नाले का पानी पी रहे पंडो बस्ती के लोग, एमसीबी में सरकारी दावों का निकला दम, पीएचई विभाग के नींद से जागने का इंतजार
सुबह होते ही पानी की तलाश में गांव की महिलाएं और बच्चे बर्तन लेकर जंगल की ओर निकल जाते हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 17, 2026 at 4:30 PM IST
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: सरकार की महत्वाकांक्षी नल जल योजना एमसीबी के ग्राम पंचायत घाघरा पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रही है. क्योंकि यहां के पटपरटोला पंडो बस्ती के लोग आज भी नालों का पानी पीकर खुद को जिंदा रखे हुए हैं. गांव वाले कहते हैं कि सुबह होते ही मर्द जहां खेतों पर काम के लिए निकल जाते हैं, वहीं महिलाएं और बच्चे पानी लाने के लिए नालों पर चले जाते हैं. गांव वालों की मानें तो ये उनकी रोज की दैनिक दिनचर्या है. पटपरटोला पंडो बस्ती में 25 परिवार रहते हैं. गांव की कुल आबादी 80 के करीब है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वो सालों से ढोड़ी (जंगल में बने छोटे जलस्रोतों) का पानी पी रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या उनके लिए नई नहीं है. ये समस्या उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है. गांव वाले बताते हैं कि कई बुजुर्गों ने तो अबतक साफ पानी देखा ही नहीं है.
गांव में लगे खराब हैंडपंप चिढ़ा रहे मुंह
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगाए गए हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हुए हैं. पीएचई विभाग अगर उन हैंडपंपों को सुधार भी देता तो इनकी बड़ी समस्या दूर हो जाती. गांव वाले बताते हैं कि बारिश के दिनों में तो बाहर जाकर पानी लाना जान जोखिम में डालने के बराबर होता है. कई बार जंगली जानवर लोगों पर हमला भी कर देते हैं.

गांव में न बोर है और न ही हैंडपंप. मजबूरी में नाला, ढोड़ी और नदी का पानी पीना पड़ता है. बारिश के बाद पानी और गंदा हो जाता है, जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है: फूल कुंवर पंडो, बुजुर्ग महिला

इस गांव में रहने वाली कई पीढ़ियां इसी पानी पर निर्भर हैं. दूषित पानी पीने से दस्त, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां होती हैं, लेकिन गांव में आज तक कोई सुविधा नहीं पहुंची: आनरकली, ग्रामीण महिला
गंदा पानी पीने से बीमारी का होता है डर
ढोड़ी के पानी का उपयोग पीने के साथ-साथ घरेलू कामों में भी किया जाता है. दूषित पानी के कारण ग्रामीणों में दस्त, उल्टी, खांसी-जुकाम सहित अन्य बीमारियों का खतरा बना रहता है. सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है. पंडो बस्ती के ग्रामीण शासन से इस बात से नाराज हैं कि उनकी शिकायत न तो विभाग सुनता है न स्थानीय जनप्रतिनिधि.
पहले लगा हैंडपंप भी 3-4 साल पहले हटा दिया गया, लेकिन उसके बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. ग्रामीण आज भी पानी के लिए परेशान हैं: हरिलाल पंडो, गांव के बुजुर्ग
पानी के लिए ग्रामीणों को काफी दूर जाना पड़ता है. कई बार सरपंच, सचिव, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आवेदन दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. जंगल पास होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है: मोहन पंडों, ग्रामीण

पंडो विकास समिति ने उठाई आवाज
जनहित संघ अंतर्गत पंडो विकास समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष संवर्त कुमार रूप ने कहा कि पटपरटोला में जल संकट गंभीर समस्या है। ग्रामीण मजबूरी में दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे डायरिया, दस्त और उल्टी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. प्रशासन से जल्द स्वच्छ पेयजल व्यवस्था कराने की मांग की जाएगी.

ढोड़ी का पानी बहुत कम बचता है. कुछ लोगों के पानी लेने के बाद ही जलस्रोत खत्म हो जाता है. जंगल क्षेत्र होने के कारण बाघ और भालू का डर भी बना रहता है: जितेंद्र बैगा, ग्रामीण
विभाग की उदासीनता से ग्रामीणों में नाराजगी
पेयजल संकट को लेकर पीएचई विभाग के एसडीओ जयंत चंदेल से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि विभाग को इस समस्या की पूर्व जानकारी नहीं थी. ग्रामीणों की परेशानी सामने आने के बाद अब स्थल निरीक्षण के लिए हैंडपंप तकनीशियन भेजने की बात कही गई है. वहीं वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों का कहना है कि जानकारी और कार्रवाई के बीच काफी देरी हुई, जिसका खामियाजा उन्हें दूषित पानी पीकर भुगतना पड़ रहा है. अधिकारी ने यह भी बताया कि पुराना हैंडपंप सोलर क्रेड़ा विभाग द्वारा निकाला गया था. ग्रामीणों में नाराजगी है। लंबे समय से समस्या झेल रहे ग्रामीण अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं


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