IAS संतोष वर्मा पर रीवा सांसद का फूटा गुस्सा, बोले-SC वर्ग के होते हुए ST वर्ग का लिया लाभ
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने आईएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग. केन्द्रीय मंत्री को पत्र लिखकर लगाए गंभीर आरोप.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : November 29, 2025 at 8:19 PM IST
रीवा: आईएएस संतोष वर्मा के द्वारा खुले मंच से ब्राह्मण समाज की बेटियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध अब हर तरफ दिखाई दे रहा है. इसके चलते विवादित बयान देने वाले आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा पर अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. रीवा से बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) को पत्र लिखकर संतोष वर्मा के खिलाफ जांच और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने मीडिया को बयान देते हुए कहा कि एससी वर्ग के होते हुए भी उन्होंने एसटी वर्ग का लाभ लिया.
रीवा सांसद ने की कार्रवाई की मांग
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आईएएस संतोष वर्मा ने सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक और जातिगत टिप्पणी कर प्रशासनिक सेवा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में तत्काल विभागीय जांच की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि अधिकारी के खिलाफ पूर्व में दर्ज गंभीर आरोपों के चलते उनकी भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुई पदोन्नति की प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा कर जांच की जाए.
'संतोष वर्मा का बयान जातिगत विद्वेष फैलाने वाला '
सांसद जनार्दन मिश्रा ने इस टिप्पणी को अशोभनीय, अपमानजनक, लैंगिक संवेदनशीलता को ठेस पहुंचाने वाली तथा जातिगत विद्वेष फैलाने वाली करार दिया. उन्होंने लिखा कि "यह बयान प्रधानमंत्री द्वारा संचालित महिला सशक्तिकरण अभियानों के खिलाफ संतोष वर्मा की नकारात्मक मानसिकता तथा उनकी प्रतिबद्धता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है."


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'संतोष वर्मा पूर्व में जा चुके हैं जेल'
सांसद जनार्दन मिश्रा ने पत्र में उल्लेख किया कि "संतोष वर्मा मध्य प्रदेश शासन में अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारी थे लेकिन उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए स्वयं को अनुसूचित जनजाति वर्ग के होने का उल्लेख किया. जिससे उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ.
उनके खिलाफ पूर्व में एक महिला से मारपीट और अश्लील भाषा प्रयोग का प्रकरण न्यायालय में लंबित चल रहा है. जिसमें फर्जी राजीनामा प्रस्तुत करने पर वर्ष 2021 में उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था. यह आपराधिक मामला अभी भी विचाराधीन है. इसके बावजूद वर्मा को आईएएस पदोन्नति दी गई, जिसकी जांच आवश्यक है. उन्होंने 3 बिंदुओं को लेकर भारत सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि इन बिंदुओं पर जांच कराई जाए और सही पाया जाए तो भारतीय प्रशासनिक सेवा के पद से हटाया जाए."

