सरकार की व्यवस्था को कुतर रहे 'सरकारी चूहे', करामाती चूहा खातिरदारी में खा गया 26 हजार क्विंटल
बिहार में जहां चूहे करोड़ों की शराब पी गए, वहीं कवर्धा में करोड़ों की धान चट कर गए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 9, 2026 at 9:26 PM IST
रायपुर: संवैधानिक पद पर बैठे हुक्मरानों की व्यवस्था में चूहे बड़े कारगर माने जाते हैं. चूहे पर सियासत भी खूब होती है. चूहे सियासत में रहते भी हैं. दो बड़ी चीजें जो चूहों से जुड़ी हैं, उनकी इन दिनों चर्चा खूब हो रही है.
करामात चूहे की
सुप्रीम कोर्ट में चल रही कुत्तों को सड़क से हटाने की सुनवाई में वकील ने दलील दिया कि कुत्ते अगर हटा दिए गए तो चूहों की संख्या ज्यादा हो जाएगी. इसे लेकर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिल्ली पाल लीजिए.
सियासत में चूहा
अब चूहे की दूसरी बड़ी घटना एक ओर संवैधानिक ही है. हालांकि छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ी हुई नहीं है. देश में सबसे ज्यादा धूम धड़ाके के साथ 2016 में नीतीश कुमार ने बिहार में शराब बंदी की. शराबबंदी में शराब की बहुत बड़ी खेप पकड़ी गई. सारे शराब को थाने में रखा गया. उसके बाद शराब गायब हो गया. थाने से जो शराब गायब हुआ उसकी कीमत करोड़ों की थी. इस पर सरकारी बयान आया कि थाने में जो भी शराब थी उसे चूहे पी गए.
बाढ़ वाला चूहा
दूसरी बात भी बिहार से ही जुड़ी हुई है. 2017 में बिहार में विकराल बाढ़ आई थी. इस बाढ़ में लगभग 500 लोगों की जान गई थी. एक करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए थे. बाढ़ को लेकर बने हालात पर जब चर्चा हुई तो 2 सितंबर 2017 को तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ललन सिंह ने कहा, जो बांध बनाए गए थे उसमें चूहों ने होल कर दिया और चूहों के बनाए गए छेद की वजह से बांध टूट गया. मंत्री ने कहा कि जिसके कारण बिहार में बाढ़ आई है. उन्होंने कहा कि बिहार मैं बाढ़ आने की मुख्य वजह चूहे हैं.
खतरनाक चूहा
सरकार की व्यवस्था में चूहे होते हैं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता. 11 फरवरी 2012 को झारखंड की सियासत में एक बड़ा भूचाल उसे समय आ गया था. जब वहां के राज्यपाल सैयद अहमद की उंगली को सोते समय रात में चूहे ने काट लिया. चर्चा यही नहीं थमी, चूहों के होने की बड़ी कहानी यहां भी रही, जब सरकारी फाइलें जो दस्तावेज के तौर पर उदाहरण होती थी, नहीं मिलने पर जवाब दिया जाता था कि चूहे उसे खा गए हैं.
23 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार में चूहे बांध काट रहे हैं जिससे बांध गिर जाते हैं. चूहे हमेशा चर्चा में रहते हैं कभी चूहा पुल गिरा देता है, चूहा पुलिस थाने में करोड़ों लीटर की शराब पी जाता है. लूट किस तरह चल रही है चूहा उसका उदाहरण है.
26 हजार क्विंटल वाला चूहा
अब बात छत्तीसगढ़ की करते हैं. सरकारी खजाने में रखा गया वह खाद्यान्न जो गरीबों के पेट का निवाला होता है, उसे चूहे खा गए. चूहे जितना खाए हैं उसकी रकम 7 करोड़ की है. सिस्टम में चूहे हैं या चूहा वाला सिस्टम है, यह जांच का विषय है.
चूहे की जांच
कवर्धा के चारभाटा सरकारी संग्रहण केंद्र में वित्तीय वर्ष 2024 25 के कुल भंडारण में से लगभग 26000 क्विंटल धान गायब है. आंकलन करने पर यह बात सामने आई है की इतना धान भंडारण केंद्र में है ही नहीं. जब इस बात की जांच की गई तो पता चला कि इसमें अनियमितता हुई है. लेकिन वहां पर मौजूद पदाधिकारी ने कह दिया कि जितने धान का शॉर्टेज हुआ है, उसे चूहे खा गए. 26000 क्विंटल धान जिसका मूल्य लगभग 7 करोड़ रुपए आता है, चूहे खा गए हैं. अब इसकी जांच शुरू हो गई है.
