आजादी के 77 साल बाद भी ग्रामीणों को सड़क का इंतजार , आपातस्थिति में गांव तक नहीं पहुंचती एंबुलेंस
महासमुंद के पिथौरा के कंचनपुर और पिपरौद गांव में ग्रामीण आज भी सड़क की सुविधा से वंचित हैं.ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 24, 2026 at 4:56 PM IST
महासमुंद : आजादी के 77 साल बाद भी पिथौरा के कंचनपुर और पिपरौद के ग्रामीण सड़क की सुविधा से वंचित हैं. आजादी के 7 दशक बाद भी इस गांव के लोगों को सड़क नसीब नहीं हो सकी है. महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लॉक में वन कक्ष क्रमांक 256 पिपरौद और कंचनपुर वन कक्ष क्रमांक 287 में सड़क की समस्या है. यहां रहने वाले ग्रामीण कई वर्षो से जिला प्रशासन सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सड़क की मांग कर रहे हैं.लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं की जा सकी है.
गांव तक नहीं पहुंचती है एंबुलेंस
ग्रामीणों के अनुसार यहां रहने वाले परिवार के किसी सदस्य की तबीयत यदि खराब हो जाती है तो आपात स्थिति में गांव तक इमरजेंसी वाहन नहीं पहुंच सकता. जिसके कारण मरीज की तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है.
शासकीय हाईस्कूल सांकरा एवं कॉलेज के लिए पिथौरा भी जाना रहता तो इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है जिससे उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. पूरा रास्ता गड्ढों से भरा पड़ा है जहाँ कदम -कदम पर ग्रामीणों को जान का खतरा भी बना रहता है- कुमार, ग्रामीण
बारिश के दिनों में बढ़ जाती है समस्या
गर्मी के दिनों में कच्चा रास्ता थोड़ा बहुत चलने लायक रहता है.लेकिन बारिश के मौसम में सड़क पूरी तरह से कीचड़ में सराबोर हो जाता है. तब ग्रामीणों की समस्या पहले से भी ज्यादा बढ़ जाती है.क्योंकि मार्ग में कीचड़ भर जाने से ग्रामीणों को 14 से 15 किलोमीटर दूर घूमकर रास्ता तय करना पड़ता है.
हम लोग कच्ची सड़क का इस्तेमाल आवागमन के लिए करते हैं.गर्मी और ठंड में कच्ची सड़क पर आवागमन होता है.लेकिन बारिश में सड़क का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद हो जाता है- खीरसागर दास,ग्रामीण

आपको बता दें कि बारिकपाली , पंडरीपानी , कंचनपुर से पिपरौद और कंचनपुर से पौसराडिपा तक सड़क बनती है तो यहां के ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी.वहीं इस पूरे मामले में कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्या के समाधान की बात कही है.
मीडिया के माध्यम से ग्रामीणों की समस्या के बारे में जानकारी मिली है.स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट मंगवाकर ग्रामीणों के लिए सड़क की व्यवस्था की जाएगी.यदि सड़क निर्माण के लिए राज्य शासन से सहायता मांगनी पड़ी तो वो भी किया जाएगा- विनय कुमार लंगेह, कलेक्टर
आपको बता दें कि कुछ समय पहले ग्रामीणों की मांग पर सड़क निर्माण के लिए 80 लाख की लागत से इस्टीमेट बनाया गया था. लेकिन ये काम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया.लेकिन इस बार कलेक्टर के आश्वासन के बाद ग्रामीणों की उम्मीदें फिर से जागी हैं.
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