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रिम्स बनाए अपनी नियमावली, NCST सदस्य डॉ. आशा लकड़ा बोलीं, सरकार पर निर्भरता की जरूरत नहीं

NCST सदस्य आशा लकड़ा ने रिम्स की समीक्षा की और प्रबंधन को निर्देश दिए कि स्वायत्त संस्था होने के कारण अपनी नियमावली स्वयं बनाए.

RIMS
बैठक के दौरान डॉ. आशा लकड़ा और अन्य अधिकारी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : July 7, 2026 at 8:47 PM IST

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रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग यानी NCST की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मंगलवार को राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए प्रबंधन को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि रिम्स एक स्वायत्त संस्था है, इसलिए उसे अपनी नियमावली स्वयं बनानी चाहिए. जानकारी के अभाव में रिम्स अब तक सरकार पर निर्भर रहा है, जिससे कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हुई हैं.

स्वायत्त संस्था होने के अनुरूप काम करने का निर्देश

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि रिम्स को ऑटोनॉमस बॉडी इसलिए बनाया गया है ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें और समस्याओं का समय पर समाधान हो. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से मिलने वाली सुविधाएं मिलती रहेंगी, लेकिन आंतरिक नियम और प्रक्रियाएं रिम्स को स्वयं तय करनी होंगी. उन्होंने प्रबंधन को जल्द अपनी नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया.

रोस्टर सिस्टम और आरक्षण व्यवस्था पर विशेष जोर

समीक्षा के दौरान आयोग की सदस्य ने डॉक्टरों, प्रोफेसरों, जूनियर डॉक्टरों और एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्ति, पदोन्नति और बैकलॉग भर्ती की प्रक्रिया की समीक्षा की. उन्होंने सभी श्रेणियों के लिए अलग-अलग रोस्टर तैयार करने और उसे ऑनलाइन करने का निर्देश दिया. उन्होंने पूछा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित 26 प्रतिशत आरक्षण का पालन हुआ है या नहीं. साथ ही स्पष्ट किया कि यदि कोई अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी में चयनित होता है तो अनुसूचित जनजाति का आरक्षित पद उसी वर्ग के दूसरे अभ्यर्थी से भरा जाना चाहिए.

ग्रिवांस सेल और लायजन ऑफिसर की भूमिका हो मजबूत

डॉ. लकड़ा ने कहा कि हर विभाग में लायजन ऑफिसर व्यवस्था की रीढ़ होते हैं, इसलिए उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. उन्होंने रिम्स में आरक्षित वर्गों के मामलों के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल सेल और एक स्थायी समिति गठित करने का सुझाव दिया. इस समिति में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, महिला प्रतिनिधि समेत 10 से 12 सदस्य शामिल हों, ताकि शिकायतों का समाधान संस्थान स्तर पर ही हो सके.

मरीजों की सुविधा और सूचना व्यवस्था सुधारने के निर्देश

डॉ. लकड़ा ने कहा कि झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छोटानागपुर क्षेत्र से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए रिम्स आते हैं. इसे देखते हुए ओपीडी में हिंदी में डिस्प्ले की व्यवस्था सुनिश्चित करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी सप्ताहभर पहले समाचार पत्रों में प्रकाशित कराने का निर्देश दिया. उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं में जहां भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने पर जोर दिया.

सुरक्षा व्यवस्था की सराहना, नर्सों के प्रशिक्षण पर भी जोर

रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए डॉ. लकड़ा ने कहा कि सुरक्षा गार्डों को प्रशिक्षण दिए जाने से व्यवस्था मजबूत हुई है. हालांकि अस्पताल में होने वाली घटनाओं को देखते हुए उन्होंने नियमित प्रशिक्षण प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया. साथ ही नई नियुक्त नर्सों के लिए मरीजों और उनके परिजनों के प्रति व्यवहार संबंधी क्षमता विकास (कैपेसिटी बिल्डिंग) कार्यक्रम चलाने पर भी बल दिया.

शिकायतों की समीक्षा, निदेशक के साथ हो बैठक

आयोग की सदस्य ने निर्देश दिया कि आंतरिक शिकायतों की समीक्षा के लिए प्रत्येक तीन माह में बैठक आयोजित की जाए. वहीं निदेशक स्तर पर प्रत्येक छह माह में समीक्षा बैठक कर यह सुनिश्चित किया जाए कि रोस्टर, आरक्षण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन हो तथा भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें सामने न आएं.

बैठक में आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, लीगल सलाहकार शुभाशीष सोरेन और राहुल यादव, रिम्स के निदेशक, अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.

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