40 साल तक मास्टर साहब ने संवारा बच्चों का भविष्य, अब बंजर भूमि पर उगा रहे सोना
चतरा में एक सेवानिवृत्त शिक्षक बंजर जमीन में जैविक तरीके से मिक्स्ड खेती कर मिसाल पेश की है.

Published : July 4, 2026 at 1:49 PM IST
चतरा: अमूमन लोग सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद आराम की जिंदगी जीना पसंद करते हैं. लेकिन चतरा के प्रतापपुर प्रखंड के रहने वाले 68 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विजय राम चंद्रवंशी ने एक अलग ही राह चुनी है. 40 वर्षों तक ब्लैकबोर्ड पर बच्चों का भविष्य संवारने वाले मास्टर साहब अब खेतों में पसीना बहाकर बंजर भूमि को हरा-भरा बना रहे हैं. उन्होंने सुदूरवर्ती इलाके में जैविक खेती की एक ऐसी दूसरी पाठशाला शुरू की है, जो आज पूरे झारखंड के लिए मिसाल बन चुकी है.
चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत बिरमातकुम गांव के रहने वाले विजय राम चंद्रवंशी साल 2019 में प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए. एमए पास विजय के चारों बेटे सरकारी सेवा में ऊंचे पदों पर हैं. कोई इंजीनियर है तो कोई पुलिस अधिकारी. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. लेकिन रिटायरमेंट के बाद खाली बैठना मास्टर साहब को रास नहीं आया. उन्होंने साल 2025 के अगस्त महीने में कुछ अलग करने की ठानी.
लीज पर लिया 7 एकड़ जमीन
विजय राम चंद्रवंशी ने 7 एकड़ बंजर और झाड़ियों से भरी जमीन को सालाना 2.50 लाख रुपये की लीज पर लिया. जहां कभी लोग जाने से कतराते थे. आज उस पथरीली धरती पर आधुनिक और जैविक तकनीक से फसलों की नई इबारत लिखी जा रही है. मास्टर साहब ने कहा कि नौकरी से पेट भरता है और मिट्टी से आत्मा. रिटायरमेंट के बाद घर बैठकर बीमार होने से अच्छा था कि वे अपनी मातृभूमि की सेवा करूं. उन्होंने कहा कि शारीरिक परिश्रम से उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर समाज को एक संदेश भी दे पा रहे हैं.
मिक्स्ड फार्मिंग का बेहतर प्रदर्शन
मास्टर साहब की इस जैविक पाठशाला में मिक्स्ड फार्मिंग का बेहतरीन नजारा देखने को मिलता है. उन्होंने पश्चिम बंगाल से उन्नत किस्म के पौधे मंगवाकर 3 बीघा में करीब 1000 केले के पौधे लगाए हैं, जिनमें कटाली, सिंगापुरी और सब्जी वाले कच्चे केले शामिल हैं. इसके अलावा पहली बार लगभग 2 बीघा जमीन पर 3000 ड्रैगन फ्रूट (कमलम) के पौधे लगाए गए हैं. साथ ही डेढ़ बीघा में कटहल के 400 पौधे, बारहमासी सहजन (मुनगा), डेढ़ बीघे में मद्रासी प्रजाति का ओल (जिमीकंद), परवल, हल्दी और अदरक की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है.

सोलर पैनल से करते हैं सिंचाई
सिंचाई के लिए यहां ड्रिप इरिगेशन तो नहीं है, लेकिन विजय राम चंद्रवंशी ने पर्यावरण का ख्याल रखते हुए सोलर पैनल संचालित मोटर की व्यवस्था की है. खास बात यह है कि इस खेती में एक भी बूंद रासायनिक खाद का उपयोग नहीं होता. वे जीवामृत, वर्मी कंपोस्ट और गोबर की ताजा खाद खुद तैयार करते हैं. इस पूरे कार्य में बिहार के जहानाबाद के एक प्रशिक्षित कृषि विशेषज्ञ उनके सहयोगी हैं.

विजय राम चंद्रवंशी की इस मुहिम से जहां स्थानीय स्तर पर 8 से 10 ग्रामीणों को रोजगार मिला है, वहीं सालाना 12 से 15 लाख रुपये की आय का रोडमैप तैयार हुआ है. यह मॉडल चतरा से होने वाले पलायन को रोकने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की एक बेहतरीन और जीवंत पाठशाला बन चुका है.
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