मुनीडीह वाशरी हादसा: लापरवाही की ढेर बनी 4 मजदूरों की मौत की वजह, आखिर जिम्मेदार कौन?
धनबाद के मुनीडीह वाशरी हादसे को लेकर विशेषज्ञों ने लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इसका कारण बताया है.

Published : May 6, 2026 at 5:14 PM IST
धनबाद: जिले के पुटकी थाना क्षेत्र अंतर्गत बीसीसीएल की मुनीडीह वाशरी के लोडिंग प्वाइंट पर हुआ हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और सिस्टम की खामियों का नतीजा बताया जा रहा है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 40 से 60 फीट ऊंचे स्लरी के ढेर के नीचे मजदूरों से खुदाई कराई जा रही थी. इसी दौरान ढेर अचानक धंस गया और चार मजदूर उसकी चपेट में आ गए. मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार के बीच राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक चारों मजदूरों की जान जा चुकी थी.
हादसे के बाद जहां एक ओर परिजनों में मातम पसरा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर आवाजें तेज हो गई हैं. यूनियन नेता सह मुखिया रमेश कुमार सिंह ने सीधे तौर पर बीसीसीएल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि यह हादसा पूरी तरह से प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है. वाशरी में लंबे समय से 40 से 50 फीट ऊंचा स्लरी का ढेर जमा था, जिसे समतल किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी लूट-खसोट में लगे हुए हैं और अब मामले की लीपापोती के लिए डीओ होल्डरों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है.
लापरवाही के कारण हुआ हादसा
बीसीसीएल सेफ्टी बोर्ड के सदस्य रंजय सिंह ने भी घटना को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि 50 से 60 फीट ऊंची ढीली स्लरी को रखना और उसके नीचे से मजदूरों से खुदाई करवाना, हादसे को न्योता देने जैसा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की लोडिंग प्रक्रिया में प्रबंधन को मोटा फायदा होता है, इसलिए सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया.
यूनियन प्रतिनिधि आरके प्रसाद ने बताया कि लोडिंग प्वाइंट पर जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती ही नहीं थी. करीब छह महीने पहले लोडिंग ऑफिसर को वहां से हटा दिया गया था और किसी गैर-अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई थी. उसे भी दो दिन पहले हटा दिया गया और उसके बाद वह जगह पूरी तरह खाली रही. उन्होंने कहा कि बिना जिम्मेदार अधिकारी के इतने संवेदनशील स्थान पर काम कराना हादसे को न्योता देना है.
अब इस पूरे मामले का तकनीकी पक्ष भी सामने आ रहा है. विशेषज्ञ दिनेश सिंह ने स्लरी की प्रकृति और लोडिंग प्रक्रिया की जमीनी सच्चाई को विस्तार से समझाया. उन्होंने बताया कि वाशरी में बनने वाली स्लरी एक समान गुणवत्ता की नहीं होती है. अलग-अलग कोलियरियों से आने वाले कोयले की गुणवत्ता अलग-अलग होती है और कई बार स्टॉक मेंटेन करने के लिए खराब गुणवत्ता वाला कोयला भी वाशरी भेज दिया जाता है. यही कारण है कि जब वाशरी में वाश्ड कोल तैयार होता है, तो उससे बनने वाली स्लरी की गुणवत्ता भी एक जैसी नहीं रहती.
दिनेश सिंह के अनुसार, स्लरी के ढेर में जो हिस्सा पहले जमा होता है, वह नीचे की परत में चला जाता है और समय के साथ उसकी गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है, क्योंकि उसी आधार पर सैंपलिंग और टेस्टिंग की जाती है. उन्होंने बताया कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च जैसे संस्थान (CIMFR) नीचे की स्लरी की सैंपलिंग कर उसकी गुणवत्ता तय करते हैं और उसी के आधार पर कीमत निर्धारित होती है. ऐसे में जो खरीदार या डीओ होल्डर होते हैं, वे उसी बेहतर गुणवत्ता वाली स्लरी को निकालना चाहते हैं, जिसके लिए वे मजदूरों से नीचे की परत की खुदाई करवाते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि ऊपर की स्लरी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, क्योंकि उसमें हाल में आए मिश्रित और कम गुणवत्ता वाले कोयले का अंश ज्यादा होता है. इस कारण डीओ होल्डर को ऊपर की स्लरी का उचित मूल्य नहीं मिल पाता. यही वजह है कि वे जोखिम उठाकर नीचे की स्लरी निकलवाते हैं. इस प्रक्रिया में मजदूरों को सीधे अस्थिर और ढीले ढेर के नीचे काम करना पड़ता है, जो बेहद खतरनाक होता है.
दिनेश सिंह ने यह भी बताया कि यदि स्लरी के ढेर का समय-समय पर समतलीकरण कर दिया जाए, तो ऊपर और नीचे की स्लरी आपस में मिल जाती है और गुणवत्ता एकसमान हो जाती है. इससे किसी एक परत को लेकर विशेष लालच नहीं रहता और सुरक्षित तरीके से लोडिंग की जा सकती है. लेकिन ऐसा जानबूझकर नहीं किया जाता, क्योंकि इससे कीमतों पर असर पड़ता है और कुछ लोगों का आर्थिक लाभ कम हो जाता है.
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
उन्होंने यह भी जोड़ा कि रैक लोडिंग के दौरान भी वाशरी को दरों में कटौती झेलनी पड़ती है, इसलिए पूरी व्यवस्था में एक तरह का आर्थिक दबाव बना रहता है, जिसका खामियाजा मजदूरों की सुरक्षा से समझौता कर चुकाया जाता है. कुल मिलाकर उन्होंने साफ कहा कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि तकनीकी जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है.
चार डीओ होल्डर्स के खिलाफ एफआईआर
हालांकि, बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से भी अपना पक्ष सामने आया है. क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी बिपिन कुमार ने कहा कि नियमों के अनुसार स्लरी का ढेर ऊंचा नहीं होना चाहिए और उसे समतल करना जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि हादसे के एक दिन पहले ही जेसीबी और पेलोडर के जरिए समतलीकरण की तैयारी की गई थी, लेकिन डीओ होल्डरों के विरोध के कारण यह कार्य नहीं हो सका. इस मामले में चार डीओ होल्डरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
दो टीमें कर रही मामले की जांच
वहीं मुनीडीह वाशरी के जीएम अरिंदम मुस्तफी ने कहा कि वाशरी में वर्तमान में 6 लाख 40 हजार टन स्लरी का स्टॉक मौजूद है और गुणवत्ता को लेकर कोई समस्या नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीसीसीएल का काम केवल लोडिंग डिपो उपलब्ध कराना है, जबकि लोडिंग की जिम्मेदारी डीओ होल्डरों की होती है. उन्होंने बताया कि हादसे की जांच के लिए बीसीसीएल मुख्यालय और क्षेत्रीय समिति की दो टीमें गठित की गई हैं, जो पूरे मामले की जांच कर रही हैं.
चार मजदूरों की मौत के बाद मुनीडीह वाशरी में सन्नाटा पसरा हुआ है. कामकाज ठप है और हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है - क्या यह हादसा टाला नहीं जा सकता था? सुरक्षा मानकों की अनदेखी, जिम्मेदार अधिकारियों की कमी और आर्थिक लाभ की होड़ ने आखिरकार चार जिंदगियों को निगल लिया. अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है.
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