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डीयू में चाय की चुस्की के साथ ‘नारी शक्ति’ पर मंथन, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साझा की पुरानी यादें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आयोजित हस्ताक्षर अभियान का नेतृत्व भी किया.

डीयू में चाय की चुस्की के साथ ‘नारी शक्ति’ पर मंथन
डीयू में चाय की चुस्की के साथ ‘नारी शक्ति’ पर मंथन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : April 10, 2026 at 2:27 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में आज का नजारा कुछ अलग ही था. कैंपस की फिजाओं में न केवल चाय की खुशबू थी, बल्कि देश की राजनीति में आने वाले बड़े बदलाव 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर गर्मागर्म चर्चा भी थी. इस खास मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छात्रों के बीच पहुंचकर न केवल उनके साथ चाय की चुस्की ली, बल्कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आयोजित हस्ताक्षर अभियान का नेतृत्व भी किया.

छात्र राजनीति की यादें हुईं ताजा
डीयू से मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाली रेखा गुप्ता के लिए यह दौरा भावनाओं से भरा रहा. डूसू (DUSU) की पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं रेखा गुप्ता जब आर्ट्स फैकल्टी पहुंचीं, तो उन्होंने अपनी पुरानी यादों को ताजा किया. छात्रों के साथ चाय पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, "यह कैंपस मेरी कर्मभूमि रहा है. यहीं से मैंने नेतृत्व का पहला पाठ सीखा था. आज इसी धरती पर अपनी छोटी बहनों और बेटियों को देश के नेतृत्व के लिए तैयार होते देखना गर्व की बात है."

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साझा की पुरानी यादें (ETV Bharat)

हस्ताक्षर अभियान: हर हस्ताक्षर में एक सपना
फैकल्टी ऑफ आर्ट्स से आज इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत हुई. कैंपस में छात्राओं और महिला शिक्षकों के बीच इस सिग्नेचर कैंपेन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया. इसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है. अभियान के दौरान हर हस्ताक्षर केवल एक नाम नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला और बराबरी की भागीदारी का भरोसा नजर आया. मुख्यमंत्री ने खुद हस्ताक्षर कर छात्रों को प्रेरित किया और इसे 'विकसित भारत' की नींव बताया.

अब नेतृत्व की बारी है, नारी शक्ति वंदन की जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित हैं. यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि करोड़ों माताओं और बहनों के संघर्षों को मिला एक नया विश्वास है.आज नारी शक्ति केवल विकास की सहभागी नहीं है, बल्कि वह विकसित भारत की निर्माणकर्ता और नेतृत्वकर्ता बन रही है. 16 अप्रैल का दिन संसद के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, जो हमारी आकांक्षाओं को नई दिशा देगा."

डीयू का संदेश: बदलाव के लिए तैयार है युवा पीढ़ी
कैंपस में मौजूद छात्राओं का कहना था कि महिला आरक्षण मिलने से राजनीति में शिक्षित और युवा महिलाओं का दखल बढ़ेगा. छात्रों और अध्यापकों के बीच यह चर्चा का विषय रहा कि किस प्रकार यह अधिनियम देश और प्रदेशों के विधायी निकायों में महिला नेतृत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.

अभियान के अंत में मुख्यमंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि वे न केवल शिक्षा में, बल्कि देश की नीति निर्धारण में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लें. चाय की इस चर्चा ने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय से उठी यह लहर आने वाले समय में देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है.

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