RDG को लेकर आर्थिक संकट के भंवर में सरकार! सोशल मीडिया पर CM सुक्खू को नसीहतों की भरमार
सोशल मीडिया पर कोई CM सुक्खू को नसीहत दे रहा है तो कोई सरकार को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 14, 2026 at 7:33 PM IST
|Updated : February 14, 2026 at 8:21 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट की आहट अब सियासी गलियारों से निकलकर सोशल मीडिया पर एक बड़ी जंग बन चुकी है. 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार द्वारा 'राजस्व घाटा अनुदान' (RDG) बंद किए जाने से प्रदेश में वित्तीय संकट अचानक गहरा गया है. अनुमान है कि इससे राज्य को हर साल 8 से 10 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. ऐसे में वेतन, पेंशन, एरियर और विकास कार्यों पर संभावित असर को लेकर लोगों में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है.
हाल ही में वित्त विभाग की ओर से दी गई प्रेजेंटेशन के आंकड़े सार्वजनिक होते ही यह मुद्दा और भड़क गया. आंकड़ों ने न केवल आर्थिक स्थिति की गंभीरता को उजागर किया, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी को भी तेज कर दिया. अब सवाल सिर्फ केंद्र की नीति पर ही नहीं उठ रहे, बल्कि राज्य के वित्तीय प्रबंधन और बीते वर्षों के फैसलों पर भी चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर आम जनता से लेकर राजनेता, पूर्व अधिकारी और विशेषज्ञ तक अपनी-अपनी राय रख रहे हैं. कोई मौजूदा सरकार को नसीहत दे रहा है, कोई पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है, तो कोई केंद्र के फैसले पर सीधे सवाल उठा रहा है.
'बहाने नहीं, हिमाचल को जवाब चाहिए'
सोशल मीडिया पर आम लोग तंज भरे अंदाज में लिख रहे हैं कि "खजाना खाली हो सकता है, लेकिन जनसेवकों का बैंक बैलेंस कभी खाली नहीं होता." धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार से तीखे सवाल किए. उन्होंने पूछा कि वित्त आयोग के सामने प्रदेश का पक्ष मजबूती से क्यों नहीं रखा गया? क्या गलत आंकड़े भेजे गए? क्या प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं था? उन्होंने लिखा, "पहले अपने फैसलों की जिम्मेदारी लीजिए. आत्मनिर्भर हिमाचल की बात करने से पहले साफ और ईमानदार रोडमैप जनता के सामने रखिए. हिमाचल को आरोप नहीं, जवाब चाहिए."
मशहूर कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक और इंजीनियर रविंदर अवस्थी ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि निजी होटल मुनाफे में हैं, लेकिन सरकारी होटल घाटे में क्यों? उन्होंने लिखा, "जब मंत्री, विधायक और अधिकारी इसे निजी जागीर समझेंगे, तो घाटा होगा ही. अगर चोरी, लीकेज और मनमानी बंद हो जाए तो HPTDC कमाऊ विभाग बन सकता है." उनकी पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी और सरकारी उपक्रमों में पारदर्शिता की मांग की.
'कर्मचारियों की पीड़ा को समझे सरकार'
पूर्व HAS अधिकारी और लेखक राजकुमार राकेश ने लिखा कि आर्थिक संकट दिखने से ज्यादा गंभीर है. उन्होंने कहा, "कर्मचारियों का 12% महंगाई भत्ता वर्षों से लंबित है, एरियर बकाया है और मेडिकल रीइंबर्समेंट महीनों से अटका है. कॉस्मेटिक उपायों से काम नहीं चलेगा. कर्मचारियों की पीड़ा को समझना होगा." उनकी पोस्ट पर पेंशनरों और कर्मचारियों ने अपनी परेशानियां साझा कीं.
'मुफ्त में कुछ नहीं मिलता'
हिमाचल में एक प्रसिद्ध अखबार के संपादक नवनीत शर्मा ने लिखा कि RDG बहस ने करीब 75 लाख हिमाचलियों को अर्थशास्त्री बना दिया है. लेकिन यह भी सच है कि मुफ्त कुछ नहीं होता. उन्होंने लिखा, "जब बात अपने पर आती है तो हर कोई वित्त विशेषज्ञ बन जाता है, पर यह समय आत्मसम्मान जगाने का है. यह सिर्फ सरकार की नहीं, हर हिमाचली की परीक्षा है."
खर्चों में कटौती का सुझाव
पूर्व मंत्री महेंद्र नाथ सोफत ने मुख्यमंत्री को खुले पत्र में सलाह दी कि आर्थिक अनुशासन की शुरुआत खुद से होनी चाहिए. हेलीकॉप्टर उपयोग और बड़े काफिलों पर रोक लगाने की बात कही. वहीं, पत्रकार पंडित कृष्ण भानु ने लिखा कि यह स्थिति 'युद्ध' जैसी है. उन्होंने कहा, "अगर मैं मुख्यमंत्री होता तो सड़क-सड़क जनता के बीच जाता, मंत्रियों के वेतन-भत्तों में कटौती करता और आर्थिक प्रबंधन की शुरुआत स्वयं से करता. जब जनता त्याग देखेगी, तभी साथ खड़ी होगी."
सरकार पर विपक्ष हमलावर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर "वित्तीय आपातकाल" जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी विफलताओं का बोझ जनता पर डालने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार एक तरफ भारी कर लगाने की योजना बना रही है और दूसरी तरफ अपने करीबियों को कैबिनेट रैंक देकर राजकोष खाली कर रही है." उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) और महिलाओं को ₹1500 जैसी झूठी गारंटियों को अर्थव्यवस्था की तबाही का मुख्य कारण बताया. साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 16वें वित्त आयोग के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखने में विफल रही और अब केंद्र पर दोष मढ़कर राजनीति कर रही है.
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सरकार को "झूठ की फैक्ट्री" करार दिया और आरोप लगाया कि यह सरकार सलाहकारों की फौज और "मित्रों की सरकार" बनकर रह गई है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने फिजूलखर्ची की सारी हदें पार कर दी हैं. सरकार ने पिछले तीन वर्षों में विकास कार्य ठप कर दिए और जनता का पैसा होर्डिंग्स, प्रचार और हेलीकॉप्टर के दौरों पर खर्च किया. उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के मुद्दे को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रही है ताकि वह अपनी चुनावी गारंटियों से पीछे हट सके.
'बंद नहीं होगी ओल्ड पेंशन स्कीम'
इधर RDG को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चल रही तीखी बहस के बीच गुरुवार को हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की. बैठक के बाद सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में न तो पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बंद किया जाएगा और न ही सरकारी नौकरियों पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाया जाएगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ कहा कि, "आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कर्मचारियों और युवाओं के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा." मंत्रिमंडल बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित पड़े कई पदों को स्वीकृति दी जाएगी.
'RDG बंद करना हिमाचल के साथ अन्याय'
वहीं, सीएम सुक्खू का कहना है कि RDG बंद करना हिमाचल के साथ अन्याय है. उन्होंने कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा RDG से आता था और इसे रोकना सहकारी संघवाद के खिलाफ है. सीएम ने भरोसा दिलाया कि OPS और सामाजिक योजनाएं बंद नहीं होंगी. जरूरत पड़ी तो कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा. सरकार का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि RDG बंद होने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रदेश में खर्चों पर रोक लगेगी, भर्तियां स्थगित होंगी और OPS पर भी पुनर्विचार हो सकता है. लेकिन कैबिनेट के फैसले ने फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगा दिया है.
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