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संत-महंत, मूर्ति और सियासत, राजनीति के धर्म ने धर्म पर राजनीति और सावरकर से लेकर साहू सियासत का मैदान हो गया तैयार

संत और महंत पर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज, दूसरी तरफ तेलीबंधा में सावरकर की मूर्ति लगाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा

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संत-महंत, मूर्ति और सियासत (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 29, 2026 at 6:53 PM IST

12 Min Read
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रायपुर- छत्तीसगढ़ में इस समय नौतपा चल रहा है. गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है. गर्मी के पारे से अर्धशतक लगा रहे तापमान ने राजनीतिक दलों के बयानों वाले थर्मामीटर के सियासी तापमान का पारा चढ़ा दिया है. छत्तीसगढ़ की राजनीति में वर्तमान समय में संत और महंत के बयान से राजनीति के फायदे और नुकसान वाली गुणा गणित के फलसफा जोर से चल निकला है. पहले जोड़ा यह गया था कि संत को लेकर महंत ने ठीक नहीं कहा. अब महंत यह कह रहे हैं कि हमने संत को लेकर कुछ नहीं कहा. लेकिन इन दोनों बयानों के बीच में राजनीति करने वाले लोगों के इतने बयान आ गए की संत और महंत दोनों राजनीति की केंद्र की धुरी बन गए हैं. वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में संत और धर्म के सम्मान अपमान की दुहाई दी जा रही है. क्योंकि महंत अपने बयान पर बने रहे तो कई राजनेताओं को दिक्कत हो जाएगी और संत वाले बयान पर राजनेताओं ने राजनीति नहीं की तो धर्म पर होने वाली राजनीति बेपटरी हो जाएगी. राजनीतिक धर्म के लिए धर्म वाली राजनीति में संत और महंत सियायत में जमे हैं. बात यहीं नहीं रुकी तेलीबंधा में सावरकर की मूर्ति और साहू समाज के नाम वाली सियासत राजनीति के मैदान में मुद्दा बनकर तैयार हो गई.

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संत और महंत पर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मामला क्या है?

छत्तीसगढ़ आए जगदगुरु रामभद्राचार्य को लेकर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने अपने बयान में कहा कि भाजपा के प्रचारक हैं और सिर्फ भाजपा का प्रचार करने आए हैं, ऐसे लोगों को न मैं जगद्गुरु मानता हूं ना राम का गुरु मानता हूं.

जगद्गुरु रामभद्राचार्य का पलटवार

चरणदास महंत के इस बयान के बाद खुद जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बेहद कड़े लहजे में पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता को खुली चुनौती दे डाली है. रामभद्राचार्य ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यदि चरणदास महंत में नेतृत्व की शक्ति और क्षमता है, तो वे सार्वजनिक मंच पर आकर उनके ‘जगत गुरुत्व’ का पूर्ण परीक्षण कर लें, वे हर कसौटी पर खरा उतरने के लिए तैयार हैं. जगद्गुरु ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई उनकी धार्मिक विद्वत्ता और पद को चुनौती दे, यह उन्हें कतई स्वीकार नहीं है.

भूपेश भी मैदान में

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रामभद्राचार्य के बयान पर जवाब दिया. बघेल ने कहा कि संत को सहज रूप से जवाब देना चाहिए था लेकिन वे तिलमिला गए. उन्होंने कहा कि हम सांसारिक लोग है, यदि हमें कोई परेशानी होती है मार्गदर्शन चाहिए होता है तो हम उनकी शरण में जाते हैं. रामभद्राचार्य अपने आप को राष्ट्रीय संत, पद्मविभूषण कह रहे हैं, आज देश में डीजल पेट्रोल की किल्लत है, महंगाई बढ़ रही है. रामभद्राचार्य अपनी दिव्य दृष्टि से देखें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति से क्यों डरते हैं.

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जगदगुरु रामभद्राचार्य पर दिए चरणदास महंत के बयान के बाद सियासत गरमाई (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

बदल गए महंत

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने अपने बयान पर सफाई भी दी और कहा कि मनेंद्रगढ़ में एक सवाल के जवाब में मैंने कहा कि वे भाजपा के प्रचारक हैं इसलिए उनका प्रवचन सुनने नहीं जाएंगे. महंत ने कहा कि साधु संत मेरे लिए पूजनीय है. किसी संत अपमान करने का संस्कार नहीं दिया गया है, बल्कि सभी धर्म, संप्रदाय के संतों का सम्मान करने की ही शिक्षा दी गई है.

