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कहीं रंग बेरंग न कर दे आपकी त्वचा और आंखें! जानें, क्या है रिम्स के विशेषज्ञों की सलाह

होली की खुशियां लापरवाही की भेंट न चढ़ जाए. इसलिए अपनी त्वचा और आंखों का विशेष ध्यान रखें. जानें, क्या कहते हैं रिम्स के विशेषज्ञ.

RIMS expert advice on care of skin and eyes for Holi colours in Ranchi
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 2, 2026 at 6:30 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट- उपेंद्र कुमार.

रांची: रंगों का त्योहार होली प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का त्योहार है. रंग-गुलाल से सबको एक रंग में रंगने वाले इस त्योहार की खुशियां बनीं रहे. इसके लिए रिम्स के त्वचा रोग और नेत्र रोग विभाग के एचओडी ने राज्यवासियों के लिए खास सलाह दी है.

रंग-गुलाल के इस त्योहार में कहीं रंग खेलने के दौरान जरा सी लापरवाही कहीं होली की खुशियां फीकी न कर दें. इसके लिए बहुत जरूरी है कि हम कुछ सावधानियां बरत कर इससे पार पार सकते हैं. रिम्स के त्वचा, एसटीडी और यौन रोग विशेषज्ञ डॉ प्रभात कुमार और नेत्र रोग विभाग के हेड डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि कैसे छोटी-छोटी सावधानियां बरत कर हम रंगभरी होली को खुशियों भरी होली के रूप में मन सकते हैं.

रिम्स के त्वचा रोग विभाग के हेड. डॉ प्रभात कुमार ने लोगों को सावधानीपूर्ण होली मनाने का संदेश दिया. साथ ही कहा कि बाजार में बिकने वाले रंग खासकर रसायन युक्त हानिकारक और इंडस्ट्रियल यूज़ वाले रंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है. डॉ. प्रभात कुमार कहते हैं कि होली खेलें लेकिन समझदारी के साथ. बाजार में बिकने वाले कई सस्ते रंगों में खतरनाक रसायन हो सकते हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है. डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार होली के रंगों में सीसा, क्रोमियम, कॉपर सल्फेट जैसे तत्व पाए जा सकते हैं, ये रसायन त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं और एलर्जी को ट्रिगर करते हैं.

होली के रंगों को लेकर रिम्स के विशेषज्ञों की सलाह (ETV Bharat)

रंग को ज्यादा देर तक त्वचा पर न रहने दें, जिद्दी रंग से जिद भी ठीक नहीं- डॉ प्रभात

रिम्स के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात कुमार कहते हैं कि सबसे अच्छा है कि सूखी होली खेलें, मनभावन पकवान खाएं और खुशियां मनाएं. उन्होंने कहा कि अगर रंग लगने के बाद त्वचा में तेज खुजली और जलन के साथ साथ लाल चकते और सूजन हो या पहले से ही स्किन की किसी तरह की बीमारी जैसे एलर्जिक डर्मेटाइटिस, एक्जिमा हो तो इस होली से रंग को अलविदा कहने का वक्त आ गया है. डॉ. प्रभात कहते हैं कि रंग से त्वचा का रूखापन और दाग बताते हैं कि संवेदनशील त्वचा वाले लोग, बच्चे और बुजुर्ग विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

चिकित्सक कहते हैं कि रंग खेलने से पहले शरीर में नारियल तेल क्या कोई लुब्रिकेंट को पूरे शरीर पर लगाकर होली खेलें. डॉ प्रभात बताते हैं कि मॉइस्चराइजर की मोटी परत लगाने, होली खेलने के लिए घर से निकलते समय फुल बाहीं वाले शर्ट पहने, हर्बल या फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें और सबसे जरूरी सूखी और गुलाल वाली होली खेलें. इससे पानी भी बचेगा और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. डॉ प्रभात कहते हैं कि शरीर पर ज्यादा देर रंग नहीं रहने दें और रंग हटाते समय त्वचा को ज्यादा न रगड़ें, माइल्ड साबुन का प्रयोग करें. अगर एक बार नहाने से रंग न हटे तो बार बार रगड़कर रंग साफ करने की कोशिश त्वचा को डैमेज कर सकता है.

आंखें हैं सबसे ज्यादा संवेदनशील- डॉ. सुनील कुमार

नेत्र रोग विशेषज्ञ और रिम्स के नेत्र रोग विभाग के हेड डॉ. सुनील कुमार के मुताबिक रंगों में मौजूद केमिकल आंखों की कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकते हैं. रंग खेलते समय आंखों को बचाना बेहद जरूरी है, रंग आंखों में न जाएं, इसका ख्याल रखें. आंख में रंग जाने से रौशनी जाने का भी खतरा बना रहता है. जब भी आंख में रंग चली जाए तो आंखों को रगड़ें नहीं बल्कि साफ और नोर्मल पानी का छींटे मारकर आंखों को धोएं. अगर फिर भी आंख में तेज जलन और चुभन हो, आंखें लाल हो जाये और उससे पानी आना जारी रहे तो बिना समय गंवाएं विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें. पक्के रंग, पोटीन और ग्रीस वाले रंगों से बचेंं. वहीं रंग को हटाने के लिए पेट्रोल, केरोसिन या डिटर्जेंट से रंग हटाने की कोशिश न करें, छोटे बच्चों के चेहरे पर जबरन रंग न लगाएं. रंगों से एलर्जी होने पर घरेलू नुस्खों या नीम-हकीम के चक्कर में पड़कर समय और पैसा बर्बाद न करें. निकट के सरकारी अस्पताल में जाकर तुरंत डॉक्टर्स की सलाह लेकर इलाज शुरू कर दें.

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