संशोधित बजट अनुमान: बुनियादी ढांचे और जन सुविधाओं पर दिल्ली सरकार का जोर; मेट्रो, बिजली और सड़कों के लिए बढ़ाया खजाना
दिल्ली सरकार ने अपने खर्च करने के तरीके में बदलाव किया है, जिससे विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है.

Published : January 9, 2026 at 4:47 PM IST
|Updated : January 9, 2026 at 5:11 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने संशोधित बजट अनुमान (रिवाइज्ड एस्टीमेट) जारी कर दिए हैं. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश संशोधित बजट अनुमान में कुल एक लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका ध्यान शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आम लोगों को दी जाने वाली सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर है. इस संशोधित बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार ने अपने खर्च करने के तरीके में बदलाव किया है, जिससे विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है.
पूंजीगत व्यय में बड़ी वृद्धि: विकास की रफ्तार होगी तेज
संशोधित अनुमानों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'कैपिटल बजट' यानी पूंजीगत व्यय में देखा गया है. सरकार ने इसे 28,115 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30,247 करोड़ रुपये कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि सरकार अब पुलों, सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी स्थायी संपत्तियों के निर्माण पर पहले से अधिक खर्च करेगी. वहीं, स्थापना बजट (एस्टेब्लिशमेंट बजट) में भी मामूली वृद्धि की गई है. जो अब 42,150 करोड़ रुपये होगा.

परिवहन और बुनियादी ढांचा: मेट्रो और बसों की सेवा होगी बेहतर
दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है. बजट में मेट्रो के लिए 2,117 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका कुल आवंटन 5,046.66 करोड़ रुपये हो गया है. इससे मेट्रो के नए फेज और विस्तार कार्यों को तेजी मिलेगी. दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बजट में 653 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब यह 3,433 करोड़ रुपये हो गया है.
सड़कों का सुदृढ़ीकरण
प्रदूषण को नियंत्रित करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों की मजबूती हेतु 496 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं. लंबे समय से लंबित बारापुला फेज-III प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की पुरानी देनदारियों को चुकाने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
शिक्षा और स्वास्थ्य : भविष्य की नींव मजबूत
संशोधित बजट में शिक्षा क्षेत्र का हिस्सा 19 फीसद से बढ़ाकर 21 फीसद कर दिया गया है, जो अब कुल 20,702 करोड़ रुपये है. यूनिवर्सिटी के लिए जमीन और फ्लैट खरीदने हेतु बजट को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1,362 करोड़ रुपये कर दिया गया है. शिक्षा के अधिकार के तहत ट्यूशन फीस के लिए लंबित देनदारियों को चुकाने हेतु 140 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं.

आम जनता को राहत: बिजली सब्सिडी और कॉलोनियों का विकास
दिल्ली के मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बिजली सब्सिडी का लाभ जारी रहेगा. सरकार ने 'डिस्कॉम' के माध्यम से दी जाने वाली बिजली सब्सिडी के लिए 400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है, जिससे अब यह आवंटन 4,000 करोड़ रुपये हो गया है. इसके अलावा, अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए भी अच्छी खबर है. इन कॉलोनियों के विकास के लिए बजट को 502 करोड़ से बढ़ाकर 630 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
नगर निगम और जल बोर्ड को भी मिला सहारा
दिल्ली नगर निगम को मिलने वाली सहायता राशि में 1,031 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे निगम का बजट 11,428 करोड़ रुपये पहुंच गया है. इससे सफाई व्यवस्था और स्थानीय विकास कार्यों में सुधार की उम्मीद है. इसी तरह दिल्ली जल बोर्ड को दिए जाने वाले ऋण में 1,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है, ताकि पानी और सीवर से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके. यमुना सफाई के लिए यमुना एक्शन प्लान के तहत राज्य की हिस्सेदारी को 100 करोड़ से बढ़ाकर 280 करोड़ रुपये किया गया है.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, संशोधित बजट 2025-26 यह दर्शाता है कि सरकार राजस्व खर्च को संतुलित करते हुए पूंजीगत निवेश पर अधिक ध्यान दे रही है. चाहे वह मेट्रो का विस्तार हो, सड़कों की मरम्मत हो या शिक्षा और बिजली पर सब्सिडी, इस बजट का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और शहर की आधारभूत संरचना को भविष्य के लिए तैयार करना है.
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