डिप्टी सीएम अरुण साव के सवाल

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का सनातन विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आया है. साधु-संतों और महात्माओं के खिलाफ की गई गलत टिप्पणियों को हिन्दू समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि किसी को भी संत महात्माओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है और इस प्रकार के बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं. साव ने कांग्रेस नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो वे किसी अन्य धर्म के संत-महात्माओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करके दिखाएं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की मानसिकता लगातार समाज को आहत करने वाली रही है.

29 मई को वित्त मंत्री मैदान में

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत के बयान को लेकर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों का काम उनका चेहरा जनता जानती है. पांच साल के लिए सत्ता मिली थी. जनता ने अपना भरोसा दिया था. पांच सालों तक इन लोगों ने कोई काम किया ही नहीं. धर्म पर राजनीति और इस तरह की मानसिकता में रहना कांग्रेस के लोगों की आदत है. उन्होंने कहा कि इनके बीच सत्ता को बांटने का समझौता होता है. आधी सियासत के मुखिया आप हैं और उसके बाद का मुखिया मैं रहूंगा. विकास की राजनीति में भी इनका समझौता रहता है. छत्तीसगढ़ की जनता इनको पूरी तरह से समझ चुकी है.

रावण से और गर्मा गई राजनीति

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत के बयान पर धर्म, समाज और कथा आयोजन समितियों ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी. चिरमिरी के हल्दीबाड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने श्रीराम कथा आयोजन समिति द्वारा विरोध सभा आयोजित की गई. सभा में बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी, महिलाएं और आयोजन समिति के सदस्य शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने “महंत मुर्दाबाद” के नारे लगाए और हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया. कई तख्तियों में डॉ. महंत की तस्वीर के साथ “रावण” शब्द लिखकर आक्रोश व्यक्त किया गया. चिरमिरी में हुई इस घटना के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में महंत के विरोध की बात शुरु हो गई. बात सिर्फ विरोध और नारे बाजी तक नहीं रही. धर्म पर टिप्पणी और उसकी राजनीति का परिणाम चुनाव में भी मिलेंगे, कांग्रेस के सियासी साख पर बट्टा लगाने का काम करने लगा.

महंत के पक्ष में उतरी पार्टी

महंत के बयान को लेकर मुखर हुई भाजपा के बाद कांग्रेस महंत के पक्ष में उतर आई, इसे लेकर चरण दास महंत ने जो बातें कही हैं वह सही है. कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने कहा कि रामभद्राचार्य जी का चुनावी एजेंट की तरह भविष्यवाणियां करना कथा के पवित्र मंचों से आएंगे तो मोदी ही जैसे नारे लगाना और भाजपा के लिए 350 से अधिक सीटें आने का दावा करना किसी संत का कार्य नहीं, बल्कि किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की भाषा है.

सितंबर 2025- मेरठ की कथा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को मिनी पाकिस्तान कहना. वोटों के ध्रुवीकरण और भाजपा को चुनावी फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से एक पूजनीय संत के मुख से ऐसे सांप्रदायिक और अमर्यादित बोल बेहद चिंताजनक है. रामभद्राचार्य जी द्वारा, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान को तुष्टिकरण की दुकान कहा और विपक्षी नेताओं को मंच से सरेआम मूर्ख कहना यह दर्शाता है कि वे भाजपा के प्रभाव में अपनी वैचारिक निष्पक्षता खो चुके हैं.

संत का स्वभाव है कि, सभी को एक समान दृष्टि से देखना है, वह किसी एक दल के प्रति इतना अंधभक्त कैसे हो सकता है. संतों का मूल कार्य समाज को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और धर्म के मार्ग पर ले जाना है. सत्य और धर्म का मार्ग दिखाना, लोकमंगल और समाज कल्याण, समदर्शिता का प्रसार, क्षमा और करुणा का साक्षात स्वरूप होता है, ना कि राजनीतिक बयानबाजी करना. देश और प्रदेश की जनता अब भाजपा की इस ध्रुवीकरण और नफरत की राजनीति को समझ चुकी है.

