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सेवानिवृत्त कर्मचारियों से वसूली अमानवीय और अवैध- हाई कोर्ट

सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन या ग्रेच्युटी की वसूली को हाई कोर्ट ने अमानवीय और अवैध करार दिया है.

Punjab and Haryana High Court
Punjab and Haryana High Court (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 6, 2026 at 7:39 AM IST

2 Min Read
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पंचकूला: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन या ग्रेच्युटी की वसूली को अमानवीय और अवैध करार दिया है. जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी कर्मचारी से अधिक भुगतान उसकी किसी गलती, धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण के कारण नहीं हुआ है, तो प्रशासन अपनी त्रुटि का बोझ सेवानिवृत्त व्यक्ति पर नहीं डाल सकता. कोर्ट ने कहा कि अचानक और बिना उचित प्रक्रिया के तहत की गई वसूली कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत है.

क्या है मामला? मामला दफ्तरी पद से सेवानिवृत्त हुसैन व अन्य कई कर्मचारियों से जुड़ा है, जिसमें अगस्त 2025 को संबंधित बैंक ने उन्हें 1,99,808 रुपये की कथित अतिरिक्त ग्रेच्युटी राशि वापस जमा करने का आदेश जारी किया. याचिकाकर्ताओं द्वारा दलील दी गई कि भुगतान में किसी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत जानकारी नहीं दी गई थी. उन्होंने बैंक की ही प्रस्ताव संख्या 10 का हवाला देते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 से ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई थी, जिसके अनुरूप भुगतान किया गया. नतीजतन वर्षों बाद की गई वसूली न तो न्यायसंगत है और न ही कानून के सम्मत है.

सरकार की दलील खारिज: कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वो ये साबित करने में असफल रहे कि याचिकाकर्ताओं ने किसी गलत तरीके से अधिक राशि प्राप्त की थी. कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि बिना नोटिस और परामर्श के की गई वसूली प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाती है और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा पर आघात करती है. कोर्ट ने कहा कि शासन से निष्पक्षता, जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जाती है. फैसले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए दोहराया कि ग्रुप सी व डी के कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों या सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों से वसूली नहीं की जा सकती.

वसूली के जारी आदेश रद्द: हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सभी याचिकाएं स्वीकार कर 19 अगस्त 2025 को जारी वसूली के आदेशों को रद्द कर दिया. अदालत ने प्रतिवादी को भविष्य में याचिकाकर्ताओं से किसी प्रकार की वसूली न करने के स्पष्ट निर्देश दिए.

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