'जिनका एनकाउंटर हुआ, क्या वे देश के लिए मरे..?' भरत तिवारी मुठभेड़ पर 'फारवर्ड' राजनीति से भड़के भाई वीरेंद्र
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने जातीय राजनीति का आरोप लगाते हुए सभी पुलिस मुठभेड़ों की जांच मांगी.

Published : June 25, 2026 at 1:51 PM IST
पटना : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र ने इस मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है और बिहार में अब तक हुए सभी पुलिस एनकाउंटर की जांच कराने की मांग की है.
फॉरवर्ड, दलित और अल्पसंख्यक मामलों पर उठाए सवाल : भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में जब किसी फॉरवर्ड समाज के व्यक्ति का एनकाउंटर होता है तो उसे शहीद का दर्जा देने की मांग शुरू हो जाती है. वहीं, यदि किसी दलित व्यक्ति का एनकाउंटर होता है तो उसे नक्सलवाद से जोड़ दिया जाता है और अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के एनकाउंटर को आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता है.
नेताओं की मौजूदगी पर राजद विधायक का सवाल : राजद विधायक ने कहा कि दलितों के एनकाउंटर के बाद कितने बड़े नेता मौके पर पहुंचते हैं, यह सबको देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद कई नेता उनके गांव और परिवार के पास पहुंच रहे हैं तथा शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं.
जातिवाद और राजनीति का लगाया आरोप : भाई वीरेंद्र ने इस पूरे मामले को राजनीति और जातिवाद से जोड़ते हुए कहा कि यह समाज के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी भी एनकाउंटर को जाति और राजनीतिक लाभ के आधार पर अलग अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
एनडीए सरकार के दौर के मामलों का जिक्र : उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के दौरान दलितों के भी एनकाउंटर हुए, लेकिन उस समय कोई बड़ा नेता वहां नहीं पहुंचा. ऐसे मामलों को नक्सलवाद से जोड़ दिया गया. वहीं, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के एनकाउंटर को आतंकवाद से जोड़कर पेश किया जाता रहा है.

सभी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग : भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में अब तक पुलिस द्वारा किए गए सभी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि राज्य में हुए अधिकांश एनकाउंटर फर्जी हैं और सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए.
''एनडीए सरकार में पिछड़ों का एनकाउंटर होता है तो उसे बहुत बड़ा क्रिमिनल बताया जाता है. दलितों का एनकाउंटर होता है तो उसे नक्सलियों से जोड़ा जाता है, वही जब अकीलियत का एनकाउंटर होता है तो उसे आतंकी बताया जाता है...जिनका हाल के समय में एनकाउंटर हुआ है क्या वो लोग देश के लिए मरे हैं क्या? ये जो आज हाय तौबा मचाए हुए हैं उनको अपनी गिरेबां में झांके, बिहार में जितना भी फेक एनकाउंटर हुआ है सरकार से मेरी मांग है कि उनकी जांच होनी चाहिए.''- भाई वीरेन्द्र, आरजेडी विधायक

जांच से सामने आएगा सच- भाई वीरेंद्र : उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी सामने आएगा तथा दोषियों पर कार्रवाई हो सकेगी. भाई वीरेंद्र ने कहा कि सरकार को किसी एक मामले तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी एनकाउंटर मामलों की जांच करानी चाहिए.
भरत तिवारी मामले को लेकर राजनीति का आरोप : राजद विधायक ने कहा कि भरत तिवारी फॉरवर्ड समाज से आते थे, इसलिए उनके एनकाउंटर को लेकर बड़े स्तर पर राजनीति हो रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी दलित या अल्पसंख्यक व्यक्ति के साथ ऐसी घटना होती है तो उसे अलग नजरिए से क्यों देखा जाता है.
एनकाउंटर विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल : कुल मिलाकर, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने बिहार की राजनीति को गर्म कर दिया है. राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बयान के बाद पुलिस एनकाउंटर की जांच और जातीय आधार पर राजनीति का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
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