बिहार में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा करोड़ों का पुल, ढलाई के दौरान ही भरभराकर गिरा, 3 इंजीनियर सस्पेंड
बिहार में एक और पुल भ्रष्टाचर की भेंट चढ़ गई है. मामले में लापरवाही के आरोप में तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है.

Published : March 2, 2026 at 6:11 PM IST
गोपालगंज: जिले के सिधवलिया प्रखंड अंतर्गत गंगवा गांव में घोघारी नदी पर निर्माणाधीन एक आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया. लगभग 29 मीटर लंबा यह पुल भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. इस पुल का निर्माण करीब 2 करोड़ 89 लाख 21 हजार रुपये की लागत से कराया जा रहा था.
गोपालगंज में गिरा निर्माणाधीन पुल: दरअसल हादसा उस समय हुआ जब पुल के स्लैब की ढलाई का काम चल रहा था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक एक जोरदार आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचा ढह गया. गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में किसी भी मजदूर के घायल होने या जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. अगर यह हादसा ढलाई पूरी होने के बाद या पुल चालू होने पर होता, तो परिणाम काफी भयावह हो सकते थे.
ढलाई के दौरान पुल धराशायी: पुल गिरने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदार और संबंधित विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में मानकों की अनदेखी की गई. साथ ही पुल की मजबूती के लिए जिस मोटाई और गुणवत्ता के सरिया का उपयोग होना चाहिए था, उसे दरकिनार कर पतले और कम गुणवत्ता वाले सरिया का इस्तेमाल किया गया.
ग्रामीणों का विभाग पर गंभीर आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि पुल के सेंटरिंग और सपोर्ट सिस्टम में भी भारी लापरवाही बरती गई थी, जिसके कारण वह ढलाई का वजन सहन नहीं कर सका. बता दें कि बिहार में निर्माणाधीन पुलों का गिरना अब एक चिंताजनक सिलसिला बन गया है. इस घटना ने एक बार फिर इंजीनियरिंग डिजाइन और विभाग की निगरानी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है.

उच्चस्तरीय जांच की मांग: करोड़ों की लागत से बनने वाली ये परियोजनाएं जनता की सुविधा के लिए होती हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से ये 'मौत का जाल' बनती जा रही हैं. स्थानीय लोगों की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. फिलहाल, निर्माण कार्य रोक दिया गया है और विभाग की टीम क्षति का आकलन करने में जुटी है.
कई हादसों से उठे सवाल: गंगवा गांव की यह घटना विकास के दावों के बीच सिस्टम की खोखली नींव को उजागर करती है. पुल का गिरना केवल एक ढांचागत विफलता नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन की बर्बादी और जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है. जब तक चयन प्रक्रिया और निगरानी में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा.

बता दें कि बिहार में हाल के सालों में पुल गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. जून 2023 को भागलपुर में सुल्तानगंज-अगुवानी घाट पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में समा गया था. अगस्त 2023 को उसी पुल का दूसरा हिस्सा भी ढह गया था. जून 2024 को अररिया जिले के सिकटी प्रखंड के पास निर्माणाधीन पुल गिरा था. पुल उद्घाटन के पहले ही ध्वस्त हो गया था.
जिलाधिकारी ने क्या कहा?: जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि संवेदक बापूधाम कंस्ट्रक्शन मोतिहारी के बबलू कुमार हैं. साइड का इंपेक्शन करने के क्रम में वहां के जेई और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के साथ-साथ डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट और मुजफ्फरपुर डिविजन के चीफ इंजीनियर सुमित सहित कई लोग उपस्थित रहे. ग्रामीणों ने बातचीत के क्रम में बताया कि जेई दिलीप तिवारी और एई ज्योति मधेशिया, अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए थे और वहां नहीं जाते थे.
"कार्यपालक अभियंता की भी उपस्थिति नगण्य थी. पूछताछ के क्रम में पता चला कि जमीन का कॉम्पैक्शन सही से नहीं होने के कारण सेंटरिंग गिर गई, जिसके कारण घटना घटी है. इस संदर्भ में विशेषज्ञों से बात की तो उनके द्वारा बताया गया कि ऐसी कोई बात नहीं है, सेंटरिंग के रूप में जिस आइयरन बास का उपयोग किया गया था, उसमें जंग लगी हुई थी."- पवन कुमार सिन्हा,जिलाधिकारी
एक्सपर्ट करेंगे नमूनों की जांच: डीएम ने आगे कहा कि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि क्षमता इतनी नहीं थी कि वह इसका वजन संभाल पाए. इसको लेकर आज ही आरडब्ल्यूडी के सचिव को रिकमेंड कर दिया गया है. तीनों के सस्पेंशन (कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता) के आदेश दिए गए हैं. संवेदक को भी ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है. अब हमने इसके लिए रिपोर्ट भेजी है. विभाग की तरफ से भी उच्च स्तरीय जांच होनी है. वहां से एक्स्पर्ट द्वारा सीमेंट के नमूने लिए गए हैं और आयरबांस सेल्टिंग के भी नमूने लिए गए हैं.
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