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'दिल्ली में मामी, हैदराबाद में बुआ, मुम्बई में मौसी..' लीक WhatsApp चैट से बिहार में मानव तस्करी का खुलासा

रक्सौल बॉर्डर पर मानव तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, व्हाट्सएप चैट से हुआ बड़ा खुलासा. लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर वेश्यावृत्ति और अंग तस्करी का मामला.

RAXAUL BORDER HUMAN TRAFFICKING
रक्सौल बॉर्डर पर मानव तस्करी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 24, 2026 at 12:16 PM IST

4 Min Read
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पूर्वी चंपारण: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में भारत-नेपाल बॉर्डर पर मानव तस्करी का एक बड़ा और खौफनाक सिंडिकेट का भंडाभोड़ हुआ है. यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह भारत-नेपाल सीमा को ट्रांजिट रूट बनाकर मासूम लड़कियों को वेश्यावृत्ति और अवैध अंग प्रत्यारोपण के काले धंधे में धकेल रहा है. तस्करों के व्हाट्सएप चैट से यह खुलासा हुआ है, जिसमें सिंडिकेट का लक्ष्य सालाना 400 करोड़ रुपये कमाना बताया गया है.

प्यार और ब्लैकमेल का जाल बुनते एजेंट: मानव तस्करी के इस नेटवर्क में शहर और गांव स्तर पर स्थानीय एजेंट सक्रिय हैं. ये एजेंट सोशल मीडिया या प्रेम प्रसंग के बहाने लड़कियों को फंसाते हैं. कुछ मामलों में अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता है, तो कुछ में अच्छी नौकरी या शादी का लालच दिया जाता है. लड़की के चंगुल में आने के बाद एजेंट को आका (बॉस) से व्हाट्सएप पर निर्देश मिलता है, जिसमें लड़की का पूरा बायोडाटा मांगा जाता है.

शारीर को इंच-टेप से नापते थे: उजागर चैट स्क्रीनशॉट में देखा गया है कि आका लड़की की उम्र, वजन, लंबाई, मासिक धर्म की तारीख, शरीर पर कट या मस्से के निशान जैसी संवेदनशील जानकारी मांगते हैं. यहां तक कि शरीर को इंच टेप से नापने के निर्देश दिए जाते हैं. जब लड़की आका को 'पसंद' आ जाती है, तो उसे मंजिल तक पहुंचाया जाता है. एजेंट को इसके बदले 50 हजार से 1 लाख रुपये मिलते हैं.

कोडवर्ड से चलता है सिंडिकेट: सिंडिकेट पुलिस की नजरों से बचने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करता है. दिल्ली में 'मामी', हैदराबाद में 'बुआ', मुंबई में 'मौसी' और लुधियाना में 'दीदी' जैसे नामों से बड़े आका काम करते हैं. यह नेटवर्क न केवल देह व्यापार बल्कि बॉडी ऑर्गन (अंग) की खरीद-फरोख्त में भी लड़कियों का इस्तेमाल करता है. रक्सौल बॉर्डर इसका मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है.

बॉडी ऑर्गन बेचने के लिए भी इनका इस्तेमाल: वहीं मानव तस्करी रोधी इकाई 'स्वच्छ रक्सौल' से जुड़े रंजीत सिंह ने कहा कि, ''लड़कियों को सिर्फ देह व्यापार ही नहीं बल्कि बॉडी ऑर्गन (अंग प्रत्यारोपण) बेचने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. हम लोगों ने अब तक 500 से ज्यादा लड़कियों का रेस्क्यू किया हैं.''

पुलिस का दावा, 100 से ज्यादा रेस्क्यू: रक्सौल डीएसपी मनीष आनंद ने बताया कि मानव तस्करी एक बड़ी समस्या है. तस्कर प्रेम प्रसंग और सोशल मीडिया से लड़कियों को दिग्भ्रमित कर फंसाते हैं. रक्सौल पुलिस इस मामले में काफी सजग है और अब तक 100 से अधिक लड़कियों का रेस्क्यू किया जा चुका है. उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे इस दिशा में और तेजी से कार्रवाई की जाएगी.

"मानव तस्करी एक बड़ी समस्या है. प्रेम प्रसंग एवं सोशल मीडिया से दिग्भर्मित कर लड़कियों को फंसाया जाता है. रक्सौल पुलिस मानव तस्करी मामले में काफी सजग है. अभी तक हमने 100 से ज्यादा लड़कियों का रेस्क्यू किया है. आगे इसमे और तेजी से काम होगा."-मनीष आनंद, डीएसपी, रक्सौल

बचाव की जरूरत: यह खुलासा बिहार में मानव तस्करी की गंभीरता को दर्शाता है, जहां सीमावर्ती इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. लड़कियों की सुरक्षा के लिए परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर सतर्क रहने की जरूरत है. सोशल मीडिया पर अजनबियों से सावधानी, जागरूकता अभियान और तेज कार्रवाई से ही इस काले धंधे को रोका जा सकता है. सुरक्षा एजेंसियां इस सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कदम उठा रही हैं, लेकिन समस्या की जड़ों को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है.

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