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तेलीबंधा में सावरकर की मूर्ति लगाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सियासत में सावरकर

संत और महंत की सियासत अभी छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बनी हुई थी इसी बीच सावरकर की रायपुर में मूर्ति लगाने के विरोध वाली राजनीति भी शुरु हो गई. 28 मई सावरकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में इस बात का एलान हुआ कि सावरकर की मूर्ति रायपुर के तेलीबांधा तालाब के पास लगाई जाएगी. इसके बात कांग्रेस की सियासत गोलबंद होना शुरु हो गई.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने बयान में कहा कि महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कोटि-कोटि नमन करता हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले वीर सावरकर जी का जीवन अदम्य साहस, त्याग, राष्ट्रनिष्ठा और अटूट संकल्प की अमर गाथा है. विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी. राष्ट्र प्रथम का उनका विचार प्रत्येक भारतवासी को देशहित को सर्वोपरि रखते हुए समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के भाव से कार्य करने की प्रेरणा देता है. उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस और आत्मबल का अद्वितीय उदाहरण है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वीर सावरकर जी का संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. यहीं से रायपुर में एक नई राजनीति ने जगह बनानी शुरु कर दी.

सावरकर नहीं तेलिन दाई की लगे मूर्ति

तेलीबांधा तालाब के पास विनायक दामोदर सावरकर की मूर्ति लगाने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है. प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तेलीबांधा तालाब छत्तीसगढ़ की धरोहर है. छत्तीसगढ़ के लोगों विशेषकर साहू समाज की भावनाएं तेलीबांधा तालाब से जुड़ी हुई है. यहां पर नाम भक्त माता कर्मा या तेलिन दाई की मूर्ति लगाई जाए. प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जो सावरकर गाय को गौमाता मानने का विरोध करते थे तथा गाय को एक चौपाया जानवर के अतिरिक्त कुछ नहीं मानते थे, उनको भाजपा, आरएसएस जबरिया हिन्दुत्व का पैरोकार बनाती है. सावरकर ने जेल से छूटने के लिए तथा जेल से छूटने के बाद आजादी की लड़ाई का भी विरोध किया था. गांधी जी और कांग्रेस का विरोध करने मात्र के लिए भाजपाई उनको महिमा मंडित करते है. उनकी मूर्ति तेलीबांधा तालाब में लगाया जाना गलत है. प्रदेश के सबसे बड़े समाज की भावनाओं का अपमान भी है.

दूसरा बलौदाबाजार करना चाहती है कांग्रेस

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग दाउ अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस तेलीबांधा तालाब में सावरकर की मूर्ति लगाने को लेकर के गंदी राजनीति कर रही है. साहू समाज को भड़काने का काम कर रहे हैं .जबकि कांग्रेस के लोग अच्छे से जानते हैं तेलीबांधा तालाब है और वह रहेगा उसे कोई नहीं हटा सकता. एक तरफ उसे जाति को भड़काने का काम कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनके नेता चरणदास महंत हिंदुओं के जगद्गुरु का अपमान कर रहे हैं. उसपर एक शब्द नहीं बोल रहे हैं. वह उनके एजेंडे में है. हिंदुओं के खिलाफ बोलना सावरकर जी के विरोध करना कांग्रेस की आदत में है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आजादी में नेहरू जी के बाद किसको सम्मान देते हैं. चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह, लाला लाजपत राय या किसी और को. आज तक कांग्रेस ने किसे सम्मानित किया. इन्होंने देश में हजारों सड़कों के नाम सिर्फ फर्जी गांधियों के नाम के परिवार पर है. नेहरू के नाम पर है. इंदिरा गांधी के नाम पर राजीव गांधी के नाम पर है. देश में किसी और धर्म जाति के नाम पर लोग नहीं है. ये लोग तब से सिर्फ चटुकारिता की राजनीति करते रहे.

छत्तीसगढ़ की राजनीति में मई महीने का अंतिम सप्ताह राजनीति के नए रंग का तापमान दे गया है. जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे संत पर महंत की टिप्पणी जहां भाजपा को समाज के अपमानित करने के बराबर लगी है वहीं सावरकर की मूर्ति लगाने के विरोध ने एक नए रजनीति को जगह दी है. देखना होगा की आगे संत- महंत- मूर्ति वाली राजनीति में कौन कितना राजनीतिक फायदा ले पाता है.

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