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बिहार में रिटायर्ड फौजी से 'देशद्रोह' के नाम पर हुई लाखों की ठगी, 'डिजिटल अरेस्ट' कर उड़ाए रुपये

पटना में रिटायर्ड फौजी को 'डिजिटल अरेस्ट' कर ₹3.30 लाख ठगे.10 दिन तक ठगों ने डराकर रखा, पीड़ित ने सदमे में किया आत्महत्या का प्रयास

PATNA DIGITAL ARREST EX ARMY MAN
पटना साइबर थाना (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 9, 2026 at 2:04 PM IST

4 Min Read
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पटना: बिहार की राजधानी पटना से साइबर क्राइम की एक सनसनीखेज खबर सामने आई है. यहां साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड सैन्यकर्मी को 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार बनाकर उनसे लाखों रुपये की ठगी कर ली. ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी और पुलिस अधिकारी बताकर पहले उन्हें देशद्रोह जैसे गंभीर मामले में फंसाने का डर दिखाया, फिर करीब 10 दिनों तक मानसिक दबाव बनाकर 3.30 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए. घटना के बाद पीड़ित गहरे सदमे में चले गए और उन्होंने आत्महत्या का भी प्रयास किया.

बैंक अधिकारी बता कर किया फोन: घटना के बारे में बताया जा रहा है कि पटना के मंदिरी इलाके में रहने वाले रिटायर्ड फौजी को सबसे पहले एक फोन आया. कॉल करने वाले ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक शाखा में खाता संचालित हो रहा है, जिसमें करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है. जब रिटायर्ड फौजी ने ऐसा कोई खाता होने से इनकार किया तो कॉल करने वाले ने कहा कि उन्हें दूसरे अधिकारी से बात कराई जाएगी.

देशद्रोह से जुड़े लेनदेन का दिखाया डर: वहीं कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने पीड़ित को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताया. उसने कहा कि आपके नाम पर बैंक खाता अपराधियों को बेचा गया है और उसी खाते के जरिए देशद्रोह से जुड़े मामलों में लेनदेन हुआ है. इसलिए आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है. ठगों ने इस दौरान पीड़ित के घर की तस्वीरें और पुलिस की वर्दी पहने लोगों की तस्वीरें भी मोबाइल पर भेजीं. इससे रिटायर्ड फौजी को लगा कि वह पुलिस की निगरानी में हैं और मामला बेहद गंभीर है.

10 दिनों तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट': साइबर ठग लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए रिटायर्ड फौजी पर नजर बनाए रहे. उन्हें बार-बार निर्देश दिया गया कि वह किसी से इस मामले की चर्चा न करें. गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह दबाव में रखा गया. इसी दौरान ठगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यदि वह जांच में सहयोग करेंगे तो उन्हें निर्दोष साबित कर दिया जाएगा. डरे हुए पीड़ित ने ठगों के कहने पर अपने बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 3.30 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए. बताया जाता है कि यह राशि उन्होंने परिवार के एक सदस्य की शादी के लिए जमा कर रखी थी.

आत्महत्या का प्रयास: बाद में जब ठगों का संपर्क टूट गया और उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो वह गहरे मानसिक तनाव में आ गए. परिजनों के अनुसार, ठगी की घटना के बाद रिटायर्ड फौजी काफी परेशान रहने लगे. वह कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले और मानसिक रूप से टूट गए. इसी दौरान उन्होंने आत्महत्या का भी प्रयास किया. हालांकि समय रहते परिजनों ने उन्हें बचा लिया. बाद में पूरी घटना की जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को दी गई. इसके बाद उन्हें साइबर ठगी का शिकार होने का एहसास हुआ. जिसके बाद पीड़ित रिटायर्ड फौजी परिजनों के साथ साइबर थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और लेनदेन के आधार पर साइबर अपराधियों की पहचान में जुटी है.

पुलिस की अपील: साइबर अपराधियों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही किसी जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है. यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगने का दबाव बनाए तो तुरंत कॉल काटें, इसकी जानकारी परिवार के लोगों को दें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं.

क्या बोली साइबर पुलिस?: इस मामले में साइबर थाना पुलिस ने बताया कि ''शिकायत मिली है. पीड़ित से पूछताछ के बाद कार्रवाई की जा रही है. साइबर सेल और पुलिस की टीम अपराधियों का पता लगाने में जुट गई है.''

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