आरक्षण सुधार आंदोलन ने उठाई पांच प्रमुख मांगें, व्यवस्था में बदलाव की मांग
झारखंड में आरक्षण सुधार आंदोलन ने पांच मांगें रखते हुए कहा कि हमारा मकसद किसी के अधिकारों को खत्म करना नहीं है.चंदन भट्टाचार्य की रिपोर्ट.

Published : August 30, 2026 at 3:51 PM IST
रांचीः आरक्षण व्यवस्था को लेकर झारखंड में आरक्षण सुधार आंदोलन ने पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं. आंदोलनकारियों की ओर से कहा गया है कि इसका मकसद किसी जाति या समुदाय के अधिकार को खत्म करना नहीं, बल्कि आरक्षण और सामाजिक न्याय की व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और जरूरतमंद लोगों के लिए प्रभावी बनाना है.
जरूरी संशोधन की मांग
आंदोलनकारियों की ओर से UGC के 2026 के Equity Regulations की समीक्षा करने की मांग की गई है. उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर किसी भी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. इसके अलावा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी संशोधन की मांग की गई है. आंदोलनकारियों का कहना है कि वास्तविक पीड़ितों को कानून का पूरा संरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के मामलों में भी निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए.
आरक्षण का लाभ सबसे जरूरतमंद तक पहुंचेः आंदोलनकारी
आंदोलनकारियों ने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में मेरिट की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है. IIT, IIM, मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों समेत दूसरे संस्थानों में चयन प्रक्रिया और सीट आवंटन के नियमों को पारदर्शी बनाने की मांग की गई. आंदोलनकारियों का कहना है कि आरक्षण के साथ मेहनत, योग्यता और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी उचित महत्व मिलना चाहिए. वहीं SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने पर विचार करने की मांग की गई है. आंदोलनकारियों का तर्क है कि आरक्षण का लाभ समाज के सबसे जरूरतमंद और वंचित लोगों तक भी प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए.
आरक्षण का लाभ केवल कुछ ही लोगों तक सीमित न रहे
इसके साथ ही ‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ की नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की मांग की गई. आंदोलनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ लगातार कुछ परिवारों तक सीमित न रहे और ऐसे परिवारों को भी मौका मिले, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है.
परीक्षाओं में पारदर्शिता और मेरिट का भी ध्यान रखा जाए
आरक्षण सुधार आंदोलन के सुमित दुबे ने कहा, हमारी मांग किसी का अधिकार छीनने की नहीं है. हम चाहते हैं कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे. इसके साथ ही उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और मेरिट का भी ध्यान रखा जाए. हमारी मांग है कि इन सभी मुद्दों पर संवैधानिक और कानूनी दायरे में व्यापक चर्चा हो और जरूरी सुधार किए जाएं.
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