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बिना मोबाइल वाले मरीज कैसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, SNMMCH की OPD में मरीज बेहाल

धनबाद में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत हो रहे रजिस्ट्रेशन मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है.

SNMMCH DHanbad
शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 14, 2026 at 8:46 PM IST

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Updated : February 18, 2026 at 2:51 PM IST

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धनबाद: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. इसके दूरगामी परिणाम बेहतर होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) की ओपीडी में लागू की गई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

ईटीवी भारत की पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को सीधे डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे कई मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि प्रबंधन का दावा है कि काउंटर पर मरीजों को सहूलियत मिल रही है और जिनको दिक्कत है उनके लिए अलग व्यवस्था है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है.

SNMMCH की OPD में मरीज बेहाल (Etv Bharat)

कैसे हो रहा है रजिस्ट्रेशन?

अस्पताल में ओपीडी के लिए मरीजों को पहले आभा आईडी बनानी पड़ती है. इसके लिए एंड्रॉयड मोबाइल में आभा ऐप डाउनलोड करना जरूरी है. इसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य है. आभा आईडी से जेनरेट टोकन दिखाने पर काउंटर से डॉक्टर की पर्ची बनती है. कागज पर यह प्रक्रिया आसान दिखती है, लेकिन जिन मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं है या जिनका मोबाइल आधार से लिंक नहीं है, उनके लिए यह पूरी व्यवस्था परेशानी का कारण बन रही है.

SNMMCH DHanbad
ग्राफिक्स इमेज (Etv Bharat)

बिना मोबाइल वाले मरीजों की मुश्किलें

गिरिडीह से इलाज कराने आई अनिता देवी के पास कोई मोबाइल नहीं है. वह एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भटकती रहीं, लेकिन पर्ची नहीं बन सकी. अनिता देवी ने कहा कि मेरे पास मोबाइल नहीं है. जिस कारण उनकी पर्ची नहीं बन पा रही है. सरकार को अलग से व्यवस्था करने की जरूरत है. ताकि हमारे जैसे मरीजों को कठिनाई का सामना ना करना पड़े.

बिनोद नगर निवासी महेश्वर शर्मा सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे थे. उनके पास केवल बटन वाला साधारण मोबाइल था. डिजिटल प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण उन्हें भी परेशानी झेलनी पड़ी. उन्होंने भी कहा डॉक्टर की पर्ची नहीं बन पा रही है.

भूली से आए रिसादर कांत टुडू रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे. उनके पास एंड्रॉयड फोन तो था, लेकिन आधार लिंक नंबर वाला मोबाइल साथ नहीं था. नतीजतन पर्ची नहीं बन सकी और उन्हें वापस लौटना पड़ा. इन उदाहरणों से साफ है कि डिजिटल अनिवार्यता कई मरीजों के लिए इलाज में बाधा बन रही है.

प्रबंधन का क्या कहना है?

अस्पताल के वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. कुमार सुमन कुमार ने कहा कि सरकार के निर्देश पर सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जा रहा है. प्रक्रिया पूरी करने के लिए एंड्रॉयड फोन बेहद जरूरी है. जिनके पास एंड्रॉयड फोन नहीं है, उनके लिए अलग से व्यवस्था की गई है.

वहीं अस्पताल में आभा से जोड़ने के लिए एक टीम भी तैनात है. टीम लीडर नितेश कुमार सिंह के अनुसार, मरीजों को आसानी से आभा ऐप से जोड़ा जा रहा है और किसी को दिक्कत नहीं होने दी जा रही है.

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन धनबाद की प्रोजेक्ट मैनेजर ऋषिका सिन्हा ने बताया कि फिलहाल मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. आभा आईडी बनने के बाद लंबी कतार से छुटकारा मिलेगा और डॉक्टर को दिखाने की प्रक्रिया आसान होगी. लंबी कतार से बहुत हद तक अभी से निजात मिलने लगी है. किसी को कोई कठिनाई ना हो इसका ख्याल रखा जाता है.

जिनके पास एंड्रॉयड फोन नहीं या बटन वाले फोन है या जिनके आधार लिंक नंबर वाले मोबाइल नहीं हैं. उन्हें काफी परेशानी हो रही. ऐसे मरीजों को बिना इलाज वापस लौटने की नौबत खड़ी हो जा रही है. यह सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है. लेकिन अगर ऐसी दिक्कत आ रही तो यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.

साथ ही आभा की विशेषता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आभा आईडी बनने के बाद मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा. चाहे SNMMCH हो या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), मरीज का इलाज और जांच रिपोर्ट एक क्लिक में उपलब्ध होगी.

आगे की योजना

धनबाद के सभी 8 सीएचसी में भी जल्द रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. बीएसएनएल द्वारा इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होने के बाद काम शुरू होगा. अब तक करीब 12 लाख लोगों का आभा रजिस्ट्रेशन हो चुका है और लगभग 40–45 फीसदी मरीज पंजीकरण करा चुके हैं.

बड़ा सवाल

डिजिटल हेल्थ सिस्टम का उद्देश्य पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाना है, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर वैकल्पिक और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह व्यवस्था उन मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनी रहेगी, जिनके पास स्मार्टफोन या आधार लिंक मोबाइल नंबर नहीं है. सरकार की मंशा भले ही अच्छी हो, लेकिन डिजिटल बदलाव की इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे.

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घर बैठे कुछ इस तरह से कर सकते हैं आभा ऐप डाउनलोड

क्यूआर कोड के जरिए अपने मोबाइल में आभा ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए आधार लिंक मोबाइल का नंबर डालना होता है. जिसपर एक ओटीपी आता है. इस ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद आभा ऐप के द्वारा एक 14 डिजिट का अंक प्राप्त होगा. यही आभा नम्बर है, जो कि आपका रजिस्ट्रेशन नंबर भी होता है. ऐप के सबसे नीचे मध्य भाग में स्कैन के लिए विकल्प दिया गया है. जहां से अस्पताल में लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना टोकन नंबर ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं. यह सुविधा सिर्फ एंड्रॉयड मोबाइल के लिए है.

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Last Updated : February 18, 2026 at 2:51 PM IST