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रिम्स का क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में फैकल्टी की गंभीर कमी, मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीद पर पानी

आंख की बीमारी के लिए तैयार रिम्स का RIO डिपार्टमेंट डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है.

RIMS Regional Eye Institute
आंखों का इलाज कराता मरीज (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 5, 2026 at 5:17 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट: उपेंद्र कुमार

रांची: राजधानी रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) परिसर में झारखंड की बड़ी आबादी को गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (Regional Institute of Ophthalmology - RIO) आज प्रबंधन की अदूरदर्शिता का शिकार बनता नजर आ रहा है.

11 साल बाद पूरा हुआ भवन, लेकिन डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा संस्थान

2014 में भवन निर्माण शुरू हुआ था, जो देरी के कारण 2025 में पूरा हुआ. जनवरी 2026 से नेत्र रोग विभाग मुख्य भवन से शिफ्ट होकर इस आधुनिक भवन में संचालित हो रहा है. निर्माण में लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत आई, जबकि अन्य खर्चों को मिलाकर कुल राशि 100 करोड़ से अधिक बताई जा रही है.

डॉ सुनील कुमार का बयान (ETV Bharat)

जनता की गाढ़ी कमाई से बने इस भवन में अब आंखों से जुड़ी कई एडवांस सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे कॉर्निया ट्रांसप्लांट, रेटिना सर्जरी, ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) का इलाज आदि. संस्थान के प्रमुख प्रो. डॉ. सुनील कुमार के अनुसार, यहां रोजाना ओपीडी में 200 से अधिक नेत्र रोगी पहुंच रहे हैं, और मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है.

आवश्यकता के मुकाबले सिर्फ तीन सीनियर डॉक्टर

क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को एक उच्च स्तरीय संस्थान के रूप में विकसित करने का लक्ष्य था, लेकिन फैकल्टी की कमी ने इसे प्रभावित किया है. डॉ सुनील कुमार ने बताया कि जिस क्षेत्रीय नेत्र संस्थान(Regional Institute Of Ophthalmology) में कम से कम 04 प्रोफेसर होने चाहिए थे, वहां सिर्फ एक प्रोफेसर के बल पर पूरा संस्थान चल रहा है, इसी तरह 06 एडिशनल प्रोफेसर की जगह क्षेत्रीय नेत्र संस्थान ने 01 एडिशनल प्रोफेसर और 08 एसोसिएट प्रोफेसर की जगह भी मात्र 01 एसोसिएट प्रोफेसर हैं.

RIMS Regional Eye Institute
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (ETV Bharat)

कुल मिलाकर कहें तो क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में आने वाले नेत्र रोग के मरीजों को बेहतरीन इलाज के लिए जहां कुल मिलाकर 18 प्रोफेसर, एडिशनल प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर होने चाहिए थे, वहां इनकी कुल संख्या सिर्फ तीन है. इसी तरह किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को 24*7 चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीनियर रेजिडेंट भी RIO में जरूरत से काफी कम है. रिम्स के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में कम से कम 10 सीनियर रेजिडेंट होने चाहिए लेकिन वर्तमान में किसी तरह 04 सीनियर रेजिडेंट के भरोसे काम चलाया जा रहा है. कुल मिलाकर, जहां 18 प्रोफेसर/एडिशनल/एसोसिएट प्रोफेसर होने चाहिए थे, वहां मात्र 3 हैं.

प्रक्रिया जारी, लेकिन मरीज प्रभावित

संस्थान प्रमुख प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि फैकल्टी की कमी दूर करने की कोशिश जारी है. नए चिकित्सकों की नियुक्ति से न केवल कमी पूरी होगी, बल्कि इलाज की गुणवत्ता भी बढ़ेगी. वे जल्द ही कई विशेषज्ञ सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहे हैं.

पीजी सीटों की मान्यता पर खतरा

फैकल्टी की यह कमी नेत्र रोग विभाग की पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) की 8 सीटों की मान्यता पर भी संकट मंडरा रहा है. नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) की इंस्पेक्शन में यदि कमी पाई गई, तो सीटों पर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि पीजी सीटों की संख्या विभागीय फैकल्टी पर निर्भर करती है.

RIMS प्रबंधन की ओर से फैकल्टी भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मरीजों को अभी बेहतर और समयबद्ध इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. राज्य के सबसे बड़े सरकारी नेत्र संस्थान को जल्द मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को वास्तविक लाभ मिल सके.

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