देवधर नगर निगम में अफसरशाही के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का विरोध प्रदर्शन, कंपनियों की मनमानी पर फूटा गुस्सा
देवघर नगर निगम में अफसरशाही के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन किया.

Published : May 4, 2026 at 6:30 PM IST
देवघर: आमतौर पर नगर निगम की लापरवाही को लेकर आम लोग और निगम कर्मचारी ही धरना प्रदर्शन करते नजर आते थे लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है. अबकी बार जनता या कर्मचारी नहीं बल्कि खुद नगर निगम के वार्ड पार्षद ही धरने पर बैठे हैं. देवघर नगर निगम के गठन के बाद यह शायद पहली बार है जब निगम के जनप्रतिनिधि ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
निगम में अफसरशाही हावी: पार्षद
धरने पर बैठे पार्षद अनुज कुमार का कहना है कि वह 2015 से पार्षद के रूप में जनता के बीच सक्रिय हैं और लगातार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करते रहे हैं, लेकिन 2019 के बाद से नगर निगम की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और अफसरशाही हावी हो गई है.
नई सरकार बनी लेकिन समाधान नहीं
उन्होंने आगे बताया कि 7 साल बाद निगम में जनप्रतिनिधियों की सरकार बनी है, जिससे लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उनके मोहल्लों की समस्याओं का समाधान होगा. फरवरी में नई व्यवस्था बनने के बाद यह उम्मीद और भी बढ़ी थी लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है.
निजी कंपनी को दी गई सफाई की जिम्मेदारी
वहीं पार्षदों का कहना है कि सभी वार्डों में पार्षद चुने जाने के बावजूद साफ-सफाई और जल संकट जैसी बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं. इसी क्रम में सोमवार को धरना-प्रदर्शन में शामिल पार्षद मोहम्मद सरवर ने बताया कि नगर निगम ने सफाई की जिम्मेदारी एमएसडब्ल्यू नाम की कंपनी को दी है लेकिन यह कंपनी पार्षदों के निर्देशों की अनदेखी कर रही है. इसका नतीजा यह है कि मोहल्लों के लोग रोजाना अपनी शिकायतें लेकर पार्षदों के पास पहुंच रहे हैं.
पार्षदों का विरोध जायज: उप महापौर
इसी के चलते पार्षदों ने धरना देने का फैसला किया है ताकि लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर सके. वहीं इस पूरे मामले पर देवघर नगर निगम की उपमहापौर टिप चटर्जी ने भी पार्षदों के विरोध को जायज ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी है, पिछले तीन महीनों से लोग जल संकट और साफ-सफाई की समस्या को लेकर लगातार शिकायत कर रहे थे.
पार्षदों ने नगर आयुक्त तक पहुंचाई समस्या
उन्होंने बताया कि पार्षदों की इन समस्याओं को नगर आयुक्त तक भी पहुंचाया गया है लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. यही वजह है कि आज पार्षदों को धरने पर बैठना पड़ा है.
कंपनी पर मनमानी का आरोप
उपमहापौर ने यह भी कहा कि पार्षदों की समस्याओं और नगर निगम की व्यवस्था को सुधारने के लिए नगर विकास मंत्री से बातचीत की जा रही है. हाल ही में राज्य के नगर विकास मंत्री का देवघर दौरा भी हुआ था, लेकिन व्यस्त कार्यक्रम के कारण पार्षद अपनी समस्याएं उनके सामने नहीं रख पाए. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही मंत्री के सामने पूरी स्थिति रखी जाएगी और जो कंपनियां मनमानी कर रही हैं या अफसरशाही का दुरुपयोग कर रही हैं उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा.
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन वादों और उम्मीदों के साथ पार्षद चुने गए थे, क्या वे पूरे हो पा रहे हैं? अगर नहीं तो आखिर कब तक जनता की समस्याओं का समाधान हो पाएगा? या फिर आने वाले समय में ऐसे विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे?
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