, उल्टी और मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखते हैं. यह लीवर फेलियर या कैंसर का कारण बन सकता है.

मरीजों पर किया गया शोध: PGIMS के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर एवं विभाग अध्यक्ष तथा नोडल ट्रीटमेंट सेंटर के इंचार्ज डा. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि "पिछले 12 वर्ष के दौरान हेपेटाइटिस सी के करीब 26 हजार तथा हेपेटाइटिस बी के करीब 12 हजार मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है. इस दौरान इन मरीजों पर कई रिसर्च की जा चुकी हैं. रिसर्च में सबसे ज्यादा महिलाएं 20 से 30 वर्ष के बीच की थी. पहले 3 माह के दौरान गर्भपात का खतरा बहुत ज्यादा पाया गया. रिसर्च में देखा गया कि करीब 60 प्रतिशत महिलाओं में एक बार और 40 प्रतिशत महिलाओं में 2 बार से ज्यादा गर्भपात हुआ".

समय रहते करवाएं काले पीले की जांच: डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि "शादी से पहले हर किसी को काले पीलिया की जांच करवानी चाहिए और समय पर इलाज हो तो काफी हद तक काला पीलिया को खत्म किया जा सकता है. काला के अभियान को नशा मुक्ति अभियान के साथ भी जोड़ दिया है. जिन 38 हजार काला पीलिया के मरीजों का पंजीकरण किया गया, उनमें से एक तिहाई से अधिक मरीज धूम्रपान, नशा, शराब का सेवन करते थे. लेकिन अब 80 फीसदी मरीज नशे को त्याग चुके हैं".

यहां निशुल्क मिलता है इलाज: नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत PGIMS का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग हरियाणा राज्य का एकमात्र नोडल ट्रीटमेंट सेंटर है. यह भारत में काले पीलिया के मरीजों के इलाज में उन चुनिंदा संस्थानों में से एक है, जहां पर प्रतिदिन 70 से 80 मरीज का इलाज निशुल्क किया जाता है. इस केंद्र में प्रतिदिन बिना किसी अप्वाइंटमेंट और प्रतीक्षा के इलाज होता है. यहां पर एक ही छत के नीचे फाइब्रोस्कैन, एंडोस्कोपी जैसे सभी टेस्ट एवं दाखिले की सुविधा उपलब्ध है. अभी तक नेशनल प्रोग्राम के तहत सभी हेल्थ वर्कर्स को निःशुल्क हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन लगाई जा रही थी. लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों को भी उपलब्ध करवाई जा रही है, जिन्हें हेपेटाइटिस बी होने का खतरा ज्यादा रहता है.

काला पीलिया की क्यों आती है समस्या?: कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. वरुण अरोड़ा ने बताया कि "हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन ओपीडी के कमरा नंबर 206 में प्रतिदिन लगाई जाती है. हाई रिस्क मरीजों में वह लोग शामिल होते हैं, जिन्हें बार-बार खून चढ़ता है. जैसे हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, डायलिसिस के मरीज. इसके अलावा नशे के टीके लगाने वाले मरीज, एचआईवी, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी के मरीजों के परिवार के सदस्य व देखभाल करने वाले भी शामिल हैं".

सावधानियां जरूरी: डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने कहा है कि "लीवर को फिट रखने के लिए नशे से दूर रहना चाहिए. मोटापे से बचने के लिए तली हुई चीज, मीठा, चिकने व मैदे से बनी हुई चीज कम से कम खानी चाहिए. काला पीलिया के इलाज में किसी झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़कर PGIMS के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग या किसी भी सरकारी अस्पताल में अच्छे चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए".

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