राजस्व अधिकारी बन पहुंची बेटी तो देखते ही छलक पड़े पिता के आंसू, झूम उठा गांव
रिचा कुमारी ने 70वीं बीपीएससी में 984वां रैंक हासिल किया. राजस्व अधिकारी बनकर वैशाली की बेटियों के लिए नई प्रेरणा बनी. पढ़ें खबर-

Published : June 26, 2026 at 2:13 PM IST
वैशाली: बिहार के वैशाली जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर पटेढ़ी बेलसर प्रखंड के साईन पंचायत अंतर्गत बेदौलिया गांव में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई जब गांव की बेटी रिचा कुमारी अधिकारी बनकर घर पहुंची. किसान अजय कुमार सिंह और गृहिणी सुनंदा देवी की पुत्री रिचा ने 70वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 984वीं रैंक हासिल कर राजस्व अधिकारी पद प्राप्त किया है.
भव्य स्वागत और फूलों की बारिश: रिचा के गांव पहुंचते ही बैंड-बाजे की धुन गूंज उठी और फूलों की बारिश होने लगी. गांववासियों ने उनका भव्य स्वागत किया और फूल-मालाओं से लाद दिया. परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने. पूरे गांव में खुशी का माहौल छाया हुआ है.
कठिन परिस्थितियों में हासिल की सफलता: ग्रामीण परिवेश और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद रिचा ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया. उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता के अटूट विश्वास, गुरुजनों के मार्गदर्शन और लगातार कड़ी मेहनत को दिया. रिचा का कहना है कि आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम ही सफलता की असली कुंजी है.
"मैं अपने सफलता का श्रेय माता-पिता के विश्वास, गुरुजनों के मार्गदर्शन और अपने कठिन परिश्रम को देना चाहती हूं. मेरे पिता ने किसान होने के बावजूद मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने दी. मैंने सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई की है. लगातार मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता जरूर मिलती है." -रिचा कुमारी, बीपीएससी उत्तीर्ण अभ्यर्थी

बेटियों की क्षमता का प्रमाण: रिचा की सफलता ने साबित कर दिया कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं. गांववासियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियां यदि ठान लें तो बड़ी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पा सकती हैं. उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरा बेदौलिया गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण: लोग रिचा को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक बता रहे हैं. उनकी कहानी यह दर्शाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों में अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर नया उत्साह देखा जा रहा है.
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