'मक्कारी जिसकी फितरत.. वसूली करना जिसका धंधा' RJD के एमएलसी उम्मीदवारी पर क्यों भड़कीं रोहिणी आचार्य?
आरजेडी द्वारा सुनील सिंह को एमएलसी उम्मीदवार बनाए जाने पर लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने भीतरघात और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया-

Published : June 8, 2026 at 1:39 PM IST
पटना : राष्ट्रीय जनता दल द्वारा बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए मौजूदा एमएलसी सुनील सिंह को फिर से एमएलसी उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की आवाज उठने लगी है. राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और सारण लोकसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी रहीं रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट कर पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल सुनील सिंह ने अपना नॉमिनेशन भी कर दिया है.
सुनील सिंह के विरोध में लालू की बेटी रोहिणी आचार्य : रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' पर पोस्ट में किसी का नाम लिए बिना लिखा कि ''गुटबाजी, भीतरघात, विश्वासघात और विरोधियों से मिलीभगत" रखने वाले व्यक्ति को आखिर किस आधार पर उम्मीदवार बना दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं और अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हैं.
गुटबाजी - भीतरघात - विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत , नजदीकियों की बात बता कर उगाही - वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं - पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन - बेटियों के बारे में ओछी -…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) June 8, 2026
'पार्टी के किसी जमीनी कार्यकर्ता को देना चाहिए सीट' : रोहिणी ने आगे लिखा कि पार्टी की स्थापना से लेकर आज तक कई समर्पित, सम्मानित और जमीनी कार्यकर्ता पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की जा रही है. उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले पार्टी हित में नहीं हैं.
''पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित , जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं , यादव , दलित , पिछड़े व् वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ व् युवा लोग हैं, ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है.''- रोहिणी आचार्य, पूर्व लोकसभा उम्मीदवार व लालू यादव की बेटी
रोहिणी के नाम की भी थी चर्चा : राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को सीधे तौर पर सुनील सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, विधान परिषद की इस सीट के लिए रोहिणी आचार्य के नाम की भी चर्चा चल रही थी. उस समय लालू प्रसाद यादव अपनी बीमारी के सिलसिले में सिंगापुर गए हुए थे जहां रोहिणी आचार्य से मुलाकात की थी. माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें विधान परिषद भेज सकती है. हालांकि, लालू यादव के भारत लौटने के बाद समीकरण बदले और अंततः सुनील सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया.
28 जून को खत्म हो रही सुनील सिंह की सदस्यता : सुनील सिंह पहले भी राजद से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं और पार्टी के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है. लेकिन उनकी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद रोहिणी आचार्य की नाराजगी खुलकर सामने आने से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. सुनील सिंह का मौजूदा एमएलसी का कार्यकाल इसी महीने 28 जून को खत्म हो रहा है.
रोहिणी के पोस्ट से आरजेडी में स्थिति असहज : हालांकि, राजद की ओर से अब तक रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह नाराजगी आगे बढ़ती है तो आगामी चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा हो सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि सुनील सिंह ने अपनी अगली उम्मीदवारी के लिए नॉमिनेशन भी फाइल कर दिया है.
खत्म नहीं हुआ आरजेडी में मतभेद : रोहिणी आचार्य के इस सार्वजनिक विरोध ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि उम्मीदवार चयन को लेकर राजद के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और सुनील सिंह की उम्मीदवारी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देता है.
जब सुनील सिंह पर भड़कीं थीं रोहिणी : रोहिणी आचार्य जब सारण से लोकसभा चुनाव लड़ रहीं थीं तो सुनील सिंह ने रोहिणी का सामने से बड़ा सपोर्ट किया था, लेकिन पीछे से उनके पैर खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी. रोहिणी इस वजह से भी सुनील सिंह से काफी नाराज चल रही थीं. सुनील सिंह ने खुले मंच से रोहिणी आचार्य को हराने की बात कही थी. लेकिन उसे सुनील सिंह द्वारा जुबान फिसलना बताया था.
सुनील सिंह की जीत के लिए जरूरी वोट: अब आरजेडी से सुनील सिंह एमएलसी उम्मीदवार हैं तो उनका निर्विरोध जीतना तय है. लेकिन अगर चुनाव की स्थिति बनी तो बिहार विधान परिषद चुनाव में विधानसभा कोटे की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 25 विधायकों (MLAs) के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है. ऐसे में RJD के पास पर्याप्त संख्या बल है. लालू यादव की RJD के पास बिहार विधानसभा में 25 से कहीं अधिक विधायकों की संख्या है. आरजेडी अपने दम पर एक सीट आसानी से जिता सकती है.
सुनील सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय : हालाकि 10 सीटों पर हो रहे विधान परिषद चुनाव में सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है क्योंकि एनडीए की तरफ से 9 उम्मीदवार (10वीं सीट के लिए दीपक प्रकाश का सस्पेंस है. अभी तक नॉमिनेशन नहीं किया है.) और आरजेडी का 1 कुल 10 सीटें हैं. ऐसे में दीपक प्रकाश अगर नॉमिनेशन नहीं करते हैं तो सभी का निर्विरोध चुना जाना तय है. सुनील सिंह आसानी से दोनों स्थितियों में जीतकर आ सकते हैं.
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