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इन किसानों को नहीं मिलेगा किसान सम्मान निधि का 6 हजार, जल्द करवा लें ये काम

खेती-किसानी से जुड़े किसानों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार हो रहा है, ताकि खेत से लेकर योजनाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिले.

किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड हो रहा तैयार
किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड हो रहा तैयार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 8:32 AM IST

4 Min Read
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सिरमौर: किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा, पारदर्शी और समय पर लाभ दिलाने के उद्देश्य से नए साल से कृषि विभाग ने पूरे हिमाचल प्रदेश में किसान पंजीकरण अभियान को तेज कर दिया है. सरकार अब खेती-किसानी से जुड़े हर किसान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार कर रही है, ताकि खेत से लेकर योजनाओं तक की हर जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सके.

इसी क्रम में हिमाचल सहित जिला सिरमौर के भी सभी किसानों के लिए किसान पंजीकरण और फसल पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है. कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपये की तीन किश्तें यानी सालाना छह हजार रुपये की सहायता राशि भी केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनका किसान पंजीकरण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण पूरा होगा. जिन किसानों का पंजीकरण नहीं होगा, उन्हें यह राशि जारी नहीं की जाएगी.

डॉ राज कुमार, कृषि उपनिदेशक, सिरमौर (ETV Bharat)

जिला सिरमौर कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. राज कुमार ने बताया कि कृषि विभाग ने जिला सिरमौर के सभी छह विकास खंडों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को शिविरों और पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से इस अभियान के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए. विभाग के अनुसार जिले में लगभग 60 से 65 हजार किसान हैं और इन सभी किसानों का किसान पंजीकरण अनिवार्य है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण अवश्य करवा लें. किसान पंजीकरण की प्रक्रिया लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से करवाई जा रही है.

पूरी तरह से निशुल्क है पंजीकरण

कृषि उपनिदेशक ने स्पष्ट किया है कि यह पंजीकरण पूरी तरह नि:शुल्क है और इसके लिए किसी भी किसान से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा. सभी लोक मित्र केंद्रों को इस बाबत सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. यदि कोई लोक मित्र केंद्र इसके बावजूद शुल्क वसूलता है, तो किसान इसकी शिकायत सीधे कृषि विभाग में कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि पंजीकरण के लिए किसान को आधार कार्ड और जमाबंदी की प्रति साथ लानी होगी, जिसमें खसरा नंबर और खतौनी नंबर दर्ज हों. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर किसान की भूमि से जुड़े सभी खसरों का विवरण दर्ज किया जाएगा. इस कार्य के लिए लोक मित्र केंद्रों के कर्मचारियों को विधिवत प्रशिक्षण दिया गया है. यदि किसान का 75 प्रतिशत या उससे अधिक सत्यापन हो जाता है, तो पंजीकरण स्वतः स्वीकृत हो जाएगा. यदि सत्यापन 75 प्रतिशत से कम रहता है, तो संबंधित किसान का विवरण पटवारी या कानूनगो के पास भेजा जाएगा, जहां जांच के बाद पंजीकरण को मंजूरी दी जाएगी.

दूसरे चरण में होगा डिजिटल फसल सर्वेक्षण

कृषि उपनिदेशक ने बताया कि किसान पंजीकरण के बाद दूसरे चरण में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जा रहा है. यह सर्वे भी सभी किसानों के लिए अनिवार्य होगा. डिजिटल फसल सर्वेक्षण से यह जानकारी मिलेगी कि किस किसान के किस खसरा नंबर में कौन-सी फसल बोई गई है. इससे सरकार को सटीक और वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा.

किसान का खेती से जुड़ा सटीक रिकॉर्ड होगा तैयार

कृषि विभाग के अनुसार किसान पंजीकरण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा. डॉ. राज कुमार ने कहा कि किसान पंजीकरण सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे प्रत्येक किसान का खेती से जुड़ा सटीक रिकॉर्ड तैयार होगा.

आधार कार्ड और जमाबंदी के साथ पंजीकरण करवाएं

कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया कि वो समय रहते आधार कार्ड और जमाबंदी के साथ पंजीकरण करवा लें, ताकि भविष्य में किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहे. उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण से खेती से जुड़ा सही डाटा उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी.

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