66 की उम्र में 75 मेडल,एक रिटायर्ड कर्नल की कामयाबी की नायाब कहानी
साल 2021 से खेलों की दुनिया में हैं सक्रिय, सेना में सेवा के दौरान दुर्गम मोर्चों पर रहे तैनात.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 3:14 PM IST
|Updated : January 12, 2026 at 4:22 PM IST
मेरठ: उम्र 66 साल और जज्बा ऐसा कि युवा भी मात खा जाएं. करीब 35 साल तक सेना में रहकर देश की सेवा की. दुर्गम इलाकों में तैनाती के दौरान शौर्य और साहस की मिसाल पेश की. रिटायर हुए तो खेल की दुनिया में एक के बाद एक कीर्तिमान गढ़ने शुरू कर दिए. सिर्फ 6 साल में 75 से अधिक मेडल विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में अपने नाम कर चुके हैं. यहां बात हो रही है रिटायर कर्नल बिनोद कुमार उज्ज्वल की. उनकी उपलब्धियों का यह सफर यहीं नहीं थमा है, बल्कि तैयारी आगे नए मुकाम हासिल करने की है. आप जानिए, संघर्ष और जुझारुपन से लबरेज कर्नल बिनोद की कहानी.
सेना में साहस की मिसाल: आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद लोगों के जीवन में जड़ता आ जाती है. जैसे जिंदगी का कोई लक्ष्य ही नहीं रहा, लेकिन रिटायर कर्नल बिनोद इसके उलट हैं. रिटायरमेंट के 5 साल बाद 2021 से उन्होंने खुद को एक नए रास्ते पर डाल दिया है. तब से 6 साल बीत चुके हैं और बिनोद के हिस्से में मेडल्स की भरमार है. इससे पहले सेना में सेवा के दौरान भी बिनोद की कहानी कम रोचक नहीं है. बिनोद ने 1979 में भारतीय सेना की सिग्नल कोर ज्वाइन की. फिर कमीशन लिया और एसएसबी में आर्मी केडेट कोर में रहे. सियाचिन इलाके में में ढाई वर्ष तक तैनात रहे. बांदीपुरा में दो और गुरेज घाटी में चौदह आतंकियों को को मार गिराने जैसे मिशन का हिस्सा रहे. तोपखाना (आर्टिलरी ) में रहते हुए गोवा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख में तैनात रहे. बिनोद आर्मी कमांडर कॉमेंडेशन कार्ड से सम्मानित हैं. काराकोरम पास पर तीन बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव हासिल है. ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन कारगिल वार में भी शामिल रहे हैं.

पिता-ताऊ भी आर्मी का हिस्सा रहे: मूलरूप से बागपत के रहने वाले बिनोद के परिवार का सेना से जुड़ाव पुराना है. उनके पिता राम सिंह उज्ज्वल EME Corps में थे. उनका स्वर्गवास हो चुका है. जबकि ताऊ रामचंद्र राजपुताना राइफल्स में थे और द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था. बिनोद जब सिर्फ 6 साल के थे, मां वीरवती का निधन हो गया था. शुरू से ही संघर्ष की राह चलने वाले बिनोद के परिवार को उन पर नाज है. परिवार में पत्नी प्रेमवती उज्जवल, बेटा विनिश और बेटी स्वाति हैं. बेटे-बेटी की शादी हो चुकी है. सैनिक पृष्ठभूमि होने के कारण बिनोद आज भी उतने ही सक्रिय हैं, जितना सेना में रहने के दौरान थे.
ऐसे हुई नए सफर की शुरुआत: बिनोद बताते हैं कि 2015 में वे रिटायर हुए. 2021 में कोरोना काल में खेलों के प्रति उनका रुझान हुआ. उस वक्त उनके एक मित्र ने उन्हें कॉल की और सलाह दी कि खेलना शुरू करो. साथ ही बताया कि वाराणसी में नेशनल गेम्स हो रहे हैं. 60 plus श्रेणी में वे शामिल हो सकते हैं. चूंकि वे शुरू से ही काफी फिट रहे हैं तो उनके दोस्त को भरोसा था कि वे जरूर कामयाब होंगे.

पहले प्रयास में ही कामयाब: जैसी कि उम्मीद थी, बिनोद ने अपनी पहली प्रतियोगिता में सफलता हासिल की. थर्ड नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया. जबकि जेवलिन थ्रो, डिसकस थ्रो और सौ मीटर दौड़ चौथे तो किसी में पांचवे नंबर पर रहे. इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली स्पर्धाओं में भाग लिया और गोल्ड मेडल तक जीता. 2022 में नासिक में उनके घुटने में चोट लग गई, जिस वजह से वहां उनकी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं रही, लेकिन कुछ दिन में स्वस्थ हुए और फिर से अपनी रफ्तार बढ़ाई.

कॉलेज-सेना में भी अच्छा प्रदर्शन: बिनोद बताते हैं, जब पढ़ाई करते थे, तब भी स्पोर्ट्स में अव्वल रहते थे. वॉलीबॉल और क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे. उस समय सौ मीटर दौड़ 11.2 सेकंड में पूरी कर एकेडमी में भी गोल्ड मेडलिस्ट रहे. अगर कॉलेज के दिनों में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में मिले मेडल भी शामिल कर लिए जाएं तो यह संख्या 100 से ऊपर जाती है. सेना में सेवा देते समय भी IMA के Team Captain रहे. 100, 200, 400 मीटर, शॉट पुट समेत गोल्फ, टेनिस, बास्केटबॉल, वालीबाल में गोल्ड मेडल जीते.

फिट रहने का मंत्र: बिनोद की दिनचर्या बिलकुल सधी हुई है. उनके दिन की शुरुआत ही एक्सरसाइज करने से होती है. रोज टहलना और दौड़ना वे नहीं भूलते. इसी के अनुरूप खानपान भी रहता है. अगर मौसम अच्छा नहीं है तो घर में ही एक्सरसाइज करते हैं. बिनोद किसी भी प्रतियोगिता में शामिल होने के एक महीने पहले से अभ्यास शुरू कर देते हैं. कहते हैं, अब 65 प्लस वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे. आज के युवाओं को नसीहत देते हुए कहते हैं, पढ़ाई भी करें और खेलें भी, क्योंकि खेलों पर सरकार भी बहुत ध्यान दे रही है. फायदा ये होगा कि शरीर स्वस्थ रहेगा और दिमाग भी.
आगे का क्या है लक्ष्य: अपने अगले लक्ष्य को लेकर बिनोद बताते हैं, इसी महीने जनवरी में अजमेर में मास्टर्स नेशनल प्रतियोगिता होने जा रही है. वहां वे पार्टिशिपेट करेंगे. मार्च में भोपाल में प्रतियोगिता आयोजित होने वाली है, उसकी भी तैयारी शुरु कर दी है. कहते हैं, घर-परिवार को भी समय देना जरूरी है. ऐसे में देश के बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं में नहीं जा पाते.
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