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'जनता क्यों भुगते सरकार के गलत फैसलों की कीमत?', RDG पर गरमाई सियासत, भाजपा ने सुक्खू सरकार को घेरा

RDG पर हिमाचल में सियासत गरमा गई है. कांग्रेस के आरोपों पर अब भाजपा ने भी पलटवार किया है.

HIMACHAL RDG CONTROVERSY
RDG पर गरमाई सियासत (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 7, 2026 at 6:34 PM IST

3 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को लेकर सियासत तेज हो गई है. जहां कांग्रेस सरकार केंद्र पर हिमाचल के साथ भेदभाव के आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा नेताओं ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर सुक्खू सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. भाजपा का कहना है कि गलत फैसले, कमजोर पैरवी और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आज प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है.

'जनता क्यों भुगते सरकार के फैसलों की सजा'

धर्मशाला से विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति के लिए सरकार की लापरवाह कार्यप्रणाली जिम्मेदार है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार की गलत नीतियों की कीमत हिमाचल की जनता क्यों चुकाए. सुधीर शर्मा ने कहा कि वित्त आयोग जैसे संवैधानिक मंच पर प्रदेश का पक्ष मजबूती से नहीं रखा गया. गलत और भ्रामक आंकड़े भेजकर हिमाचल की आर्थिक स्थिति को कागजों में बेहतर दिखाया गया, जिसका नुकसान अब प्रदेश को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीपीएल सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे गए, जिससे केंद्रीय सहायता पर असर पड़ा.

'आरडीजी को राजनीतिक मुद्दा बना रही सरकार'

पूर्व मंत्री ने कहा कि आरडीजी केवल हिमाचल तक सीमित फैसला नहीं था, बल्कि यह देशव्यापी नीतिगत निर्णय है. कर्नाटक जैसे राज्यों ने इसे स्वीकार किया, लेकिन हिमाचल सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इसे राजनीतिक रंग दे रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिटायर्ड अधिकारियों पर निर्भरता बढ़ाकर सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर किया है.

'अस्थायी व्यवस्था थी आरडीजी'

वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि आरडीजी को लेकर प्रदेश सरकार भ्रम फैला रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीजी वित्त आयोग की अस्थायी व्यवस्था थी, जिसका उद्देश्य राज्यों को आत्मनिर्भर बनाना था. कश्यप ने कहा कि केंद्र ने हिमाचल समेत कई राज्यों को अन्य योजनाओं के जरिए पहले से अधिक बजट उपलब्ध कराया है. उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां वित्तीय अनुशासन से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, जबकि हिमाचल में खर्च नियंत्रण नहीं किया गया.

कश्यप ने कहा कि हिमाचल के बजट का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज में खर्च हो रहा है. ऊंची ब्याज दरों पर लिए गए कर्ज ने विकास कार्यों को रोक दिया है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भ्रम फैलाने के बजाय वित्तीय प्रबंधन सुधारने पर ध्यान दे.

'आरडीजी खत्म होना पहले से तय था'

हमीरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से यह स्पष्ट किया जा रहा था कि आरडीजी को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा. यह फैसला केवल हिमाचल के लिए नहीं, बल्कि 17 राज्यों के लिए लिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने खर्च कम करने के लिए समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को पहले से कहीं अधिक सहायता दी है, इसके बावजूद सरकार जनता को गुमराह कर रही है. अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि कर्ज लेकर कर्ज चुकाने की नीति का खामियाजा आने वाले समय में जनता को भुगतना पड़ सकता है.

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