धान के 26000 क्विंटल के कम होने को लेकर शुरू की गई जांच में मुख्य भूमिका में कवर्धा के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मदन साहू को जिम्मेदारी दी गई है. मदन साहू ने जानकारी देते हुए कहा है की प्रथम दृष्ट्या इसमें सीधे तौर पर अनियमितता का मामला सामने आया है. जांच के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं. जितने बिंदुओं पर जांच के आदेश आए हैं, सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है.
प्राथमिक तौर पर अगर इसे देखा जाए तो यह पूरे तौर पर लापरवाही का मामला है. सरकार की तरफ से इसमें कार्रवाई भी की गई है, जो इस भंडारण केंद्र के प्रबंधक थे उनका तबादला कर दिया गया है. बाकी जांच चल रही है, सभी बिंदुओं पर पड़ताल हो रही है. इससे ज्यादा इस स्तर पर कह पाना मुश्किल है. लेकिन मदन साहू ने यह भी माना कि मामला बहुत गंभीर है इससे प्रशासनिक छवि खराब हुई है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता.
मरीजों के बेड पर चूहे
व्यवस्था में एक और बड़ी बात है, चूहे सिर्फ अनाज ही नहीं खा रहे हैं बल्कि चूहे बीमार भी पड़ रहे हैं. व्यवस्था की बीमारी इतनी जबरदस्त है की मरीज तो यहां ठीक नहीं होते लेकिन मरीजों के इलाज के लिए जो बेड लगाए जाते हैं, उस पर चूहे जरूर आराम फरमाते हैं. दूर दराज के जिलों की बात हो तो अलग है, यह राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल कहे जाने वाले मेकाहारा की है. जहां बेडों पर चूहे चहलकदमी करते देखे गए. यह अलग बात है कि इनकी बीमारी को पकड़ने वाला तंत्र अभी विकसित नहीं हुआ है, और इसके डॉक्टर अभी नही आए हैं. यही वजह है की सिस्टम में भी चूहों का इलाज नहीं हो पा रहा है. क्योंकि यह चूहे जिस तरीके से सिस्टम में चीजों को कुतरने का काम करते हैं, उसकी सिलाई कैसे हो इसका कोई नियम बना नहीं पाया. और नियम बना है तो जिन आंखों से उसकी निगहबानी होती होनी है, उसमें चश्मा इतना बड़ा लगा है कि उसे वह दिखता ही नहीं है.
भूपेश ने कहा भ्रष्टाचार है
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कवर्धा में हुए धान घोटाले को लेकर कहा कि यह पूरे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है. कवर्धा में बात सामने आ गई है. बघेल ने कहा कि बाकी जगहों पर भी जांच की जाए तो इस तरह के मामले सामने आएंगे. छत्तीसगढ़ में पूरी चल रही व्यवस्था ही भ्रष्टाचार की बुनियाद पर टिकी है.
अरुण साव ने कहा जांच हो रही
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, उसकी जांच हो रही है. भारतीय जनता पार्टी की चल रही सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है, इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई होगी. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भ्रष्टाचारी को बचाती नहीं है. उनके समर्थन में खड़ी भी नहीं होती है. जो भी मामला प्रकाश में आया है, उसमें जो भी दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी.
जिस मुहाने पर छत्तीसगढ़ खड़ा है, उसमें भ्रष्टाचार से दूर जाने की बात कही जा रही है. अनाज चूहे खा गए इस पर बड़ी चर्चा इसलिए हो रही है कि पूरे छत्तीसगढ़ में न खाकर सोने वाली लोगों की एक बड़ी आबादी यहां रही है. उनका पेट भरे इसके लिए चावल देने की योजना की शुरुआत करने वाला राज्य भी यही रहा है. ऐसे में चावल का गायब होना, निश्चित तौर पर उस भूख पर एक सवाल तो जरूर है, जिसकी भरपाई के लिए सरकार ने खाद्यान्न देने की योजना शुरू की थी. देखना होगा इसमें ईमानदारी से जांच कितनी होती है और सियासत कितनी.

