अलवर का बाला किला : 8 महीने से टूटी पड़ी है सड़क, पर्यटन को लगा बड़ा झटका
बाला किला के लिए जाने वाली सड़क पिछले वर्ष मानसून शुरू होने से पहले ढह गई, जो अभी तक ठीक नहीं हो पाई है.

Published : February 20, 2026 at 8:35 PM IST
अलवर: जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के दावे भले ही जोरों पर हों, लेकिन हकीकत यह है कि अलवर शहर के समीप प्रतापबंध से बाला किला जाने वाला मार्ग पिछले 8 महीने से क्षतिग्रस्त है. इस कारण पर्यटक अलवर के ऐतिहासिक बाला किला, वेपन म्यूजियम एवं टाइगर सफारी का आनंद लेने से वंचित हैं. खास बात यह है कि मार्ग पर करीब 50 मीटर लंबाई में सड़क पिछले वर्ष मानसून शुरू होने से पहले ढह गई, जो अभी तक ठीक नहीं हो पाई है. तभी से यह मार्ग पर्यटकों के लिए बंद है.
हालांकि, पिछले वर्ष नवरात्र के दौरान नौ दिनों के लिए यह क्षतिग्रस्त मार्ग केवल पैदल यात्रियों के लिए खोला गया था. सार्वजनिक निर्माण विभाग ने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के लिए डीपीआर तैयार कराई है, जिसे अब अनुमति के लिए अतिरिक्त मुख्य अभियंता को भेजा जाएगा. यदि इस प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आई, तो भी सड़क के पूरी तरह ठीक होकर पर्यटकों के लिए खुलने में अभी चार से छह महीने का समय लगने की संभावना है.
ऐतिहासिक बाला किला अलवर शहर का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और यहां बना वेपन म्यूजियम प्रदेश में इकलौता होने के कारण पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है. इतना ही नहीं, बाला किला पहाड़ी क्षेत्र टाइगर रिजर्व सरिस्का के बफर जोन का हिस्सा है, जहां पर्यटकों को सफारी की सुविधा भी उपलब्ध है. इस कारण अलवर शहर के समीपवर्ती यह पहाड़ी क्षेत्र पर्यटकों के लिए हमेशा से खास आकर्षण रहा है, लेकिन अलवर शहर से बाला किला को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा ढह जाने से यह पर्यटन जोन पर्यटकों से दूर हो गया है.
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सड़क ढहने से मार्ग पर आवाजाही रोकी गई: शहर के समीप प्रतापबंध से बाला किला जाने वाला यह मार्ग 2025 में मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. उस दौरान बारिश के बाद सड़क का यह हिस्सा अचानक ढह गया था. सड़क के नीचे गहरी खाई होने के कारण यहां वाहनों की आवाजाही संभव नहीं है. किसी भी हादसे से बचने के लिए प्रशासन ने इस मार्ग को करीब आठ माह पहले आम जनता व पर्यटकों के लिए बंद कर दिया था. इस कारण पर्यटक न तो बाला किला पहुंच पा रहे हैं और न ही वेपन म्यूजियम में रखे ऐतिहासिक हथियार देख पा रहे हैं. इतना ही नहीं, सरिस्का के बफर जोन का सफारी रूट होने के बाद भी यहां टाइगर सफारी पर पाबंदी लगी हुई है, जिससे पर्यटक टाइगर के दर्शन से भी वंचित हैं. इसके अलावा बाला किला क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल हैं, वहां भी लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं.
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सड़क के एक हिस्से की मरम्मत को चाहिए एक साल: पीडब्ल्यूडी विभाग को प्रतापबंध से बाला किला रोड पर करीब 50 मीटर में सड़क की मरम्मत करनी है, लेकिन विभाग अब तक सड़क की मरम्मत नहीं करा पाया है, जबकि सड़क ढहने की घटना को करीब आठ महीने का समय हो चुका है. इतने लंबे अंतराल के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग कंसल्टेंसी फर्म से सड़क मरम्मत की डीपीआर तैयार करा पाया है. अभी इस डीपीआर को मंजूरी के लिए विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता के पास भेजा जाएगा, वहां से अनुमति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया व निर्माण कार्य शुरू होने में समय लगना तय है. यानी इस मार्ग के पूरी तरह ठीक होने में अभी चार से छह महीने का समय और लगने की संभावना है. तब तक बाला किला क्षेत्र में पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति मिलने का इंतजार रहेगा.
केवल नवरात्र में पैदल यात्रियों को दी गई थी अनुमति: बाला किला क्षेत्र में ऐतिहासिक करणी माता का मंदिर है और यहां हर साल नवरात्र में नौ दिनों तक लख्खी मेला भरता है. पिछले साल सड़क के क्षतिग्रस्त होने के बाद नवरात्र में नौ दिनों के लिए केवल पैदल यात्रियों को दिन के समय आने-जाने की अनुमति दी गई थी. इसके बाद इस मार्ग पर लोगों की आवाजाही फिर से रोक दी गई थी, जो अब तक बंद है. आगामी दिनों में नवरात्र शुरू होने वाले हैं, ऐसे में लोगों को इंतजार है कि इस बार भी करणी माता मंदिर जाने के लिए पैदल यात्रियों को अनुमति मिल पाएगी या नहीं.
इंजीनियर बोले, चल रही है प्रक्रिया: पीडब्ल्यूडी विभाग के अधीक्षण अभियंता (एसई) भुरी सिंह ने बताया कि प्रतापबंध से बाला किला सड़क मार्ग की साइड की दीवार के साथ सड़क का कुछ हिस्सा गिरा था, जिसके लिए कंसल्टेंसी विभाग की ओर से लगाई गई है. उन्होंने बताया कि यह विशेष कार्य है, जिसके लिए डीपीआर तैयार करवाई गई है. डीपीआर को अनुमति के लिए अतिरिक्त मुख्य अभियंता के पास भेजा जाएगा. वहां से स्वीकृति मिलने के बाद करीब चार से छह माह में यह मार्ग पूरी तरह से तैयार हो सकेगा. उन्होंने बताया कि इसके लिए 5.79 करोड़ रुपए का बजट दिया गया था. एसई सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व के अधीन आता है, जहां बाघों का भी मूवमेंट है. इसलिए कार्य के दौरान वन विभाग की सुरक्षा मापदंडों का पालन करते हुए काम कराया जाएगा.

