बनारस में 3 लाख पौधे लगाने के रिकॉर्ड पर उठे सवाल, निगम ने कहा- पौधों को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी FIR
नगर निगम PRO संदीप श्रीवास्तव ने कहा, मियावाकी तकनीक से विकसित किए जा रहे वन को लेकर भ्रामक जानकारी देने वालों पर FIR दर्ज होगी.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 10:00 PM IST
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के डोमरी इलाके में रविवार को एक घंटे के अंदर 3,16,000 पौधे लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. इस उपलब्धि के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक सर्टिफिकेट भी जारी किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रयास की सराहना की और बाद में नगर निगम के अधिकारियों से मिलकर उन्हें बधाई भी दी.
हालांकि, इस रिकॉर्ड के बनते ही योजना की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान उठने लगे हैं.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें पौधों के सूखने और अव्यवस्था की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं. समाजवादी पार्टी के नेता अमन यादव ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे केवल पैसे की बर्बादी और रिकॉर्ड बनाने का दिखावा बताया है. उनका दावा है कि भीषण गर्मी और जानवरों के घुसपैठ के कारण 3 लाख पौधों में से 100 भी नहीं बच पाएंगे. एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने भी पौधों की खराब स्थिति दिखाते हुए वीडियो साझा किया है, जिस पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है.

नगर निगम का पलटवार और वैज्ञानिकों का शोध: इन आरोपों पर महापौर अशोक तिवारी ने कहा है कि बीएचयू (BHU) के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के शोध के बाद ही मियावाकी तकनीक से ये पौधे लगाए गए हैं. पौधों की सिंचाई के लिए आधा दर्जन बड़े पंप, चार तालाब और हजारों स्प्रिंकलर की व्यवस्था की गई है ताकि मार्च की गर्मी में भी इन्हें सुरक्षित रखा जा सके. नगर निगम के अधिकारियों का आरोप है कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर जानवरों को परिसर में छोड़ रहे हैं ताकि पौधों को नुकसान पहुंचाया जा सके. अधिकारियों का मानना है कि यह सब भू-माफियाओं के इशारे पर किया जा रहा है जिनकी नजर इस सरकारी जमीन पर थी.

भ्रामक खबरों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने भ्रामक खबरें फैलाने वालों को सीधी चेतावनी देते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की बात कही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पतझड़ का मौसम है, इसलिए पौधों की पत्तियां गिरना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और नई कोपलें जल्द ही निकलेंगी. इस परियोजना की जिम्मेदारी एक अनुबंधित एजेंसी को दी गई है, जो अगले तीन वर्षों तक इनकी देखभाल करेगी और निगम को आय भी सुनिश्चित करेगी. पौधों की सुरक्षा के लिए अब मौके पर 5 सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं और नुकसान पहुंचाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है.
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